Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

ठंड रख भाई…

By   /  March 6, 2014  /  1 Comment

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-रवीश कुमार||

अच्छा तो नहीं हुआ. तथ्यों की अपनी अपनी व्याख्या से सच बड़ा नहीं हो जाता. गुजरात में पुलिस ने औपचारिकता निभाई या अति सक्रियता. जब कोई किसी दौरे पर हो और उसी बीच आचार संहिता लागू हो जाए तो क्या करना चाहिए इसकी व्यावहारिक समझ तो नेताओं में होनी ही चाहिए. गुजरात प्रशासन और पुलिस को जब लगा कि अरविंद ने संहिता का उल्लंघन किया है और थाने बुलाना ज़रूरी है या मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अरविंद ने अनुमति पत्र माँगने पर कहा कि नहीं है हमें गिरफ़्तार कीजिये तो पुलिस को बताना चाहिए कि थाने बुलाकर छोड़ा क्यों ? क्या अरविंद को छोड़ने से पहले पुलिस ने उनसे अनुमति पत्र के लिए आवेदन लिखवाया फिर छोड़ा या आचार संहिता के बारे में अरविंद से समझने के लिए बुलाया था. मैंने टीवी पर चल रहे सारे फ़ुटेज तो नहीं देखे मगर एक क्लिप में अरविंद यह कहते हुए थाने से निकले कि समझा दिया आचार संहिता क्या है. ये मोदी ने करवाया है. पाटन के कलेक्टर ने कहा कि कोई उल्लंघन नहीं हुआ है. फिर क्यों थाने बुलाया था. यह भी सच नहीं है कि प्रशासन संहिता लागू होने के बाद निराकार भाव से निरपेक्ष ही हो जाता है. रैलियों में बहुत नियम टूटते हैं किसी बड़े नेता को थाने नहीं बुलाया जाता. कई वीडियो फ़ुटेज में बीजेपी दफ़्तर के भीतर से कुर्सी और ढेले फेके गए. बीजेपी के लोग भी लाठी लेकर आप कार्यकर्ताओं को रगेद रहे हैं.ashutosh aap

कल जैसे ही टीवी पर यह समाचार फ़्लैश हुआ अरविंद के समर्थक मोदी की तानाशाही की निंदा करने लगे और बीजेपी के नेता क़ानून बताने लगे कि उनके पास अनुमति नहीं थी. आचार संहिता का उल्लंघन किया है. लागू हो चुकी है. इसलिए पुलिस ने बुलाया और संहिता लागू होने के बाद पुलिस मुख्यमंत्री के नियंत्रण में नहीं रहती. बीजेपी के तमाम बड़े नेता क़ानूनी बयान देने लगे. उस वक्त सारे तथ्य सामने आए होते तो बात कुछ और होती. सबने बिना तथ्य जाने अपने अपने समर्थकों के साथ फ़ुटबॉल खेलना शुरू कर दिया. एक ने थाने बुलाने को राजनीतिक मोड़ दिया और दूसरा यह मानकर कूद गया कि उल्लंघन हुआ है तो पुलिस ने उचित ही कार्रवाई की. जबकि उल्लंघन नहीं हुआ था. कोई मोदी की आलोचना कैसे कर सकता है. इतना भी क्या भावुक होना.

मीडिया ने भी तथ्यों पर नियंत्रण छोड़ कर मैच में बदल चुके इस प्रसंग को स्क्रीन पर पसरने के लिए छोड़ दिया. यह कितना ख़तरनाक होता जा रहा है. दोनों के समर्थक ट्वीटर पर भिड़ गए. हवा में एक से एक मज़बूत दलीलें गढ़ दी गई. अगर फ़ुटेज से हटकर सिर्फ रिपोर्टिंग होती तो मामले की हवा निकल जाती. मगर इस घटना को फ़ुटेज और मनमर्ज़ी बयानों के भरोसे छोड़ दिया गया. इंडियन एक्सप्रेस की तस्वीर में आप समर्थकों के हाथ में पत्थर है और वे चलाते हुए दिख रहे हैं. लेकिन सड़क पर गिरे और बिखरे ईंट को टुकड़े कहाँ से आये इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है. उसी एक्सप्रेस के न्यूज़ लाइन में एक सिपाही किसी ढेले से बचने का प्रयास करता हुआ सिकुड़ा हुआ है. तस्वीर की दिशा बता रही है कि ढेला बीजेपी की तरफ़ से चला है.

