/तालिबान सिंध से हिन्दुओं को खदेड़ रहे भारत, थार एक्सप्रेस बनी जरिया…

तालिबान सिंध से हिन्दुओं को खदेड़ रहे भारत, थार एक्सप्रेस बनी जरिया…

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर पश्चिमी राजस्थान के सरहदी बाड़मेर जिले के ठीक सामने स्थित पाकिस्तान की सीमा पर बसे सिंध प्रान्त से हिन्दुओं का पलायन जारी है. सिंध प्रान्त के कई हिन्दू बाहुल्य गाँव आज हिन्दू विहीन हो गए अहिं तो कई गाँवों के लोग पलायन कि तैयारी में जुटे हैं. सिंध प्रान्त से हिन्दुओ को खदेड़ने में पाकिस्तान सरकार और तालिबानी अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं. साथ ही सिंध प्रान्त से हिन्दुओ के पलायन के प्रथम चरण के बाद पश्चिमी राजस्थान कि सीमा पर तालिबान और आई एस आई अपनी गतिविधियां ना केवल बढ़ाने वाले हैं बल्कि इस सरहद को भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र बनाने कि योजना हैं.sindh

खुफिया विभाग के सूत्रों ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि आम तौर पर बाड़मेर जिले कि सरहद मुनाबाव से पाकिस्तान के खोखरापार के मध्य चलने वाली थार एक्सप्रेस से पाकिस्तान से आने वाले हज़ारों परिवार भारत आकर बस गए और अब वो पाकिस्तान नहीं लौट रहे. यह सभी पाक नागरिक सिंध प्रान्त के हैं. इनमे से अधिकांश रहिमयारखां जिले के हिन्दू हैं. सूत्रानुसार पाकिस्तान सरकार सिंध प्रान्त कि आज़ादी के लिए जिए सिंध और एम् क्यू एम् द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन को कुचलने के लिए तालिबान और आई एएस आई की मदद से सिंध प्रान्त से सोची समझी रणनीति के तहत हिन्दू विहीन करने में जूटे हैं, इस योजना में पाकिस्तान कामयाब हो रहा हैं वहीं, भारत सरकार पाकिस्तान के मंसूबो को समझने में नाकाम रही हैं. भारत सरकार पाकिस्तान से पलायन कर आ रहे हिन्दुओ को पनाह दे रही है.

सुरक्षा एजेंसियों की माने तो गत दो सालों में थार एक्सप्रेस से कोई पैंतालीस हज़ार यात्री भारत आये जिसमें से करीब छह हज़ार हिन्दू पाक नागरिक वापस पाकिस्तान नहीं लौटे. पाकिस्तान से तालिबान और आई एस आई के सताए हिन्दू परिवार वापस लौटना नहीं चाहते. जिसके चलते हिन्दू परिवार पश्चिमी राजस्थान में स्थायी रूप से बस गए. बाड़मेर जिले में कोई सैंकड़ों परिवार पिछले चार सालों में आकर पाक हिन्दू परिवार अवैध रूप से बस गए हैं. इन लोगो ने यहाँ आकर अपने वोटर आई कार्ड और राशन कार्ड तक बना लिए.

तालिबानी लडके येन केन प्रकारेण सिंध प्रान्त को हिन्दुओ से मुक्त करना चाहते हैं. क्यूंकि वहां उनके मूवमेंट में हिन्दू बाधक बन रहे हैं. तालिबान ने सोची समझी रणनीति के तहत सिंध से हिन्दुओ को खदेड़ भारत भेजना शुरू कर दिया है. सिंध प्रान्त के सांगड तालुका से अधिकांस हिन्दू परिवार अपना सब कुछ छोड़ कर भारत आ चुके हैं. थार एक्सप्रेस के प्रत्येक फेरे में पाकिस्तान से पलायन कर भारत आने वाले हिन्दू परिवारो का सिलसिला जारी हैं.thar ex

खुफिया एजेंसियों का मानना हैं कि भारत सरकार को हिन्दुओं के इस पलायन को गम्भीरता से लेना चाहिए. क्योंकि जब तक हिन्दू सिंध में हैं तब तक पश्चिमी राजस्थान कि सरहद तालिबानियों से सुरक्षित हैं. सिंध हिन्दू विहीन हो गया तो तालिबान अपने नापाक इरादों में कामयाब हो जायेगा और आने वाले दस सालो में तालिबान की भारत विरोधी गतिविधियों का केंद्र बिंदु पश्चिमी राजस्थान कि सरहद हो जायेगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.