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अन्ना हजारे और उनकी टीम के खिलाफ याचिका

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के खिलाफ एक शख्स ने दिल्ली की अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उन्होंने सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का षड्यंत्र किया है।

60 साल के सतबीर सिंह नाम के इस शख्स ने महानगर दंडाधिकारी त्यागिता सिंह की अदालत में शनिवार को याचिका दायर की और दलील दी कि अन्ना तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। याचिका पर सुनवाई सोमवार को होगी।

हरियाणा के सतबीर ने अपनी याचिका में कहा है कि अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों ने राष्ट्र को नुकसान पहुंचाने और केंद्र सरकार तथा इसके मंत्रियों को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र किया। उन्होंने लोगों को एकत्र होने के लिए उकसाया। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य सांसदों के खिलाफ गलत भाषण दिए।

याचिकाकर्ता के अनुसार, अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के निर्देश पर लोग मंत्रियों के घरों के बाहर एकत्र हुए, जिससे क्षेत्र में शांति भंग हुई। यहां तक कि यातायात भी बाधित हुआ। मीडिया के जरिये उन्होंने सरकार को अपमानित किया और उन पर अपना जन लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए दबाव बनाया।

सतबीर ने अन्ना के सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र करने, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, दंगा फैलाने, उपद्रव करने, मानहानि सहित अन्य अपराधों का आरोप लगाया। गौरतलब है कि प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना ने 16 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी। संसद में इस पर विशेष बहस और अन्ना हजारे के सहयोगियों की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति का प्रस्ताव पारित होने के बाद 28 अगस्त को उन्होंने अनशन समाप्त कर दिया था।

अन्ना के सहयोगियों प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी को सांसदों का मजाक उड़ाने और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया गया है।

(साभार याहू जागरण)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.