/सुशील कुमार शिंदे का विरोध, महाराष्ट्र में पत्रकार सड़कों पर उतरे..

सुशील कुमार शिंदे का विरोध, महाराष्ट्र में पत्रकार सड़कों पर उतरे..

सुशील कुमार शिंदे ने रविवार को सोलापूर मे युवक कांग्रेस की एक जनसभा को संबोधित करते वक्त इलेक्ट्रॉनिक मिडिया को कुचल डालने की बात कही है. इसका समुचे महाराष्ट्र मे जोरशोर से विरोध हो रहा है. महाराष्ट्र के सोलह पत्रकार संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रही पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती अध्यक्ष एस.एम.देशमुख ने कल रात जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में सुशीलकुमार शिंदे के बयान की निंदा करते हुऐ शिंदे को माफी मांगने की बात कही है. सुशीलकुमार शिंदे देश के गृहमंत्री है. आरोप लगाते वक्त उनसे अपनी बची खुची की गरिमा का ध्यान रखने की भी देशमुख ने अपील की है.nagar

इस बीच आज महाराष्ट्र के विभिन्न शहरो में पत्रकारों ने सुशीलकुमार शिंदे के विरोध मे प्रदर्शन किये. नगर और सातारा मे पत्रकारों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दे कर अपना रोष प्रकट किया. सातारा मे कांग्रेस कार्यालय के सामने ही पत्रकारों ने नारेबाजी की. बीड और अन्य शहरों से भी पत्रकार सड़कों पर उतर आय़े हैं.

कुछ दिन पहले ही औरंगाबाद के सांसद चंद्रकांत खैरे ने पत्रकारों को चुनाव के बाद देख लूँगा जैसी धमकी दी थी और अब सुशील कुमार शिंदे ने ऐसी धमकी देकर पत्रकारों को गुस्से से भर दिया है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में पहले से ही पत्रकारों पर बढ़ते हमलों के चलते पत्रकारिता एक जोखिम भरा पेशा बन चुका है. अब तो सत्ता के शिखर पर बैठे राजनेता ही पत्रकारों को धमकियाँ देने लगे है जो कि पत्रकारों के लिए कई परेशानियाँ कड़ी कर सकता है. इससे पत्रकारिता जगत मे काफी क्रोध उपज आया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.