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बदरीनाथ मंदिर का मुख्य पुजारी छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार..

By   /  February 5, 2014  /  3 Comments

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चार धामों में से एक बदरीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी (रावल) केशव प्रसाद नंबूदरी द्वारा 28 साल की युवती के साथ अश्लील हरकत करने का शर्मनाक मामला सामने आया है. पुजारी ने छतरपुर स्थित एक होटल में बीयर के नशे में वारदात को अंजाम दिया. साजिश में मुख्य पुजारी का चचेरा भाई विष्णु प्रकाश भी शामिल था. पुलिस ने छेड़खानी व कमरे में जबरन रोकने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों को साकेत कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. पुलिस ने दोनों का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है.rawal

पुलिस के मुताबिक, केशव प्रसाद नंबूदरी (38) व विष्णु प्रकाश मूलरूप से केरल के रहने वाले हैं. केशव कई साल से बदरीनाथ मंदिर में मुख्य पुजारी है. पीड़ित युवती गुलमोहर पार्क, दिल्ली की रहने वाली है. वह शादीशुदा है. उसका बदरीनाथ धाम में एक थ्री स्टार होटल है, जिसकी वह एमडी (प्रबंध निदेशक) है.

होटल कारोबार होने के कारण वह अक्सर उत्तराखंड जाती रहती है. मुख्य पुजारी व उसमें काफी समय से जान-पहचान थी. दो फरवरी को केशव चचेरे भाई के साथ घूमने के बहाने दिल्ली आया. यहां एक होटल में ठहरा. तीन फरवरी की शाम केशव ने होटल में बीयर पी. तेज नशा चढ़ने के बाद उसने शाम सवा पांच बजे युवती को फोन कर होटल में मिलने का अनुरोध किया. थोड़ी बार उसे दोबारा फोन किया. युवती करीब पौने सात बजे केशव से मिलने होटल पहुंची. कमरे में प्रवेश करते ही केशव ने विष्णु को बाहर भेज दिया. वह कमरे के बाहर निगरानी कर रहा था.

युवती के मुताबिक, केशव को तेज नशा चढ़ा था, जिससे वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था. बातचीत के दौरान उसने कमरे को अंदर से बंद कर अश्लील हरकत शुरू कर दी. युवती किसी तरह से बचकर बाहर निकली और होटल कर्मियों को सूचना दी. जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने केशव व विष्णु को गिरफ्तार कर लिया.

मुख्य पुजारी पद से निलंबित

देहरादून. छेड़खानी का आरोप लगने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने केशव प्रसाद नंबूदरी को मुख्य पुजारी पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. अब नायब रावल वीसी ईश्वरा मुख्य पुजारी का दायित्व निभाएंगे.

समिति ने केशव पर लगे आरोपों की जांच के लिए कमेटी गठित करने का निर्णय भी लिया है. समित के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि केशव खुद को निर्दोष साबित करें. बेदाग निकलने पर उन्हें इस पद पर दोबारा नियुक्ति मिलेगी.

रावल पर लगे आरोपों से आमो-खास सन्न

दिल्ली में गिरफ्तार बदरीनाथ के निलंबित रावल (मुख्य पुजारी) केशव नंबूदरी पर लगे आरोपों से देवभूमि के आम और खास सन्न हैं. श्री बदरीनाथ धाम में रावल के सहयोगियों सहित स्थानीय लोगों को भी आरोपों पर सहसा विश्वास ही नहीं आ रहा है. शर्मीले स्वभाव के रावल की बदरीनाथ में पहचान अच्छे आचरण वाले संत की है. बीते 11 वर्ष से वह श्री बदरीनाथ धाम की सेवा में हैं. उनके निकट सहयोगी और बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि ‘उन्होंने नायब रावल या रावल रहते कभी मर्यादाओं के उल्लंघन नहीं किया.’

केरल का यह नंबूदरीपाद ब्राह्मण वर्ष 2002 में बदरीनाथ धाम में नायब रावल नियुक्त किया गया. वर्ष 2009 में तत्कालीन रावल बदरी प्रसाद नंबूदरी ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद केशव नंबूदरी को रावल नियुक्त किया गया. तब से वह बदरीनाथ के मुख्य पुजारी के रूप में कार्य कर रहे थे. धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि वह रावल को लंबे समय से जानते हैं. पूजा के बाद अपने निवास में भक्तों से मिलने में भी वे दूरी बनाकर रखते थे. बदरीनाथ पंडा पंचायत के सदस्य मुकेश अल्खनिया भी उनियाल से सहमत हैं. वह बताते हैं कि रावल केशव प्रसाद का आचरण कभी मर्यादाओं के विपरीत नहीं रहा. अल्खनिया के अनुसार केशव पूजा पाठ में लीन रहने वाले व्यक्ति हैं.
बदरीनाथ मंदिर के हक हकूकधारी मेहता थोक के अध्यक्ष बलदेव मेहता बताते हैं- ‘मै रावल केशव प्रसाद नंबूदरी को तबसे जानता हूं, जब केशव 18 साल के थे. वह हमेशा मर्यादाओं में रहे.’

खास होता है रावल का पद

भगवान विष्णु की पूजा का अधिकार एकमात्र रावल के पास होता है. शंकराचार्य परंपरा के अनुसार, बदरीनाथ में यह दायित्व केरल के कन्नूर जिले के नंबूदरीपाद ब्राह्मणों का है.
रावल की नियुक्ति बदरी-केदार मंदिर समिति करती है. इसके लिए इन्हें वेतन के अलावा चढ़ावे में साढ़े सात फीसद हिस्सा भी दिया जाता है. रावल के लिए कोई सेवा अवधि निश्चित नहीं की गई है. वे आजीवन भी इस पद पर रह सकते हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    lagata hai desh ke sare kuvo me bhang pari hai sub mad me mast hai shram aati hai in loogo pr

  2. mahendra gupta says:

    सनातन धर्म पर एक और तमाचा.नित प्रतिदिन ऐसी वारदात के बाद लोग क्यों विश्वास करते हैं समझ के बाहर है पहले निम्न चरित्र के ये आरोप आम लोगों के गिरते नैतिक मूल्यों को बता .चुप हो जाते थे पर आजकल उच्च पदस्थ लोगों पर ये आरोप व उनकी छिपने कि वरती उन आरोपों को बदनाम करने का एक जरिया बता पल्ला झाड़ने का माध्यम बन गया है.कभी संत, कभी जजों पर कभी सची स्टार के पदाधिकारियों पर और अब पुजारियों पर ये आरोप संकेत देते हैं कि यह सब समाज में अरसे से चल रहा है पर अब निर्भया बिल के आने के बाद कुछ ज्यादा ही शिकायतें आने लगी हैं.बिल शायद बलात्कारियों को तो नहीं डरा सका पर महिलाओं में यह साहस जरूर भर सका है.इन शिकायतों की सच्चाई तो बाद में सिद्ध होगी

  3. सनातन धर्म पर एक और तमाचा.नित प्रतिदिन ऐसी वारदात के बाद लोग क्यों विश्वास करते हैं समझ के बाहर है पहले निम्न चरित्र के ये आरोप आम लोगों के गिरते नैतिक मूल्यों को बता .चुप हो जाते थे पर आजकल उच्च पदस्थ लोगों पर ये आरोप व उनकी छिपने कि वरती उन आरोपों को बदनाम करने का एक जरिया बता पल्ला झाड़ने का माध्यम बन गया है.कभी संत, कभी जजों पर कभी सची स्टार के पदाधिकारियों पर और अब पुजारियों पर ये आरोप संकेत देते हैं कि यह सब समाज में अरसे से चल रहा है पर अब निर्भया बिल के आने के बाद कुछ ज्यादा ही शिकायतें आने लगी हैं.बिल शायद बलात्कारियों को तो नहीं डरा सका पर महिलाओं में यह साहस जरूर भर सका है.इन शिकायतों की सच्चाई तो बाद में सिद्ध होगी

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