/KG बेसिन विवाद: ONGC ने भी रिलांयस पर लगाए आरोप…

KG बेसिन विवाद: ONGC ने भी रिलांयस पर लगाए आरोप…

-राजीव जायसवाल||

ऑइल एंड नैचरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ने सरकार से शिकायत की है कि उसके अनडिवेलप्ड फील्ड्स से नैचरल गैस निकालने की कोशिशों को रोकने में रिलायंस इंडस्ट्रीज सहयोग नहीं कर रही है. ओएनजीसी ने शिकायत है कि रिलांयस पब्लिक सेक्टर के ब्लॉक केजी डी-6 में हस्तक्षेप कर रही है. ओनएनजीसी ने आरआईएल के इस हस्तक्षेप को सरकार से रोकने की मांग की है. ओएनजीसी का यह फील्ड रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी डी-6 ब्लॉक के साथ लगा हुआ है. कंपनी का कहना है कि रिलायंस उससे अडिशनल डेटा और क्लैरिफिकेशन मांग रही है. ओएनजीसी का मानना है कि यह टाल-मटोल की कोशिश है. इस मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी के बीच बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है. इसलिए सरकारी कंपनी ने सरकार से मध्यस्थता के लिए इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट अपॉइंट करने को कहा है. इकनॉमिक टाइम्स ने 24 अक्टूबर को सबसे पहले यह खबर पब्लिश की थी.kg basin

11 फरवरी को लिखे लेटर में ओएनजीसी के डायरेक्टर, एक्सप्लोरेशन नरेंद्र वर्मा ने लिखा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ किसी नतीजे पर पहुंचने की कोशिश नाकाम रही है. वर्मा ने ऑइल मिनिस्टर में जॉइंट सेक्रेटरी फॉर एक्सप्लोरेशन गिरिधर अरमाने को लिखा है, ‘लगता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ इस मामले में सहमति बनाने की ओएनजीसी की कोशिश फेल हो रही है. ऑइल रेग्युलेटर डीजीएच ने रिलायंस को अगस्त 2013 में ओएनजीसी के साथ डेटा शेयर करने के लिए कहा था. तब से काफी वक्त गुजर चुका है. रिलायंस के साथ हाल-फिलहाल मीटिंग के भी आसार नहीं दिख रहे हैं. कंपनी हमसे अडिशनल डेटा और क्लैरिफिकेशन मांग रही है.’

वहीं रिलायंस के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच इस मामले को सुलझाने के लिए बात चल रही है. कंपनी के करीबी सूत्रों ने यह भी कहा कि रिलायंस इस मामले में ओएनजीसी के नजरिए से सहमत नहीं है. इसलिए उसने सरकारी कंपनी से और डेटा की मांग की है. कंपनी का यह भी मानना है कि टेक्निकल एक्सपर्ट्स डेटा नहीं होने पर यह नहीं बता सकते कि एक कंपनी का रिजर्वायर दूसरी कंपनी के ब्लॉक के साथ लगा है. वर्मा का लेटर इकनॉमिक टाइम्स ने भी देखा है.

इसमें उन्होंने रिलायंस के डी6-ए5, डी6-ए9 और डी6-बी8 कुओं का जिक्र किया है. वर्मा का कहना है कि इन कुओं की ड्रिलिंग ओएनजीसी के गैस पूल जी4-2, जी4-3 और डी-1 के अंदर की गई है. वर्मा ने इस नोट में लिखा है कि ये पूल दोनों के ही ब्लॉक्स तक फैले हैं. इसलिए हमारे ब्लॉक से रिलायंस के गैस निकालने की आशंका है. रिलायंस की ओर से मिले डेटा के आधार पर ओएनजीसी को लगता है कि इसके दो डीप-सी ब्लॉक की डिस्कवरी रिलायंस के ब्लॉक के अंदर तक है. वर्मा ने ऑइल मिनिस्ट्री से इस मामले में अपडेट की मांग की है.

(नभाटा)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.