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खिसियाई बिल्ली खम्भा नोंचे…

By   /  January 28, 2014  /  3 Comments

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-मदन मोदी||
“आप” ने दिल्ली में 28 दिसम्बर, 2013 को सत्ता संभाली थी और आज उसे सरकार बनाए एक महिना पूरा हो गया है. एक महिने में कोई दिन ऐसा नहीं गया जिस दिन भाजपा और कांग्रेस ने ‘आप’ को नहीं कोसा. अधिकांश मीडिया और लोग ‘आप’ से तो यह पूछ रहे हैं कि ‘आप’ ने एक माह में क्या किया? अपने वादों को कितना पूरा किया? लेकिन, दिल्ली के साथ अन्य राज्य भी हैं जिनकी विधानसभाओं के चुनाव हुए हैं और जहां भाजपा को प्रचण्ड बहुमत मिला है. उनकी सरकारों को भी तो 40 से 45 दिन हो गए हैं, वहां तो पुलिस भी राज्य के अधिकार में ही है, पूर्ण राज्य का दर्जा उन्हें प्राप्त है; उनकी सरकारों को कोई क्यों नहीं पूछ रहा कि क्या उन्होंने अपनी सरकार बनने के बाद से 40-45 दिनों में जनता को राहत देने वाला कोई एक काम भी किया है क्या? भाजपा तो दिल्ली में ‘आप’ द्वारा किए गए कार्यों को भी नकारने पर आमादा है, लेकिन तुलना में कहीं यह बताने के लिए तैयार नहीं कि हमारी अमुक राज्य सरकार ने यह एक काम इतना बढिया किया है, उसके मुकाबले में ‘आप’ कुछ नहीं कर पाई.10kejriwal1

राजस्थान, मध्यप्रदेश हो या कोई अन्य प्रदेश, यहां तक कि साल भर पहले चुनाव हुए वे राज्य हों, इनमें सब में सरे आम लूट और चोरियों की वारदातें बढी हैं, अन्य अपराध बढे हैं और जन कल्याण का कोई महत्त्वपूर्ण काम नहीं हुआ है. क्या भाजपा-कांग्रेस उस पर बात करने को तैयार है? राजस्थान में तो गहलोत सरकार से पहले भी वसुन्धरा सरकार थी और तब भी भूमाफिया व भ्रष्टाचार का भयंकर बोलबाला था और फिर ऐसे तत्वों की बाँछे खिली हुई है, क्योंकि अब तो और भी प्रचण्ड बहुमत है. राजस्थान में कोई तीसरा विकल्प नहीं था और मंहगाई व भ्रष्टाचार से त्रस्त आम आदमी को, खासकर युवाओं को नरेन्द्र भाई मोदी से आस जगी, वहीँ दूसरी ओर कांग्रेस का चुनाव अभियान बिखरा हुआ था, उसमें कई खामियां और सुस्ती थी, इसीलिए वसुंधरा को दुबारा मौका मिल गया. लेकिन इन्होंने सत्ता प्राप्ति के 45 दिनों में किया क्या है, यह सवाल तो पूछने योग्य है या नहीं? क्योकि यह सवाल ‘आप’ को पूछा जा रहा है तो इन्हें क्यों नहीं.

“आप” की सरकार के शपथ लेते ही भाजपा तुरंत सारे वादे एक ही झटके में पूरे करने के लिए पीछे पडी हुई है और बात-बिना बात उसे हरदम कोस रही है. नए-नए में कहीं कोई छोटी-मोटी चूक भी होती है, लेकिन इसके कारण सारे आंदोलन को ही कठगरे में खड़ा करदेना यह तो धत कर्म है. “आप” की सरकार ने सत्ता संभालते ही लोगों के लिए निःशुल्क पानी, आधी दर पर बिजली उपलब्ध करवाने के लिए पहल की है, प्रतिदिन 700 लीटर पानी कम नहीं होता. यहां राजस्थान में भाजपा सरकार में तो एक दिन छोडकर एक दिन यानी पांतरे पानी मिलता है और वह भी इससे कम, ऊपर से पैसा पूरा. बिजली भी 400 युनिट तक आधी दर पर कोई कम नहीं होती. इससे अधिक पानी व बिजली का उपयोग वही करता है जो रईस हो. रईसों को पूरा पैसा देना ही चाहिए. आम आदमी का बहुत बडा वर्ग अभावों में जीता है, उसको तो लाभ ही है. राजस्थान में तो आए दिन बिजली कटौती होती है और पिछली भाजपा सरकार ने ही बिजली की सर्वाधिक दरें बढाई है. साढे पांच हजार बेरोजगारों के लिए ऑटो के लाइसेंस देने का मार्ग प्रशस्त किया है, लोगों को जल्दी न्याय सुलभ करवाने के लिए 48 नई अदालतों का मार्ग प्रशस्त किया है, रेन बसेरों में गरीब आदमी न ठिठुरे इसके लिए कुछ तो व्यवस्था की है, नर्सरी स्कूलों में बच्चों के बिना डोनेशन प्रवेश के मामले में कुछ तो हस्तक्षेप हुआ है, दिल्ली के स्कूलों में सुविधाओं के लिए धन राशि आवंटित की है, कोलेजों में व्यवस्थाएं ठीक की जा रही है. बिजली कंपनियों के ऑडिट और नर्सरी में बच्चों के दाखिले के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी ‘आप’ के कदमों को सही ठहराया है.

