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IAS द्वारा हिंदी बोलने पर चिदम्बरम ने किया अपमानित…

केंद्र के सचिव स्तर के एक आईएएस अधिकारी की बेइज्जती करने के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई है. चिदंबरम ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि विवाद क्या है. वह (सुधीर कृष्णा) हिंदी और अंग्रेजी दोनों का घालमेल करके बोल रहे थे, जिसे मैं समझ नहीं पा रहा था. मैंने उन्हें कहा कि वह हिंदी या अंग्रेजी, जिस भाषा में सही कंफर्टेबल हो, उसी में बोले.’sudhir-1

केंद्र के सचिव स्तर के एक आईएएस अधिकारी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर वित्त मंत्री पी चिदंबरम की शिकायत की है. नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव सुधीर कृष्णा ने विभाग के मंत्री कमलनाथ के मार्फत यह शिकायत की है. कृष्णा के मुताबिक एक बैठक के दौरान चिदंबरम ने उनसे कहा कि वह उनकी अंग्रेजी नहीं समझ पा रहे हैं. चिदंबरम ने उनसे कहा कि वे हिंदी में बोलें और उनके अधिकारी इसका अंग्रेजी में अनुवाद कर देंगे. अफसर ने आरोप लगाया है कि चिदंबरम ने अपमानजनक तरीके से बार-बार यह बात बोली. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस मामले में दखल देने की मांग की है.

कृष्णा ने पत्र में लिखा है कि 6 फरवरी को एक मीटिंग हुई थी. इस मीटिंग की अध्यक्षता वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने की थी. मीटिंग में वित्त मंत्री ने बार-बार उन्हें बेइज्जत किया. कृष्णा के मुताबिक, चिदंबरम ने उनसे बार-बार अंग्रेजी में बोलने को कहा, लेकिन वो हिंदी में ही जवाब देते रहे. शहरी विकास सचिव कई योजनाओं में छूट चाहते थे, लेकिन चिदंबरम ने ऐसा करने से भी इनकार कर दिया. इस दौरान उनका रवैया बेइज्जत करने वाला था. ये बैठक जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन परियोजना में केंद्रीय मदद जारी करने पर चर्चा को लेकर बुलाई गई थी.
इस विवाद के बारे में पूछे जाने पर कमलनाथ ने एक टीवी चैनल से कहा, मैं सचिव की ओर से मुझे भेजे गए पत्र और मेरी ओर से उन्हें भेजे गए पत्र पर चर्चा नहीं करना चाहता हूं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.