अब आइये बीजेपी दफ्तर. किसने पहले पत्थर और कुर्सियाँ फेंकी यह शोध का विषय है. आप किसी फ़ुटेज से यह तो जान सकते हैं कि कुर्सी बीजेपी दफ़्तर से फेंकी गई या आप वालों ने पत्थर फेंका. पहले कौन फेंका जानना मुश्किल है क्योंकि कई फ़ुटेज में अलग अलग संदर्भ और प्रसंग दिखते हैं. बहरहाल इसे लेकर दोनों तरफ़ से भरमाने का खेल चल रहा है. भारतीय राजनीति का यह पुराना ज़रिया है कि भीड़ बनकर किसी घटना पर इतना झांव झांव कर दो कि सब भरमा जाए. तथ्य है कि पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार आप के तेरह और बीजेपी के दस कार्यकर्ता घायल हुए हैं. पुलिस ने बीस आप कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है. रही बात पहले किसने चलाया तो यह बात सच है कि दोनों तरफ़ से जवाबी कार्रवाई हुई है. शर्मनाक है. नई राजनीति का दावा करने वाली आप को ज़्यादा संयम बरतना चाहिए था.

किरण बेदी ने ट्वीट किया है कि प्रदर्शन के लिए किसी के दफ़्तर जाने का मतलब ही है टकराव को उकसाना. क्या यही अंतिम मत है ? अगर है तो घेराव क्या उकसाना है. जो पी आंदोलन और उससे पहले से दफ़्तरों का घेराव होता है. इस देश में रोज़ कहीं न कहीं लोग अपनी माँगों को लेकर दफ़्तरों का घेराव करते रहे हैं. विजय जाली भी तहलका की शोमा चौधरी के घर नेम प्लेट पर कालिख पोतने गए थे जिसकी बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने निंदा की थी. मोदी समर्थकों ने आडवाणी का भी घर घेर लिया था. कांग्रेस के लोग आए दिन बीजेपी दफ़्तर का घेराव करते रहते हैं. बीजेपी के लोग भी यही करते हैं. आप ने ग़लती की होगी मगर यह दलील भी हिंसा से भरी हुई है कि किसी के दफ़्तर जाना उसे उकसाना है और कोई पत्थर चला सकता है.

यहाँ भी न्यूज़ चैनलों ने इन तस्वीरों को यूँ ही स्क्रीन पर छोड़ दिया. चैनलों के स्क्रीन आग उगलने लगे. ख़बरें ऐसे फ़्लैश होने लगी जैसे किसी आख़िरी ओवर में रन बनने या न बन पाने के तनाव को बढ़ाने वाला माहौल हो. तथ्य होते हुए भी उन तस्वीरों की ‘भव्यता’ के आगे बौने हो गए. बीजेपी एस एम एस दिखाने लगी जिसमें आप ने समर्थकों को बीजेपी दफ़्तर बुलाया था. बीजेपी कहती है कि आचार संहिता लागू होने के बाद पुलिस से अनुमति नहीं ली गई. एक ठोस दलील है जिसका जवाब मिलना चाहिए. मगर बात अनुमति की ही नहीं है यह भी है कि आप और बीजेपी के बीच लोकतांत्रिक सहनशीलता कमज़ोर पड़ती जा रही है. समाप्त हो गई है. वर्ना गुजरात में वे कौन लोग थे जो अरविंद का घेराव कर रहे थे, नारेबाज़ी कर रहे थे, उनकी कार का शीशा भी चटका दिया और ये भी कहते रहे कि बीजेपी के नहीं. हम किसान हैं किसान. दूसरी तरफ़ अरविंद ने जो तस्वीरें ट्वीट की वो किसी भी शहर के कोने में मिल जाती हैं. बहुत भरोसेमंद तस्वीर नहीं थी. उन्हें साबरमती रिवर फ़्रंट पर भी जाकर तस्वीर खींचनी चाहिए जिसे टेम्स बनाने का दावा मोदी करते हैं. कांग्रेस ने भी गुजरात में विकास खोजों यात्रा निकाली थी मगर इतना कवरेज नहीं मिला.

