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अन्ना हजारे और उनकी टीम के खिलाफ याचिका

By   /  September 4, 2011  /  1 Comment

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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के खिलाफ एक शख्स ने दिल्ली की अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उन्होंने सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का षड्यंत्र किया है।

60 साल के सतबीर सिंह नाम के इस शख्स ने महानगर दंडाधिकारी त्यागिता सिंह की अदालत में शनिवार को याचिका दायर की और दलील दी कि अन्ना तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। याचिका पर सुनवाई सोमवार को होगी।

हरियाणा के सतबीर ने अपनी याचिका में कहा है कि अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों ने राष्ट्र को नुकसान पहुंचाने और केंद्र सरकार तथा इसके मंत्रियों को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र किया। उन्होंने लोगों को एकत्र होने के लिए उकसाया। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य सांसदों के खिलाफ गलत भाषण दिए।

याचिकाकर्ता के अनुसार, अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के निर्देश पर लोग मंत्रियों के घरों के बाहर एकत्र हुए, जिससे क्षेत्र में शांति भंग हुई। यहां तक कि यातायात भी बाधित हुआ। मीडिया के जरिये उन्होंने सरकार को अपमानित किया और उन पर अपना जन लोकपाल विधेयक पारित कराने के लिए दबाव बनाया।

सतबीर ने अन्ना के सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र करने, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, दंगा फैलाने, उपद्रव करने, मानहानि सहित अन्य अपराधों का आरोप लगाया। गौरतलब है कि प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर अन्ना ने 16 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी। संसद में इस पर विशेष बहस और अन्ना हजारे के सहयोगियों की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति का प्रस्ताव पारित होने के बाद 28 अगस्त को उन्होंने अनशन समाप्त कर दिया था।

अन्ना के सहयोगियों प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी को सांसदों का मजाक उड़ाने और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया गया है।

(साभार याहू जागरण)

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  • Published: 6 years ago on September 4, 2011
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  • Last Modified: September 4, 2011 @ 5:23 pm
  • Filed Under: देश
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. sonikashiv says:

    न्याय के दो रुप

    आदरणीय डॉ. किरण बेदी जी के ऊपर विशेषाधिकार उलंघन का मामला सुनकर बड़ा अजीब सा लगता है हम यह तो समझते हैं कि जैसा कि आदरणीय शरद यादव जी ने संसद में कहा कि यह लोकपाल का मामला पास करो ताकि यहाँ रखे डब्बे (मीडिया) कम से कम देश के दूसरे हिस्सों में जाकर देश की हो रही दुर्दशा बाढ जैसी हालत पर कुछ दिखायें और उसके लिये उन्होंने माहोल को एक रंग में रंगने का काम करते हुये कुछ ऐसे जुमले कहे जिसको आम जनता ने नज़र अंदाज करते हुये कि यह तो राजनीतिक कमज़ोरी है नकार दिया मगर वहाँ उपस्थित कुछ ऐसे सदस्यों ने हाईजेक कर लिया व विशेषाधिकार उल्लंघन का मामला बना दिया हम जानना चाहते हैं ज़रा वे सदस्य यह तो बतायें कि जो चोर होता है वह कभी भी खुले में बातचीत करने से घबराता है और जिसने कभी भी किसी प्रकार की चोरी, झूठ बोलना या धोखा देने जैसे कामों को अंजाम नहीं दिया होता है, उसे खुले मंच से किसी भी प्रकार का वाद-विवाद करने में डर नहीं लगता | क्या यह कहावत सही है अथवा गलत, कृपया वे सदस्य आम जनता को बतायें |
    क्योंकि हमारी टीम अन्ना की सदस्या जो देश की पहली महिला आई.पी.एस. अफसर जिसने हमेशा ही नाजायज़ बातों को मानने से इंकार किया, जिसने कानून को बाहूबली और गरीब इंसानों के लिये एक समझा हो जिसके पास उनके किये गये कामों की वजह से पदकों का अंबार लगा हो, उन्होंने जब कहा था कि “जन लोकपाल बिल से संबंधित कार्यवाही को जो सिविल सदस्यों और सरकार के सदस्यों की संयुक्त कमेटी द्वारा हो रही थी” को इस तरह से करें कि जनता को नज़र आये मगर ऐसा नहीं किया गया, इसका मतलब क्या है ? सिविल सदस्यों को किस तरह जलील किया गया होगा, यह जनता को कपिल सिब्बल के दिये गये बयानों द्वारा पूरी तरह समझ में आ गया था और यह सभी जानते हैं कि जलील होने के बाद कोई किस तरह डिप्रेशन में चला जाता है और कई बार तो सुसाईड भी कर लेता है ऐसे में ज़िम्मेदार किसको माना जाता है ? उसको जिसने जलील किया या वो जो जलील हुआ, कृप्या आपत्ती करने वाले वे संसद सदस्य आम जनता के सामने इसे परिभाषित करें |
    हमारे टीम अन्ना के सदस्य बहुत खुश थे तब जब प्रणब मुखर्जी से मिलकर आये और पूरे देश को बताया कि हमारी लगभग सभी माँगे मान ली गई हैं, कुछ मुद्दों पर थोडा सा असमंजस है जो सुबह तह हमारे हक में हो जायेगा | हम पूछना चाहते हैं कि क्या वे जनता को बेवकूफ बना रहे थे, जनता अब जान गई है कि कौन किसे बेवकूफ बना रहा है और दूसरे दिन हमारे टीम अन्ना के सदस्यों को इस तरह जलील किया गया जो हमारे देश की जनता की आँखों के तारे हैं, जिन्होंने देश की जनता की आँखें खोली व उन्हें अपने अधिकारों से आगाह किया, उनको जनता के उन सेवकों (सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने भी जनता का सेवक कहा है) ने इस तरह जलील किया जिसकी वजह से उन्होंने एक प्रतिक्रिया दिखायी जिसके असली गुनहगार सरकार के वे नुमाईंदे हैं, (जिन्होंने जनता द्वारा भेजे हुये दूत (अन्ना टीम) को अपमानित किया) अतः उन्हें सज़ा मिलनी चाहिये |
    कभी भी कहीं भी किसी दुश्मन का भी दूत अगर कहीं जाता है, तो उसको आदर दिया जाता है मगर यहाँ तो पूरी तरह से बेईज़्ज़त किया जनता ने यह सब देखा है जिसका जवाब जनता अवश्य देगी|

    जय हिन्द
    शिव नारायण शर्मा

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