/मोदी सरकार की नज़र में रोज 11 रुपए कमाने वाला गरीब नहीं…

मोदी सरकार की नज़र में रोज 11 रुपए कमाने वाला गरीब नहीं…

-शत्रुघ्न शर्मा||

कमाई के जरिए अमीरी का दायरा तय करने के मामले में हाथ जला चुकी केंद्र सरकार के बाद अब गुजरात सरकार ने गांव में 11 रुपए और शहर में 17 रुपए कमाने वाले को अमीर बताकर नए विवाद को जन्म दे दिया है. स्थानीय निकाय की सिफारिश पर बनी नई बीपीएल सूची तथा बायोमैट्रिक राशन कार्ड को लेकर भी सरकार घेरे में है.narendra_modi2

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सप्लाई शाखा को गत माह जारी एक परिपत्र में बताया गया है कि राज्य के ग्रामीण इलाके में प्रतिमाह 324 रुपए तथा शहरी इलाके में 501 रुपए से कम कमाने वाला ही गरीबी रेखा से नीचे माना जा सकता है. भारत सरकार के योजना आयोग की ओर से शहर में 32 रुपए और गांव में 26 रुपए रोजाना कमाने वाले को अमीर बताने पर भी खूब हो-हल्ला मचा था.

गुजरात सरकार की ओर से 16 दिसंबर 2013 को एक परिपत्र जारी कर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को बताया गया है कि राज्य के शहरी इलाके में 16.80 रुपए और गांवों में 10.80 रुपए कमाने वाले को ही बीपीएल कार्ड के योग्य माना जाए. नागरिक आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण विकास एजेंसी व शहरों में स्थानीय निकाय के तय पैमाने के अनुसार बीपीएल परिवार के लिए योग्य परिवारों को शून्य से 16 क्रमांक के बीच रखा है, लेकिन 16 अंक से ऊपर वाले परिवारों को बीपीएल की सूची में शामिल नहीं किया जा सकता.

गुजरात राशन डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी बताते हैं कि एसी कमरों में बैठकर नीति बनाने वाले अधिकारी सरकार की इच्छा अनुसार आंकड़े तैयार करते हैं. राज्य में 31 लाख परिवार बीपीएल हैं, जिनमें से 8 लाख को केंद्र सरकार बीपीएल मानने को तैयार नहीं है.

उनका आरोप है कि राज्य में गरीब को बीपीएल कार्ड भी नहीं मिल रहा जबकि अधिकारी व स्थानीय नेताओं की मदद से कई अमीर बीपीएल सूची में शामिल हो सरकारी लाभ उठा रहे हैं. प्रहलाद मोदी एपीएल व बीपीएल के लिए जारी बायोमैट्रिक राशन कार्ड व्यवस्था को भी गरीबों के लिए परेशानी का सबब मानते हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.