/दीपक चौरसिया ने रामदेव से पूछा, ”आपके कितने बहनोई हैं..?” भक्तों के विरोध पर काटा सवाल

दीपक चौरसिया ने रामदेव से पूछा, ”आपके कितने बहनोई हैं..?” भक्तों के विरोध पर काटा सवाल

स्टार न्यूज़ पर दीपक चौरसिया ने बाबा रामदेव से लाईव चले एक शो में बेबाक सवाल पूछ तो लिए, लेकिन दर्शकों ने विरोध कर इतने ई मेल भेजे कि स्टार न्यूज़ को दोबारा टेलीकास्ट में आपत्तिजनक सवाल हटाने पड़े।

बीच बहस में

दरअसल 3 सितंबर को रात स्टार न्यूज पर दीपक चौरसिया और बाबा रामदेव के बीच लाईव बहस का प्रसारण किया जिसमें खूब गरमा-गरमी रही। दीपक ने बाबा पर आरोपों की झड़ी लगा दी। लेकिन रामदेव तो ठहरे तथ्यों के खिलाड़ी। एक-एक कर सारे सवालों का करारा जवाब दिया। दीपक ने उन्हें यह कह कर उलझन में डाल दिया कि जब वे रामलीला मैदान की अपनी रैली के लिए दिल्ली आए थे तो उनके निजी विमान का किराया उनके ट्रस्ट ने दिया था। लेकिन कार्यक्रम के कमर्शियल ब्रेक के दौरान ही उनके सहयोगियों ने बता दिया कि वास्तव में वह भुगतान उनकी एक महिला भक्त ने किया था और स्टार न्यूज़ के आरोप झूठे हैं।

जब रामदेव ने ट्रस्ट और आश्रम के सवालों पर बाबा रामदेव ने अपनी सफाई दे दी तो दीपक निजी हमले पर उतर आए। नौबत यहां तक आ पहुंची कि उन्होंने एक बार तो बाबा से पूछ डाला, ”आपके कितने बहनोई हैं…?” वो आगे कुछ कहते कि रामदेव ने मर्यादाओं की सीमा में रहने की सलाह दे डाली। तब जा कर कहीं दीपक कुछ शांत हुए।

हालांकि दीपक इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट का हवाला दे रहे थे, और कहना चाह रहे थे कि ट्रस्ट की संपत्ति में स्वामी रामदेव के परिवार के लोग फायदा उठा रहे हैं, लेकिन इससे यह भी साफ हो गया कि चैनल ने अपने सूत्रों पर नहीं बल्कि दूसरी जगह प्रकाशित खबरों को आधार बना कर आरोप लगाए थे। करीब घंटे भर चली बहस में रामदेव ने साफ कहा कि खुद उन्होंने या उनके किसी भी रिश्तेदार ने ट्रस्टों को दान में मिली संपत्ति से कोई लाभ नहीं उठाया है। बहस तब जाकर खत्म हुई जब बाबा ने और सवाल पूछने की चुनौती दी और दीपक समय खत्म हो जाने का हवाला देते हुए हार कर बाहर हो गए।

हालांकि लाइव में बेहिसाब बतकही हुई, लेकिन खबर है कि इसके बाद दर्शकों ने इसपर कड़ा ऐतराज़ जताया। बताया जाता है कि बहस प्रसारित होने के बाद स्टार न्यूज के पास फोन और ई-मेल का तांता लग गया जिसमें दीपक चौरसिया के अभद्र व्यवहार और गलत तथ्यों और गलत बातों की ढेरों शिकायते हुई। इसका नतीजा ये रहा कि जब स्टार न्यूज़ ने इस वीडियो का दुबारा प्रसारण अगले दिन सुबह किया तो उसमे से  दीपक के सभी आपत्ति जनक सवालों को काट दिया गया था।

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.