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गुजरात में काला कानून: लोकायुक्त जाँच की खबर छापने पर दो साल की जेल होगी…

By   /  February 16, 2014  /  2 Comments

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विधानसभा में पारित गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 के तहत यदि जांच से संबंधित ख़बर छापी जाती है तो पत्रकार को दो साल तक की जेल हो सकती है.BJP Vikas Rally in Delhi

नए क़ानून में प्रावधान है कि लोकायुक्त की जांच के दौरान इससे संबंधित कोई भी जानकारी मीडिया को नहीं दी जाएगी. अगर किसी पत्रकार ने लोकायुक्त की जांच से संबंधित कोई ख़बर छापी तो उसके लिए दो साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है.

नए लोकायुक्त कानून के अस्तित्व में आ जाने के बाद पांच साल से अधिक पुराने मामलों की सुनवाई नहीं हो पाएगी.

लोकायुक्त की जांच के दायरे में प्रदेश सरकार के मंत्रियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री को भी लाया गया है. इसके अलावा वे सभी कर्मचारी इसके दायरे में होंगे जिन्हें सरकारी खजाने से तनख्वाह मिलती है.

सरकार के अधिकार

सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए किसी भी सरकारी कर्मचारी या नेता को लोकायुक्त की जांच के दायरे से बाहर रख सकती है.

जांच में दोषी पाए गए किसी कर्मचारी-अधिकारी के खिलाफ अगर विभाग कार्रवाई नहीं करता है तो लोकायुक्त विभागीय जांच के आदेश दे सकता है.

विधेयक के मुताबिक लोकायुक्त और चार उप लोकायुक्तों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति करेगी. इसमें न्यायिक क्षेत्र के सदस्यों की संख्या अधिक होगी.

चयन समिति की ओर से चुने गए नामों को मंजूरी राज्यपाल देंगे.चयन समिति की सहायता के लिए एक सर्च कमेटी का भी प्रावधान विधेयक में है.

लोकायुक्त का कार्यकाल 72 साल की आयु या पांच साल (दोनों में से जो पहले पूरी हो) के लिए होगा.

लोकायुक्त में शिकायत करने वाले को दो हज़ार रुपए की फ़ीस देनी होगी. शिकायत के गलत पाए जाने पर उसे छह महीने की सज़ा और 25 हज़ार रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा. पुराने क़ानून में इसके लिए दो साल की सज़ा का प्रावधान था.

(बीबीसी)

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  • Published: 6 years ago on February 16, 2014
  • By:
  • Last Modified: February 16, 2014 @ 6:13 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. ASHOK SHARMA says:

    मोदी के पी एम बनजाने पर पत्रकारों का देश निकला निश्चित है यदि खिलाप खबर लिखी तो

  2. Ashok Sharma says:

    c.m hai tab to yah hai kahi p.m bangaye to partakaro ko desh nikala diya ja sakta hai

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