/जन लोकपाल बिल गिरा, केजरीवाल का इस्तीफ़ा तय..

जन लोकपाल बिल गिरा, केजरीवाल का इस्तीफ़ा तय..

उपराज्यपाल की इजाजत के बगैर जन लोकपाल बिल को हर हाल में विधानसभा में पेश करने की जिद को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ. विधानसभा में बिल पेश किया जाए या न इस पर वोटिंग करवाई गई. वोटिंग में बिल के विरोध में 42 वोट पड़े, जबकि पक्ष में सिर्फ 27 वोट ही पड़ सके. सूत्रों की मानें तो बिल के गिरने के बाद अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के [आप] कार्यकर्ताओं को दिल्ली के हनुमान रोड स्थित पार्टी दफ्तर बुलाया गया है. आप के दफ्तर पर भारी संख्या में समर्थकों की भीड़ पहुंचने लगी है. कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि अरविंद केजरीवाल को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. हम फिर से सड़क पर संघर्ष करेंगे.KEJRIWAL

जन लोकपाल बिल के पेश न होने के बाद विधानसभा में बोलते हुए केजरीवाल ने भी इस्तीफा देने का संकेत देते हुए कहा कि लगता है विधानसभा में यह उनका अंतिम सत्र है. कहा कि सदन में रखा कागज गीता की तरह होता है. इसे फाड़ना मंदिर में गीता को फाड़ने के बराबर है. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कहा गया सदन मंदिर होता है, हमें मंदिर का अपमान नहीं करना चाहिए. लेकिन, मैं जनाना चहाता था अपने विरोधी विधायकों से कि क्या हम मंदिर में जाकर हंगामा करते हैं?

इसी बीच केजरीवाल को टोकते हुए बीजेपी के विधायक ने पूछा, माइक टूटने से आपका दिल टूट गया, लेकिन संविधान टूटने का दर्द आपको क्यों नहीं हुआ?
केजरीवाल ने कहा, हम पहली बार चुनाव जीत कर आए. हमें अनुभव नहीं था. हमने सोचा था कि हम सीनियर से सीख लेंगे. लेकिन, यहां सब देख कर मन खट्टा हो गया है.
इससे पहले, नाटकीय घटनाक्रम के तहत पहले तो अरविंद केजरीवाल ने जन लोकपाल बिल विधानसभा में पेश किया. स्पीकर ने बिल को पेश हुआ मान लिया लेकिन इसके साथ ही सरकार को समर्थन दे रही कांग्रेस तथा भाजपा ने बिल पेश किए जाने का भारी विरोध करना शुरू कर दिया. हंगामे को देखते हुए विधानसभा की आधे घंटे के लिए स्थगित किया गया. दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर स्पीकर ने वोटिंग करवाई.

इससे पहले, कानून मंत्री सोमनाथ भारती कुछ बोले जाने पर कई सदस्यों ने उनके खिलाफ अश्लील मंत्री के नारे लगाए. उधर, विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक दल के नेता अरविंदर सिंह लवली ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस देते हुए कहा कि रविदास जयंती पर छुट्टी के दिन सदन की बैठक क्यों बुलाई गई. इसके साथ ही उन्होंने जन लोकपाल बिल की कॉपी बृहस्पतिवार को रात बारह बजे मिलने का भी मुद्दा उठाया, जबकि नियम है कि कॉपी 48 घंटे पहले मिलनी चाहिए.

विपक्ष के नेता हर्षवर्धन ने भी सोमनाथ भारती पर अमर्यादित आचरण पर चर्चा के लिए काम रोको प्रस्ताव का नोटिस देते हुए कहा कि अगर इस सदन के लिए उपराज्यपाल ने जन लोकपाल बिल को लेकर संदेश भेजा तो उसे तुरंत उजागर किया जाए. हर्षवर्धन ने कहा कि कल मिली सूची में जन लोकपाल बिल एक नंबर पर था जो आज खिसक कर पांच नंबर पर कैसे चला गया. भारी हंगामे के कारण विधानसभा 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई. विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही स्पीकर ने उपराज्यपाल का पत्र पढ़ा. उपराज्यपाल के पत्र पर वोटिंग की मांग की गई. मनीष सिसोदिया ने कहा कि एलजी के पत्र पर चर्चा कराई जाए. उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा से क्यों भाग रहा है. इसके बाद, हंगामे के बीच केजरीवाल ने विधानसभा में जनलोकपाल बिल पेश कर दिया. इसके पश्चात फिर विधानसभा तीस मिनट के लिए स्थगित कर दी गई. हर्षवर्धन ने कहा है कि जनलोकपाल बिल पेश कराने की प्रक्रिया असंवैधानिक है. लवली ने कहा है कि सदन के नियम सर्वोपरि हैं.

गौरतलब है कि जन लोकपाल बिल को लेकर केंद्र सरकार से टकराव तथा कांग्रेस के तल्ख तेवरों के बीच आप सरकार इस बिल को सदन में लाने पर उतारू है. इसके लिए वह सरकार की कुर्बानी भी देने को भी तैयार है.

उपराज्यपाल नजीब जंग ने विधानसभा अध्यक्ष मनिंदर सिंह धीर को संदेश भेजकर कहा है कि चूंकि जन लोकपाल बिल को सदन में पेश करने की इजाजत उनसे लेने की संवैधानिक अनिवार्यता को नहीं पूरा किया गया है, लिहाजा इसे सदन में न पेश किया जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि उनकी सरकार हंगामे के बावजूद बिल पेश करने की कोशिश करेगी लेकिन यदि इस बिल को पेश करने के प्रस्ताव को गिराने की कोशिश की गई तो वे तुरंत त्यागपत्र दे देंगे. मतलब साफ है कि दोनों ओर से टकराव तय है और ऐसी हालत में सरकार का बने रहना मुश्किल है.
आपको बता दें कि केंद्रीय विधि व न्याय मंत्रालय ने बुधवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि उपराज्यपाल के माध्यम से बगैर केंद्र की मंजूरी लिए दिल्ली सरकार जन लोकपाल बिल विधानसभा में नहीं पेश कर सकती. इसी आधार पर उपराज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना संदेश भेजा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.