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मीडिया को कुचलेंगे शिंदे…

By   /  February 25, 2014  /  2 Comments

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केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने नया विवाद खड़ा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ‘कुचलने’ की धमकी दे डाली है. शिंदे ने मीडिया के एक वर्ग पर आरोप लगाया कि यह कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दुष्प्रचार करके उसे अनावश्यक रूप से भड़का रहा है. इस बयान पर विवाद हुआ तो शिंदे ने सफाई देते हुए कहा देते हुए कहा कि उन्होंने यह इलेक्ट्रॉनिक नहीं, सोशल मीडिया के लिए कहा था.shinde_p_281013

महाराष्ट्र के शोलापुर जिले से ताल्लुक रखने वाले शिंदे का यह बयान रविवार शाम को युवक कांग्रेस के एक आयोजन में सामने आया. शोलापुर से लोकसभा सदस्य शिंदे ने आरोप लगाया कि पिछले चार महीने से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का एक धड़ा उनके तथा उनकी पार्टी के बारे में खबरों में छेड़छाड़ कर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तत्काल इस तरह की खबरों को नहीं रोका गया, तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को ‘कुचल’ दिया जाएगा.

शिंदे ने कहा, ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े स्तर पर जो हो रहा है, मैं उससे वाकिफ हूं. पिछले चार महीने में मीडिया ने हमें (कांग्रेस को) भड़काने की कोशिश की. हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ऐसे तत्वों को कुचल देंगे, जो दुष्प्रचार में लिप्त हैं और जो ऐसा करना बंद नहीं करते.’
उन्होंने कहा, ‘मेरे अधीन खुफिया विभाग आता है. मुझे पता है कि इस तरह की चीजें कौन कर रहा है. मुझे पता है कि क्या हो रहा है. इसके पीछे कुछ ताकतें हैं.’ शिंदे के बयान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया द्वारा कराए गए ऐसे चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों की पृष्ठभूमि में आए हैं, जिनमें आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की पतली हालत का पूर्वानुमान लगाया गया है.

गृह मंत्री ने मीडिया से सकारात्मक खबरों पर जोर देने को कहा. उन्होंने कहा कि देश की जनता उन लोगों को स्वीकार नहीं करेगी, जो समाज में अव्यवस्था फैलाकर देश को बांटना चाहते हैं. शिंदे का बयान ऐसे समय में आया है, जब सोमवार को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने नेताओं द्वारा मीडिया में अपने कवरेज से असंतुष्ट होकर लगाए जाने वाले अप्रामाणिक आरोपों पर विरोध दर्ज कराया है. गिल्ड का बयान ‘AAP’ नेता अरविंद केजरीवाल और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह द्वारा मीडिया पर किये गये हमलों की पृष्ठभूमि में आया है.

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  • Published: 4 years ago on February 25, 2014
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  • Last Modified: February 25, 2014 @ 9:36 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. mahendra gupta says:

    लगता है कांग्रेस ने अपनी होने वाली दुर्गति का अंदाज सच में ही लगा लिया है, और इसलिए वे बहुत गरूर से अपनी बौखलाहट को ज़ाहिर कर रहें हैं.एक लोकतंत्र में मंत्री का इस प्रकार कहना इस बात को तो बताता ही है कि वे अब तक भी ऐसा करते रहें हैं.अपने विरोधी को कुचलने के लिए वे किसी भी हद तक सत्ता का दुरूपयोग कर सकते हैं.लेकिन अभी शायद यह भूल गएँ हैं कि वे किसे यह धमकी किस समय दे रहें हैं बेशक इस पार्टी ने भी कुछ चैनल खरीद रखे हो पर बाक़ी तो अपनी बात अब और जोर शोर से रखेंगे और नुक्सान किसको होगा यह अंदाज लगाना कठिन नहीं, सच ही कहा है खिसियानी बिल्ली खम्भा ही नोचती है.जब कि अभी भी समय है कि पार्टी अपने किये पर पश्चाताप कर छवि का डेमेज कंट्रोल करती. विपरीत हालात में संयम खो देने वालों का राजनीति में क्या काम?और वह भी गृहमंत्री बन कर..अपना सच खुद ही बताने के लिए hum उनका आभार तो व्यक्त कर ही सकते हैं.शायद इस हेतु तो वे गुस्सा नही होंगे.

  2. लगता है कांग्रेस ने अपनी होने वाली दुर्गति का अंदाज सच में ही लगा लिया है, और इसलिए वे बहुत गरूर से अपनी बौखलाहट को ज़ाहिर कर रहें हैं.एक लोकतंत्र में मंत्री का इस प्रकार कहना इस बात को तो बताता ही है कि वे अब तक भी ऐसा करते रहें हैं.अपने विरोधी को कुचलने के लिए वे किसी भी हद तक सत्ता का दुरूपयोग कर सकते हैं.लेकिन अभी शायद यह भूल गएँ हैं कि वे किसे यह धमकी किस समय दे रहें हैं बेशक इस पार्टी ने भी कुछ चैनल खरीद रखे हो पर बाक़ी तो अपनी बात अब और जोर शोर से रखेंगे और नुक्सान किसको होगा यह अंदाज लगाना कठिन नहीं, सच ही कहा है खिसियानी बिल्ली खम्भा ही नोचती है.जब कि अभी भी समय है कि पार्टी अपने किये पर पश्चाताप कर छवि का डेमेज कंट्रोल करती. विपरीत हालात में संयम खो देने वालों का राजनीति में क्या काम?और वह भी गृहमंत्री बन कर..अपना सच खुद ही बताने के लिए hum उनका आभार तो vyakt कर ही सकते हैं.शायद इस हेतु तो वे गुस्सा नही होंगे.

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