/भोजन के बदले मासूम बच्चियों से सेक्स करते थे सैनिक, विकीलीक्स ने किया राजफाश

भोजन के बदले मासूम बच्चियों से सेक्स करते थे सैनिक, विकीलीक्स ने किया राजफाश

 

जरा कल्पना कीजिए कि कैसी रही होगी वह भूख जिसने गरीब मां-बाप को अपनी बच्चियों को हवस के भूखे भेड़ियों के हवाले कर दिया होगा। कई देशों की नाक में दम करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स ने ताजा जारी संदेशों में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शांति सैनिकों की करतूतों का खुलासा किया है।

वेबसाइट के अनुसार यूएन के ‘शांति सैनिक’ पश्चिमी अफ्रीकी देश आइवरी कोस्ट में तैनाती के दौरान नाबालिग या कम उम्र की लड़कियों को खाना या पनाह देने के बदले उनके साथ सेक्स करते थे। जनवरी 2010 में अमेरिकी दूतावास द्वारा लिखे गए केबिल संदेशों के मुताबिक यूएन के कई शांति सैनिक तब आइवरी कोस्ट के हिंसाग्रस्त तौलेप्लू क्षेत्र में तैनात थे।

‘भोजन के बदले सेक्स’ का खुलासा तब हुआ जब ब्रिटेन के सहायता समूह सेव द चिल्ड्रन ने 2009 में हिंसाग्रस्त क्षेत्र का दौरा किया। तब 10 में से 8 लड़कियों ने कबूल किया कि उन्हें किसी न किसी मूल आवश्यकता को पूरी करने के बदले रोजाना बेनिनीस शांति सैनिकों (यूएन की शांति सेना में शामिल) के साथ सेक्स करना पड़ा।

माता-पिता का प्रोत्साहन : इतना ही नहीं, संदेशों में यह भी कहा गया कि भोजन के बदले सेक्स के लिए हिंसाग्रस्त क्षेत्र में रहने वाले माता-पिता खुद अपनी बेटी को बेनिनीस शांति सैनिकों के साथ सोने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्हें पता था कि शांति सैनिक उनकी बच्ची की जरूरतें पूरी करेंगे। कई बार ऐसा भी होता था जब बेनिनीस शांति सैनिक खाना या पनाह देने के बदले कम उम्र की अफ्रीकी लड़कियों के साथ सेक्स करते थे।

उन्हें हटा दिया सेवा से : इस सप्ताह की शुरुआत में यूएन के प्रवक्ता माइकल बोनारडिक्स ने पुष्टि करते हुए बताया था कि एक साल चली लंबी जाँच के बाद 10 कमांडरों समेत 16 बेनिनीस शांति सैनिकों को सेवा से हटा दिया गया है। इन सैनिकों को महिलाओं का शोषण और दुरुपयोग रोकने के लिए भेजा गया था, लेकिन वे नाकाम रहे।

शांति सैनिकों द्वारा यौन दुराचार या सेक्स की खबरें नई बात नहीं हैं। इसके पहले उनके नाम कांगो, कंबोडिया और हैती जैसे देशों में गलत कार्य के लिए आते रहे हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.