संविदाकर्मियों को स्थाई करने के मामले में समयबद्ध कार्यक्रम बना है. भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लोकपाल कानून के लिए कवायद चल रही है, जबकि भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था अभी तक नहीं है. इस तरह के और भी कई निर्णय हुए और हो रहे हैं. इन सब के बावजूद भाजपा खिसियाई बिल्ली खम्भा नोंचे वाली कहावत ही चरितार्थ कर रही है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

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  • Published: 4 years ago on January 28, 2014
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  • Last Modified: January 28, 2014 @ 8:55 pm
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    SATTA KI HADDI NIGALE NA UGALE BAN RAHI HAI

  2. mahendra gupta says:

    अपना घर कौन देखता है साहब,?अब से पहले भी सरकारें बनती रही हैं पर तीस दिन का लेखा जोखा कौन सी सरकार देती है?पहले भी पदासीन मुख्यमंत्रियों ने धरने दिए हैं, पर उनके विषयों में कोई विरोध देखने को नहीं मिला न ही किसी कोर्ट में अपील की गयी पर इस बार कांग्रेस की सरकार के खिलाफ केजरीवाल धरने पर बैठ गए, तो हंगामा हो गया.कांग्रेस मुहं छिपा कर समर्थन वापिस लेने को है ताकि थू थू भी न हो, और लोकसभा चुनाव में नुक्सान भी.मीडिया भी जो पहले इतना सर चढ़ाये हुए था अब उसका भी तेवर बदल गया है.मन केजरीवाल पार्टी ने कुछ गलतियां की, हवाई वादे कर दिए,उत्साह में कुछ ज्यादा बोल गए मंत्री भी पहली बार सत्ता में आ इतराने लगे जब कि अन्य दलों के साथ भी कमोबेश होता है,होता रहा है, पर यह मूल्यांकन,कुछ ज्यादा ही कसौटी पर कसा जा रहा है .केजरीवाल कैसे इन सबसे निपटते हैं. अब उनकी बढ़ती मांगे ,जांच आयोग कैसे कांग्रेस को कितना भाते हैं देखना दिलचस्प होगा.

  3. अपना घर कौन देखता है साहब,?अब से पहले भी सरकारें बनती रही हैं पर तीस दिन का लेखा जोखा कौन सी सरकार देती है?पहले भी पदासीन मुख्यमंत्रियों ने धरने दिए हैं, पर उनके विषयों में कोई विरोध देखने को नहीं मिला न ही किसी कोर्ट में अपील की गयी पर इस बार कांग्रेस की सरकार के खिलाफ केजरीवाल धरने पर बैठ गए, तो हंगामा हो गया.कांग्रेस मुहं छिपा कर समर्थन वापिस लेने को है ताकि थू थू भी न हो, और लोकसभा चुनाव में नुक्सान भी.मीडिया भी जो पहले इतना सर चढ़ाये हुए था अब उसका भी तेवर बदल गया है.मन केजरीवाल पार्टी ने कुछ गलतियां की, हवाई वादे कर दिए,उत्साह में कुछ ज्यादा बोल गए मंत्री भी पहली बार सत्ता में आ इतराने लगे जब कि अन्य दलों के साथ भी कमोबेश होता है,होता रहा है, पर यह मूल्यांकन,कुछ ज्यादा ही कसौटी पर कसा जा रहा है .केजरीवाल कैसे इन सबसे निपटते हैं. अब उनकी बढ़ती मांगे ,जांच आयोग कैसे कांग्रेस को कितना भाते हैं देखना दिलचस्प होगा.

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