/सोमनाथ भारती की शिकायत सच साबित..

सोमनाथ भारती की शिकायत सच साबित..

खिड़की एक्सटेंशन में युगांडा की महिलाओं पर ड्रग्स बेचने और सेक्स रैकेट में शामिल होने का आरोप लगाने वाले दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती के पक्ष में युगांडा की तीन महिलाएं उतर आई. सोमवार शाम को तीनों महिलाओं ने मोहल्ला सभा में संपर्क कर मंत्री से मदद मांगी है. जिससे उत्साहित आप अब इस मामले को भुनाने की कोशिश में जुट गई है.Somnath-Bharti

आप नेता संजय सिंह ने कहा कि इस घटना से साबित होता है कि पुलिस हमेशा की तरह पहले भी गलत थी. अब पुलिस कमिश्नर को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि वह लोगों की शिकायत को गंभीरता से क्यों नहीं लेते. पार्टी कार्यकर्ता पुलिस के इस रवैये के खिलाफ बुधवार को जंतर-मंतर पर धरना देंगे. संजय ने बताया कि सोमवार को खिड़की एक्सटेंशन में रहने वाली युगांडा की तीन महिलाएं दक्षिण जिला के उपायुक्त से मिलीं और बताया कि उनसे एजेंट जबरन अनैतिक कार्य कराता है. उन्हें नौकरी देने के बहाने लाया था. उनकी आपबीती सुनने के बात उपायुक्त व साकेत जिला अदालत से मिले आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया.

बरखा सिंह ने पुलिस आयुक्त को लिखा पत्र
खिड़की एक्सटेंशन में युगांडा की तीन महिलाओं की शिकायत के बाद महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह ने पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में ठीक तरह से जांच करने की मांग की है. बरखा ने बताया कि युगांडा की यह तीन महिलाएं अभी नारी निकेतन में रह रही हैं, जिनसे मिलने वह बुधवार को जाएंगी.

क्या हुआ था पहले
15 जनवरी की रात को खिड़की एक्सटेंशन में ‘खादी’ और ‘खाकी’ के बीच जमकर बहसबाजी हुई थी. आरोप है कि दिल्ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती रात 12 बजे इलाके की पुलिस को सूचना दिए बिना मीडिया के साथ इलाके में चल रहे सेक्स रैकेट पर छापा मारने पहुंचे. तभी वहां पुलिस की टीम पहुंची और मंत्री जी को दायरे में रहने को कहा. सोमनाथ भारती का कहना था कि उन्हें लगातार स्थानीय लोगों से शिकायत मिल रही थी कि एक फ्लैट में सेक्स रैकेट और ड्रग्स का धंधा चल रहा है. लेकिन शिकायतों के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की.

महिला सुरक्षा दस्ता बनाने की कवायद तेज
दिल्ली सरकार ने महिला दस्तों की तैनाती की कवायद तेज कर दी है. माना जा रहा है कि 15 फरवरी तक सरकार इस मामले में कोई ठोस निर्णय ले सकती है. मुख्य सचिव एसके श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर हाल ही में अधिकारियों की बैठक बुलाई और महिला दस्ते के गठन के तौर पर तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दस्ते के गठन के लिए बनाई गई समिति तेजी से अपना काम कर रही है. बता दें कि केजरीवाल सरकार ने महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शहर में महिला सुरक्षा दस्ते के गठन का ऐलान किया था. मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों कहा कि यह दस्ता लगभग उसी प्रकार होगा जिस प्रकार निजी सुरक्षा गार्ड होते हैं. सूत्रों ने कहा कि तय यह किया जाना है कि इसमें केवल सेना के सेवानिवृत्त लोगों को रखा जाए या अन्य नौजवानों को भी. यह भी देखा जा रहा है कि दस्ते को किस प्रकार के अधिकार दिए जाएं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.