टीवीखोर सब हैं. आप भी है बीजेपी भी है और कांग्रेस भी. इसलिए किसी पर यह आरोप अब बेतुका लगता है कि टीवी पर आने के लिए किया गया.टीवी पर आज भी बीजेपी और कांग्रेस ज़्यादा आते हैं. इन्हीं दो को कवरेज मिलता है. इनकी सारी रणनीतियाँ टीवी पर आने को लेकर ही होती हैं और इसमें कुछ ग़लत नहीं है. स्वाभाविक है. इसलिए ये दल किसी और के टीवी पर आ जाने से जागीरदार की भाषा न बोलें. किसी ग़ैर भाजपा राज्य में अगर पुलिस नरेंद्र मोदी को चाय पे ही सही थाने बुला ले तो बीजेपी की प्रतिक्रिया का अंदाज़ा कर सकते हैं. अरविंद केजरीवाल और राजनाथ सिंह दोनों ने शांति की अपील की है. राजनीति हो जाने के बाद अपील ही की जाती है. सारी महानता अपील में नहीं होती, आचरण में भी कुछ होती होगी.

क़ायदा दोनों तरफ़ से टूटा है. पहले किसने तोड़ा अगर इसी के नाम पर सब जायज़ है तो राजनीतिक दलों की असुरक्षा भावना से सहानुभूति रखते हुए सतर्क रहा जाना चाहिए. हाँ पहले किसने मारा इसकी जाँच ज़रूरी है. आप सही ग़लत के निष्कर्षों पर पहुँचने से पहले अलग अलग अख़बारों और चैनलों से तथ्यों को जमा कीजिये. सारे बयानों को सुनिये. अपना विचार खुद बनाइये. हिंसा से बचिये. चाहें आप आप हों या भाजपा. मीडिया को राम भरोसे छोड़ दीजिये. अगर मीडिया फ़ुटेज छोड़कर तथ्यों को ज़्यादा से ज़्यादा मज़बूती से रखता तो तनाव पसरता ही नहीं. बहरहाल दोनों तरफ़ से सत्यवादी दलीलों का मज़ा लीजिये.
स्रोत- क़स्बा ब्लॉग से साभार

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. प्रिय रवीश जी , नमस्कार !! सुन्दर लिखा है आपने !! निष्पक्ष होने का भरपूर प्रयास किया है आपने !! मेरे इस लेख पर भी नज़र डालिये !!
    ” पजामे में घुसा , मच्छर ही नहीं भाता मित्रो !! , तो ये तो केजरीवाल साहिब हैं ” !! बाकी रही विकास होने या ना होने की बात , वो तो देखने वाले की ” नज़र ” का फर्क होता है ! ???
    कल एक हस्ती की यात्रा का लाईव प्रसारण विशेष एंकरों की विशेष टिप्प्णियों के साथ हो रहा था !! श्रीमान केजरीवाल जी वो देखने हेतु गुजरात चले गए थे जिनका ज़िकर श्री अमिताभ बच्चन जी ने अपने गुजरात पधारने वाले विज्ञापनों में भी नहीं किया था ! उस बात का ज़िक्र मोदी जी ने अपने भाषणों में अवश्य किया था !! अब नए राजनीतिज्ञ को इतना तो समझदार होना ही चाहिए कि नेताओं की बातों पर विश्वास नहीं किया करते !! चाहे वो किसी भी पार्टी का क्यों ना हो !! ये पढ़े-लिखे लोग भी ना पूछो मत कई बार अजीब-अजीब हरकतें करने लगते हैं !! एक शोध में पाया गया है कि बड़े-बड़े विद्वान अक्सर छोटी अड़चन पर भी ऐसे अटकते हैं कि उनकी सारी उम्र वंही खर्च हो जाती है !!

    अब आते हैं उस मुद्दे पर जिस पर केजरीवाल जी ने देश का ध्यान आकर्षित किया !! उन्होंने बताया कि देखिये इस असपताल में कोई मरीज़ नही है , दूसरा यंहा केवल 2 डाक्टर और एक नर्स है , तीसरा 30 बिस्तरों में से दस पर गद्दे और चद्दरें बिच्छी हुई हैं बाकी ऐसे ही पड़े हैं !! मैं राजस्थान में रहता हूँ , मैंने भी वो क्लिप्स देखीं हैं मुझे वैसा महसूस नहीं हुआ जैसा केजरीवाल जी बता रहे थे ! मुझे हो महसूस हुआ वो ऐसे है पहली बात तो ये हसपताल साफ़ नज़र आ रहा था दुसरे अगर वंहा कोई मरीज़ नहीं है तो ये तो बढ़िया बात है , और किस हस्पताल में मरीज़ नहीं है वंहा भी अगर दो डॉक्टर और एक नर्स है तो ये भी बढ़िया प्रबंधन ही तो माना जायेगा ना !! और अगर 30 बैड की बजाय 10 पर बिस्तर बिछा है बाकी 20 बैड के बिस्तरों को संभालकर साफ़ रख्खा गया है तो वो भी तो बढ़िया बात है कि नहीं !!??
    अब आते हैं तीसरे मुद्दे पर , हवाई अड्डे पर उनके प्रशंसक थे तो उन्होंने स्वागत कर दिया और मालाएं पहना दीं !! ये तो नहीं कहा गया कि स्वागत भी हमारा मोदी जी ने करवाया गुजरात में ?? अब कंही उसके विरोधी खड़े थे तो उन्होंने उन्हें काले झंडे दिखा दिए तो कौन सा अचरज वाली बात होगयी जनाब ??इसी तरह से अगर कुछ समय हेतु पुलिस ने अपनी पूछताछ करली तो कौन सा गुनाह हो गया !! कोई सारी यात्रा का टाईम टेबल तो पहले गुजरात पुलिस को बताया हुआ नहीं था जो वो नाजायज़ रोक रही थी ??
    ” पजामे में घुसा , मच्छर ही नहीं भाता मित्रो !! , तो ये तो केजरीवाल साहिब हैं ” !! मच्छर अगर पजामे में घुस जाता है ना मित्रो तुरंत एक जोर का हाथ अपने आप उस जगह पर पड़ता है और उसकी बेचारे की तो वहीं पर राम नाम सत्य कर दी जाती है !!बाकी रही विकास होने या ना होने की बात , वो तो देखने वाले की ” नज़र ” का फर्क होता है ! ???
    मुझे पूर्ण विश्वास है कि अब आगे से “आप पार्टी ” वाले ऐसी कोई गलती नहीं करेंगे ! एक मेच्योर राजनीतिज्ञ की तरह भाषणो का जवाब केवल भाषण से देंगे !! बोलिये जय श्री राम !! हो गया काम !! अब लड़ाई-लड़ाई माफ़ करो – जंहा भी वास्तविक गंदगी है उसे सब मिलकर साफ़ करो !!
    सब बोलिये बड़े ही प्रेम से दोनों हाथ ऊपर करके – धर्म की जय हो !! अधर्म का नाश हो !! प्राणियों में सद्भावना हो !! विश्व का कल्याण हो !! हर-हर-हर महादेव !!
    आपका क्या कहना है साथियो !! अपने विचारों से तो हमें भी अवगत करवाओ !! ज़रा खुलकर बताने का कष्ट करें !! नए बने मित्रों का हार्दिक स्वागत-अभिनन्दन स्वीकार करें !

    जिन मित्रों का आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयाँ !!”इन्टरनेट सोशियल मीडिया ब्लॉग प्रेस ”
    ” फिफ्थ पिल्लर – कारप्शन किल्लर ”
    की तरफ से आप सब पाठक मित्रों को आज के दिन की
    हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं
    ये दिन आप सब के लिए भरपूर सफलताओं के अवसर लेकर आये , आपका जीवन सभी प्रकार की खुशियों से महक जाए ” !!
    जो अभी तलक मेरे मित्र नहीं बन पाये हैं , कृपया वो जल्दी से अपनी फ्रेंड-रिक्वेस्ट भेजें , क्योंकि मेरी आई डी तो ब्लाक रहती है ! आप सबका मेरे ब्लॉग “5th pillar corruption killer ” व इसी नाम से चल रहे पेज , गूगल+ और मेरी फेसबुक वाल पर हार्दिक स्वागत है !!
    आप सब जो मेरे और मेरे मित्रों द्वारा , सम – सामयिक विषयों पर लिखे लेख , टिप्प्णियों ,कार्टूनो और आकर्षक , ज्ञानवर्धक व लुभावने समाचार पढ़ते हो , उन पर अपने अनमोल कॉमेंट्स और लाईक देते हो या मेरी पोस्ट को अपने मित्रों संग बांटने हेतु उसे शेयर करते हो , उसका मैं आप सबका बहुत आभारी हूँ !
    आशा है आपका प्यार मुझे इसी तरह से मिलता रहेगा !!आपका क्या कहना है मित्रो ??अपने विचार अवश्य हमारे ब्लॉग पर लिखियेगा !!
    सधन्यवाद !!

    प्रिय मित्रो , आपका हार्दिक स्वागत है हमारे ब्लॉग पर ” 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER ” the blog . read, share and comment on it daily plz. the link is -www.pitamberduttsharma.blogspot.com., गूगल+,पेज़ और ग्रुप पर भी !!ज्यादा से ज्यादा संख्या में आप हमारे मित्र बने अपनी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर !! आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ आयें इसी मनोकामना के साथ !! हमेशां जागरूक बने रहें !! बस आपका सहयोग इसी तरह बना रहे !! मेरा इ मेल ये है : – [email protected]. मेरे ब्लॉग और फेसबुक के लिंक ये हैं :-www.facebook.com/pitamberdutt.sharma.7
    http://www.pitamberduttsharma.blogspot.com
    मेरे ब्लॉग का नाम ये है :- ” फिफ्थ पिलर-कोरप्शन किल्लर ” !!
    मेरा मोबाईल नंबर ये है :- 09414657511. 01509-222768. धन्यवाद !!
    आपका प्रिय मित्र ,
    पीताम्बर दत्त शर्मा,
    हेल्प-लाईन-बिग-बाज़ार,
    R.C.P. रोड, सूरतगढ़ !
    जिला-श्री गंगानगर।
    ” आकर्षक – समाचार ,लुभावने समाचार ” आप भी पढ़िए और मित्रों को भी पढ़ाइये …..!!!
    BY :- ” 5TH PILLAR CORRUPTION KILLER ” THE BLOG . READ,SHARE AND GIVE YOUR VELUABEL COMMENTS DAILY . !!
    Posted by PD SHARMA, 09414657511 (EX. . VICE PRESIDENT OF B. J. P. CHUNAV VISHLESHAN and SANKHYKI PRKOSHTH (RAJASTHAN )SOCIAL WORKER,Distt. Organiser of PUNJABI WELFARE SOCIETY,Suratgarh (RAJ.)
    Posted by PITAMBER DUTT SHARMA

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: