/सुनंदा पुष्कर ने आत्महत्या की, थरूर का नाम फिर से विवादों में..

सुनंदा पुष्कर ने आत्महत्या की, थरूर का नाम फिर से विवादों में..

-हरेश कुमार||

देश के विवादित मंत्रियों में से एक रहे, शशि थरूर की पत्नी सुनंदा थरूर ने आत्महत्या कर ली है. केंद्रीय मंत्री के पाकिस्तानी पत्रकार, मेहर तरार के साथ ट्विटर पर उनके संबंधों को लेकर कई विवादित ट्वीट आए थे, जिन्हें लेकर पहले ऐसी खबर आई थी कि इनके अकाउंट को हैक किया गया है, लेकिन बाद में सुनंदा ने कहा कि इनके पति थरूर का पाकिस्तानी महिला पत्रकार से अवैध संबंध है, उन्होंने तो उसे पाकिस्तानी खुफिया ब्यूरो का सदस्य तक बता दिया. बुधवार को तो दोनों के बीच में तलाक तक की स्थिति तक की नौबत आ गई, लेकिन सूत्रों के अनुसार, धीरे-धीरे सब कुछ संभला और फिर सुनंदा ने कहा कि हम दोनों में ऐसा कुछ नहीं है और हमारे संबंध मधुर हैं.Tharoor-Sunanda-540

दूसरी तरफ, शशि थरूर का कहना था कि उनके ट्विटर अकाउंट को किसी ने हैक कर लिया है और उस पर उनके संबंध में उल्टी-सीधी बातें लिखी जा रही है.  थरूर के बारे में जैसा कि सबको मालूम होगा कि वे संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय राजनयिक के तौर पर अपनी सेवायें दे चुके हैं. वे तिरुणनंतपुरम से लोकसभा के सदस्य हैं, और ट्विटर पर सबसे ज्यादा व्यस्त रहने वाले राजनयिकों में से एक हैं. उनके फॉलोअर्स की संख्या 20 लाख से ज्यादा है.

थरूर को 2010 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा देना पड़ा था जब  इंडियन प्रीमियर लीग के तत्कालीन अध्यक्ष, ललित मोदी ने यह सनसनीखेज आरोप लगाया था कि थरूर की महिला दोस्त सुनंदा पुष्कर को केरल टीम के लिए गलत तरीके से लाभ पहुंचाया गया था. वे उस समय सुर्खियों में आये थे जब उन्होंने आम भारतीयों को कैट्ल क्लास की संज्ञा दी थी. थरूर और पुष्कर कुछ समय के बाद शादी के पवित्र बंधन में बंध गए थे.

इस बीच, पाकस्तानी महिला पत्रकार तरार ने ट्विटर पर अपनी टिप्पणी लिखते हुए कहा कि मेरा शशि थरूर के साथ एक अफेयर रहा है. मैं उन्हें ट्वीट करती हूं और वे मुझे ट्वीट करते हैं. इसमें बुरा क्या है. गौरतलब है कि शशि थरूर मानव संसाधन मंत्रालय में राज्य मंत्री के पद पर हैं औऱ वे हमेशा विवादों से घिरे रहते हैं. यूपीए2 के कांग्रेस सरकार के लिए यह एक नया विवाद सामने आया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.