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जन लोकपाल बिल पास करने की इजाजत नहीं मिलने पर “आप” सरकार दे सकती है इस्तीफ़ा..

By   /  February 13, 2014  /  No Comments

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दिल्ली की डेढ़ महीने पुरानी केजरीवाल सरकार बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे दिल्ली विधानसभा सत्र के पहले दिन इस्तीफा भी दे सकती है. जन लोकपाल बिल पारित कराने को लेकर केंद्र से जारी टकराव के मद्देनजर दिल्ली सरकार का कहना है कि यदि बृहस्पतिवार को सदन में जन लोकपाल बिल पास करने की इजाजत नहीं मिली तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस्तीफा दे देंगे. दूसरी ओर केंद्रीय विधि व न्याय मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बगैर यह बिल विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता.kejri-sisodya

केजरीवाल पहले ही कह चुके हैं कि यदि जन लोकपाल बिल पारित नहीं हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगे. उनका कहना है कि इस बिल को विधानसभा में पेश करने के लिए उपराज्यपाल या केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक नहीं है. दूसरी ओर, उपराज्यपाल, केंद्र सरकार तथा तमाम कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान नियमों के अनुसार दिल्ली सरकार बगैर केंद्र की मंजूरी के यह बिल विधानसभा में नहीं पेश कर सकती.

भाजपा और सरकार को समर्थन दे रही कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वे जन लोकपाल बिल के समर्थन में हैं लेकिन संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जा सकती. आम आदमी पार्टी (आप) के नेता प्रशांत भूषण ने बुधवार देर रात विधि व न्याय मंत्रालय द्वारा केंद्र की मंजूरी जरूरी बताए जाने के बाद कहा कि विधानसभा में बिल पेश किए जाने से पहले इस पर वोटिंग कराई जाएगी और यदि इस मुद्दे पर सरकार को बहुमत नहीं मिला तो वह इस्तीफा दे देगी. सूची में नहीं हैं दोनों विधेयक विधानसभा के चार दिन के सत्र की कार्यवाही की सूची में कहीं भी जन लोकपाल बिल अथवा स्वराज बिल का जिक्र नहीं है.

सूत्रों ने बताया कि चूंकि दिल्ली सरकार ने जन लोकपाल बिल पेश करने की इजाजत उपराज्यपाल से नहीं ली है, लिहाजा उपराज्यपाल विधानसभा सचिवालय को संदेश भेज सकते हैं कि बिल को सदन में पेश करने की इजाजत नहीं दी जाए. दिल्ली मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में स्वराज बिल पर फैसला नहीं लिया जा सका. अब बृहस्पतिवार को ही बिल पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई है. स्टेडियम में सत्र पर असमंजसविधानसभा का विशेष सत्र इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में बुलाए जाने के मुद्दे पर सरकार के तेवर बुधवार को भी कड़े दिखे. दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में उपराज्यपाल की उस नसीहत को ठुकरा देने का फैसला किया गया जिसमें सदन की बैठक स्टेडियम में कराए जाने संबंधी फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया था. शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि जब पुलिस शहर में बड़ी-बड़ी खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को सुरक्षा दे सकती है, तो वह विधानसभा सत्र के आयोजन को सुरक्षा क्यों नहीं दे सकती.

लोकसभा व विधानसभा के पूर्व सचिव सुदर्शन शर्मा के मुताबिक सदन को यह अधिकार है कि वह इस आशय का फैसला करे. उपराज्यपाल के पास अधिकार है कि वह दिल्ली सरकार से कहें कि वह बिल पेश नहीं कर सकती, क्योंकि यह संविधान का उल्लंघन होगा. नियमों के मुताबिक बिल राष्ट्रपति की सहमति के बगैर पेश नहीं किया जा सकता. -कपिल सिब्बल, कानून मंत्री

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  • Published: 6 years ago on February 13, 2014
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  • Last Modified: February 13, 2014 @ 11:41 am
  • Filed Under: राजनीति

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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