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IAS द्वारा हिंदी बोलने पर चिदम्बरम ने किया अपमानित…

By   /  February 13, 2014  /  5 Comments

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केंद्र के सचिव स्तर के एक आईएएस अधिकारी की बेइज्जती करने के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई है. चिदंबरम ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि विवाद क्या है. वह (सुधीर कृष्णा) हिंदी और अंग्रेजी दोनों का घालमेल करके बोल रहे थे, जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था. मैंने उन्हें कहा कि वह हिंदी या अंग्रेजी, जिस भाषा में सही कंफर्टेबल हो, उसी में बोले.’sudhir-1

केंद्र के सचिव स्तर के एक आईएएस अधिकारी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर वित्त मंत्री पी चिदंबरम की शिकायत की है. नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव सुधीर कृष्णा ने विभाग के मंत्री कमलनाथ के मार्फत यह शिकायत की है. कृष्णा के मुताबिक एक बैठक के दौरान चिदंबरम ने उनसे कहा कि वह उनकी अंग्रेजी नहीं समझ पा रहे हैं. चिदंबरम ने उनसे कहा कि वे हिंदी में बोलें और उनके अधिकारी इसका अंग्रेजी में अनुवाद कर देंगे. अफसर ने आरोप लगाया है कि चिदंबरम ने अपमानजनक तरीके से बार-बार यह बात बोली. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस मामले में दखल देने की मांग की है.

कृष्णा ने पत्र में लिखा है कि 6 फरवरी को एक मीटिंग हुई थी. इस मीटिंग की अध्यक्षता वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने की थी. मीटिंग में वित्त मंत्री ने बार-बार उन्हें बेइज्जत किया. कृष्णा के मुताबिक, चिदंबरम ने उनसे बार-बार अंग्रेजी में बोलने को कहा, लेकिन वो हिंदी में ही जवाब देते रहे. शहरी विकास सचिव कई योजनाओं में छूट चाहते थे, लेकिन चिदंबरम ने ऐसा करने से भी इनकार कर दिया. इस दौरान उनका रवैया बेइज्जत करने वाला था. ये बैठक जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन परियोजना में केंद्रीय मदद जारी करने पर चर्चा को लेकर बुलाई गई थी.
इस विवाद के बारे में पूछे जाने पर कमलनाथ ने एक टीवी चैनल से कहा, मैं सचिव की ओर से मुझे भेजे गए पत्र और मेरी ओर से उन्हें भेजे गए पत्र पर चर्चा नहीं करना चाहता हूं.

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  • Published: 6 years ago on February 13, 2014
  • By:
  • Last Modified: February 13, 2014 @ 9:33 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. Vimala Misra says:

    ऐसा नहीं है कि हिंदी नहीं आती पर हिंदी न आने का ड्रामा करने में बड़ी शान समझते हैं ……. विदेशियों से सीखें ….. वो कभी इनकी भाषा बोलते है ? ये ही उनके चरणों में बिछ बिछ जाते हैं ……..

  2. Vimala Misra says:

    ये कैसी विरोधाभासी खबर लिखी है लिखनेवाले ने ….. १. दुसरे पदच्छेद में … " चिदंबरम ने उनसे कहा कि वे हिंदी में बोलें …. " २. तीसरे पदच्छेद में … चिदंबरम ने उनसे बार – बार अंग्रेजी में बोलने को कहा ……… " कृपया स्पष्ट करें कि सच क्या है …….. वैसे ये श्री चिदंबरम जी की ही कारस्तानी है कि पिछले वर्ष ' हिंदी दिवस ' के सरकारी कार्यक्रम में मंच की पृष्ठभूमि में अंग्रेजी झाड़ी गयी थी . विचित्र मानसिक गुलामी के शिकार हैं ये काले अँगरेज़ .. अपने देश की हिंदी बोलने में शर्म आती है ……. अंग्रेजों के तलवे चाटते लज्जा नहीं आती ….. धिक्कार है …!!!

  3. Ashok Gupta says:

    hum HINDUSTHAN ke hai sirf HINDI hi bole ge

  4. mahendra gupta says:

    देश अभी भी अंग्रेजी दा लोगों की गिरफ्त मे है.हमारे पी ऍम साहब को भी हिंदी नहीं आती इनके अलावा और भी कई मंत्री व नौकरशाह हिंदी से परहेज करते हैं.इसीलिए हिंदी आज हाशिये पर चली गयी है. वह केवल हिंदी दिवस तक ही सीमित हो केवल रचनाकारों का विषय रह गयी.

  5. देश अभी भी अंग्रेजी दा लोगों की गिरफ्त मे है.हमारे पी ऍम साहब को भी हिंदी नहीं आती इनके अलावा और भी कई मंत्री व नौकरशाह हिंदी से परहेज करते हैं.इसीलिए हिंदी आज हाशिये पर चली गयी है. वह केवल हिंदी दिवस तक ही सीमित हो केवल रचनाकारों का विषय रह गयी.

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