Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

महात्म्य कथा के किस्से और स्वयंभू भगवानों की दबंगई…

By   /  February 23, 2014  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में एक थे नीम करौली महाराज. भवाली से आगे कैंची नामक जगह पर भव्य मंदिर है. कंबल ओढ़ कर बैठे लेटे कई मुद्राओं में एक गोलमटोल बाबा के चित्र आपको दिख जायेंगे. अब तो बाबा परमात्मा का अंश बन चुके हैं पर जब जिंदा थे तब महिला सेविकाऐं उनके चरण दबाया करतीं थी और वह एक कौपीन (लंगोट) में पड़े रहते थे. अब वो स्टिंग कैमरे का जमाना नहीं रेडियो का जमाना था. वरना जो बातें बाबाओं के लिए आज आम हैं वैसा जरुर कुछ बाहर आता पर जबर की दबंगई को समय का अनुकूल साथ मिले तो घटनाऐं महात्म्य बन जातीं हैं. जब वार्षिक भंडारा होता है तो एकमात्र पहाड़ी सड़क यातायात चरमरा जाता है.

piolet baba ashram

उनके चमत्कारी महात्मा होने की दो दंतकथाऐं थीं पर प्रमाण नहीं थे. यूं भी आस्था को तर्क या प्रमाण की क्या जरुरत? पहला किस्सा ये था कि अंग्रेजों के जमाने में बाबा बेटिकट रेल में सफर कर रहे थे, हाकिमों ने उतार के बाहर कर दिया अब रेल चली ही नहीं सारे कलपुर्जे ठीक थे पर रेल आगे ना बढ़े तब किसी ने पूछा कहीं बाबा को तो नहीं उतार दिया? फिर जाकर बाबा को रेल में बिठाया तब जाकर रेल आगे बढ़ी. ये घटना उत्तर प्रदेश के किस स्थान पर हुई तब निश्चित न था. अब स्थान इंगित भी कर दो तो प्रमाण का चश्मदीद कौन? इनकी शक्ति थी कि रेल तक इनके बस में थी. दूसरा किस्सा ये था कि एक बार भंडारे में घी कम पड़ गया तो बाबा ने कहा “जाकर नदी से उधार ले लो” हैरान भक्त नदी से पानी भरकर लाया और कढ़ाहे में उलटा तो घी बन गया! फिर बाद में एक कनस्तर घी नदी में उलट कर वापस कर दिया तब घी पानी बना या नहीं ये पता नहीं! यही चमत्कार पदमपुरी के सोमवारी बाबा का सुनने को मिला पर इस चमत्कार पर नीम करौली का एकाधिकार था.

एक गेठिया में पायलट बाबा हैं जहाज चलाते थे. एक दिन आसमान में प्रभु ने चमत्कार किया और उड़ता विमान बचा लिया सो पायलट की नौकरी छोड़ दी और भक्त गुरु बन गये पर पायलट उपनाम न छोड़ा. आखिर जहाज का पाइलट था ट्रक ड्राईवर थोड़े न था? ये कई दिन लंबी समाधि लेते हैं. कई सांसद इनके चेले हैं. कुम्भ मेले में जो भगदड़ मची थी, उसमें इनकी बड़ी सी आरामदेह गाड़ी का भी नाम आया, अखबार में घटनाऐं सचित्र छपी पर बाबा का बाल बांका न हुआ जबकि भगदड़ में कई लोग मारे गये. ये लंबे समय तक समाधि लेने में माहिर हैं पर जब तर्कशील सोसाइटी ने इनको कुछ मिनट के लिए एयर टाईट बाक्स में कुछ मिनट समाधि लगाने को कहा तो भाग खड़े हुए! इनके आश्रम के बाहर हनुमान की एक बहुत बड़ी मूर्ति लगी है. इस हनुमान की मूर्ति की स्थापना के खिलाफ स्थानीय जनता ने आंदोलन भी किया कि कच्चा पहाड़ है, भू धंसाव का खतरा है, बरसात में अगर मूर्ति ढही तो नीचे लोगों के संकट में पड़ने की आशंका है. नाप की जमीन के अलावा बेनाप और अनाप शनाप निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों की कई आपत्तियां हैं.

कुछ आगे हैड़ाखान आश्रम है. बड़ी तादाद में विदेशी आते हैं सेवा करते हैं यहां. जगह जगह आपको चरस मिल जायेगी. भक्तगण का बाबा हैड़ाखान में विश्वास है और चरस आम बूटी है. आप खरीदिए पीजीए और मस्त रहिए. समय समय पर आपको टाफियों का प्रसाद मिलेगा. मीठे से चरस का असर बढ़ता है. इस बाबा के खिलाफ भी यहीं के स्थानीय गांव वालों ने विरोध का मोर्चा खोला था. अब भी उसके बारे में बोलने वाले लोग हैं. आप भक्त बनकर जाइये आपको सबकुछ मिलेगा अगर पूछताछ की या चालाकी की तो आप परेशानी में पड़ सकते हैं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 6 years ago on February 23, 2014
  • By:
  • Last Modified: February 23, 2014 @ 10:57 am
  • Filed Under: देश, धर्म

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

विशाखापत्तनम में नाच रही है मौत..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: