Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

सर्कस लाइव : झगड़ा नहीं, नया आईटम..

By   /  March 7, 2014  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-दिनेशराय द्विवेदी|| 

द ग्रेट इंडियन सर्कस का प्रीमियर शो हिट हो गया. यूं तो सर्कस में हर बार वही सब कुछ होता है, फिर भी सर्कस लोकप्रिय हैं. उन्हें हर बार अच्छे खासे दर्शक मिल जाते हैं. पुराने प्राणी हर बार कुछ नए करतब लेकर आते हैं. कुछ पुराने प्राणी सर्कस से गायब हो जाते हैं और कुछ नए प्रवेश करते हैं. शुभारंभ, श्रीगणेश, बिस्मिल्लाह के तुरन्त बाद प्रीमियर शो आरंभ हुआ. आम आदमी नाम का प्राणी इस शो का आकर्षण था. इधर रिंग में जोकर वगैरह अपने हल्के-फुल्के करतब दिखा रहे थे और अपनी ऊल-जुलूल हरकतों से दर्शकों को हंसाने का प्रयास कर रहे थे. ताकि दर्शक सरकस के महंगे टिकट का दर्द भूल जाएं और सर्कस का आनन्द लेने लगें.aap 1

इस बीच शेरों को रिंग में लाने के लिए सर्कस के शेर रक्षक रिंग और दर्शकों के बीच सींखचों का जाल खड़ा करने लगे. रिंग से पिंजरे तक सलाखों की चैनल बनाई जा रही थी जिससे शेर पिंजरे से रिंग तक आ सकें. शेरों को भी अंदाज हो चला था कि उनके खेल दिखाने का वक्त आ चुका है. उन्हें अच्छा नाश्ता दिया गया था और वे हौले-हौले गुर्राकर अपना गला सुधार रहे थे. जिससे रिंग में आने पर अपनी दहाड़ से दर्शकों का दिल जीत सकें.

सर्कस के नए प्राणी आम आदमी ने शेरों के साथ नया खेल दिखाने की चुनौती ली थी. अपने काम को ठीक से अंजाम देने के लिए वह शेरों के पिंजरों के आसपास घूमता हुआ निरीक्षण में व्यस्त था.  शेर भी एक दम चौकन्ने होकर उस पर निगाह रख रहे थे. वह बीच-बीच में शेरों को चिढ़ाकर उनकी प्रतिक्रिया का अनुमान कर रहा था. चिढ़ाते देख शेर गुर्राना बन्द कर कभी खुद को कभी अपने रक्षकों को देखने लगते. पिंजरों का निरीक्षण करते और शेरों को चिढ़ाते हुए उस आदमी ने अचानक मुख्य शेर के पिंजरे में हाथ घुसाकर उसे चिढ़ाया- पूंछ कटा. तेरी पूंछ नकली! शेर गुस्से में उसकी ओर लपका. वह आदमी को नुकसान पहुंचा पाता उसके पहले ही शेर रक्षकों ने उसका हाथ पकड़ कर पिंजरे के बाहर कर दिया और उसे एक कोने में ले जाकर डांटने लगे- शेरों के एरिया में जाने और उन्हें चिढ़ाने की आजादी मतलब ये नहीं कि तुम उनके पिंजरे में हाथ घुसाने लगो. शो शुरू हो चुका है. शेर समेत सर्कस के सभी प्राणी परफॉरमेन्स के तनाव में हैं. अब ऐसा-वैसा करना अनुशासन के खिलाफ है, तुम्हें इसके लिए चार्जशीट मिल सकती है, सस्पेंड तक किए जा सकते हो. अब तुम केवल मैनेजमेंट से परमिटेड स्क्रिप्ट के अलावा कुछ नहीं कर सकते.

आम आदमी को डांटने की आवाजें रिंग तक पहुंची, अपने लीडर को डांट खाते देख सारे आम आदमी उत्तेजित होकर शेर रक्षकों को आंखे दिखाने लगे. तुम्हारे आदमी ने हमारे लीडर का हाथ कैसे पकड़ा?

शेर रक्षकों को कतई विश्वास नहीं था कि आम आदमी किसी को आंखे भी दिखा सकते हैं. उन्हें तो शेरों की रक्षा का काम मिला था. अपनी ट्रेनिंग के मुताबिक जो भी हथियार हाथ में था उसे लेकर खड़े हो गए. कोई हथियारहीन रक्षकों ने आस-पास जो भी मिला वही उठा लिया. रिंग में उत्तेजना फैल गई. दर्शक खड़े हो कर नया तमाशा देखने लगे. कुछ शेर रक्षकों को कोई हथियार न मिला तो उन्होंने खड़े हुए दर्शकों की कुर्सियां ही उठा लीं.

-तुम्हारे साथी हमारे लीडर का हाथ नहीं पकड़ सकते.

-हम कुछ भी कर सकते हैं, हाथ क्यों नहीं पकड़ सकते. ये ल्लो…

उन्होंने हाथ में पकड़े हुए औजार आदमियों पर फेंकना शुरू कर दिया.

निहत्थे आदमी भी कम कुशल न थे. उनमें से कइयों ने फेंके हुए हथियार रामायण पिक्चर के हनुमान की तरह हवा में ही पकड़ कर वापस लौटा दिए.  दोनों तरफ के लोग घायल होने लगे. सर्कस में हड़कम्प मच गया. सर्कस के दूसरे कर्मचारी बीच बचाव में आए. मुश्किल से उन्होंने मामला शान्त किया. सबको वहां से हटा दिया गया. रिंग और उसके आस-पास केवल शेर रक्षक और कुछ जोकर रह गए.

शेर रक्षक रिंग में बनाए गए अस्थाई पिंजरे के अंदर शेरों के खेल के लिए स्टूल लगाने लगे. एक रक्षक ने रिंग के बीचों बीच एक छोटा स्टूल रखा. तभी दूसरा रक्षक आया और उसने छोटे स्टूल को हटाया और वहां बड़ा स्टूल रखने लगा. दोनों में तू-तू मैं-मैं हो गई- यहां बड़ा स्टूल लगेगा…

-नहीं, यहां बड़ा नहीं, छोटा स्टूल लगेगा.

-नहीं, बड़ा लगेगा.

-नहीं, छोटा लगेगा.

-कह दिया कि बड़ा लगेगा, तो बड़ा लगेगा. बड़ा स्टूल है, जहां चाहे लग सकता है. उसने छोटा स्टूल वहां से उठा कर कुछ दूर पटक दिया. छोटे स्टूल की एक टांग टूट गई. छोटे स्टूल के हिमायती रक्षक ने दूसरे रक्षक के गाल चांटा मार दिया. बड़े स्टूल वाले ने छोटे के कूल्हों पर फटे बांस वाला डंडा मारा. बड़े जोर की आवाज हुई. छोटे वाले ने डंडे को छीन कर दूर फेंक दिया. फिर दोनों हाथों पैरों से एक दूसरे पर पिल पड़े. दोनों के बीच हार जीत का फैसला होता उसके पहले ही दूसरे रक्षकों ने उन्हें पकड़ कर दूर-दूर कर दिया.

रक्षकों का नेता दोनों को डांटने लगा- इस वक्त ये झगड़ा क्यों? बस शेर रिंग में आने ही वाले हैं. निकलो यहां से. मुख्य शेर आएगा तो जहां उसकी पसंद होगी वहां खुद अपना स्टूल लगा लेगा.

दर्शक ताली बजाने लगे.

इस के बाद शेर आए, उन्होंने अपने खेल दिखाए, आम आदमियों ने अपने. सर्कस के अन्य सामान्य करतब होने लगे. जिनमें कुछ नए करतब भी शामिल थे. प्रीमियर शो खत्म होने के पहले मुख्य जोकर ने आकर घोषणा की- आज का ये शो प्रीमियर था. शुरू में आपने आम आदमियों और शेरों का झगड़ा देखा, बाद में शेर रक्षकों का आपसी झगड़ा भी. आप को लगा होगा कि सर्कस वाले आपस में झगड़ गए. लेकिन आप को इस झगड़े में पूरा आनन्द आया होगा. ये दोनों झगड़े नहीं, थे बल्कि हमारे नए आइटम थे. ये जनतंत्र का जमाना है. जनतंत्र के खेल सर्कस में शामिल न किए जाएं, ऐसा कैसे हो सकता था? ऐसा कुछ आप लोग संसद और विधानसभा में होते हुए टीवी पर देखते हैं. हमने इसे आइटम बनाकर सर्कस में लाइव दिखाने का प्रयास किया है. आप को इस सीजन में हर रोज नए-नए आइटम और खेल देखने को मिलेंगे. कई आइटम और खेल ऐसे भी होंगे जो तभी दोबारा दिखाए  जाएंगे, जब हमें लगेगा कि हमारे दर्शकों ने उस आइटम या खेल को पसंद किया है.

इस बीच सर्कस के सभी कलाकार रिंग में आ गए और दर्शकों का अभिवादन करने लगे. दर्शकों ने भी खड़े हो कर खूब तालियां बजाईं. जिससे लगा कि दर्शकों को नए आइटम पसंद आए हैं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

हारी हुई कांग्रेस को लेना चाहिए नेहरू की बातों से सबक..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: