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उत्तर प्रदेश कांग्रेस की जम्बो कमेटी में रायबरेली-अमेठी की छाप…

By   /  January 31, 2014  /  No Comments

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-गौरव अवस्थी||

लखनऊ. उत्तर प्रदेश कांग्रेस की जम्बो कार्यसमिति लम्बी प्रतीक्षा के बाद आख़िरकार घोषित हो ही गई. कमेटी में रायबरेली अमेठी से पांच उपाध्य्क्ष, एक महामंत्री और तीन सचिव बनाये गए हैं.Flag_of_the_Indian_National_Congress.svg_

इसके पहले जिले के दो -एक नेताओं को ही प्रदेश कमेटी में जगह मिली थी, लेकिन पिछले विधान सभा चुनाव में रायबरेली-अमेठी में कांग्रेस की पराजय के बाद आलाकमान काफी सतर्कता बरत रहा है और आम चुनाव में कोई रिस्क नहीं उठाना चाहता.

इसीलिए विस चुनाव में हारे विधायकॉ को भी एडजस्ट किया गया है. कमेटी में उपाध्यक्ष बनाये गए गणेश शंकर पाण्डेय पहले भी इस पद पर रह चुके हैं. उनके अलावा विधायक डॉ मो मुस्लिम, पूर्व विधायक अशोक सिंह, शिव गणेश लोधी और शिव बालक पासी को भी उपाध्यक्ष बनाया गया है. रायबरेली के नेता ओपी श्रीवास्तव को महामंत्री और पल्टू पासी , शहनाज पठान व् शिव कुमार पाण्डेय को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है.

फैजाबाद के सांसद निर्मल खत्री को सवा साल पहले प्रदेश कांग्रेस की कमान दी गयी थी. इस दौरान कमेटी गठित करने की कोशिशें तमाम हुई लेकिन कमेटी को मंजूरी नहीं मिल पाई. प्रदेश में कांग्रेस की यह नियति है कि चाहे भी दुर्दिन में हो लेकिन उसकी चाल नहीं बदलती. हैं कि इस दरम्यान खत्री को लेकर ना जाने कितनी अफवाहें उड़ीं. एक केंद्रीय मंत्री ने तरह-तरह की कलाएं दिखायी. कमान मिलने की हसरत भी सामने आयी पर कांग्रेस ने ना अपनी रीति छोड़ी ना नीति.

नई कमेटी में कहने को तो नए-पुराने का संतुलन बिठाया गया है लेकिन कुछ विसंगतियां भी सामने आई हैं. युवक कांग्रेस के एक पूर्व अध्यक्ष  इस कमेटी में सचिव हैं और उनके महामंत्री रहे एक युवा नेता अब उनके ऊपर महामंत्री हैं. चुनाव की बेला में यह कमेटी क्या गुल खिला पायेगी कहना कठिन है पर इतना जरुर है कि अंदरूनी उठापटक तेज होगी. ऐसे में चुनावी तैयारियों का क्या हश्र होगा अंदाज करना कठिन नहीं है.

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  • Published: 4 years ago on January 31, 2014
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  • Last Modified: January 31, 2014 @ 8:12 am
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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