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रुद्रपुर के पत्रकारों का विवाद सुलझा…

By   /  March 28, 2014  /  No Comments

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रुद्रपुर, पत्रकारों के बीच चल रहे विवाद का शहर के पत्रकारों की बैठक में पटाक्षेप हो गया. बैठक में सभी पत्रकारों द्वारा पूरे मामले पर चर्चा करने के बाद आपस की गलत फहमियों को दूर कर एक दूसरे के गले मिलकर एक साथ सहयोग कर काम करने का निर्णय लिया गया.press note..

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों शहर के पत्रकारों के बीच में मनमुटाव हुआ जिसका प्रशासन ने पफायदा उठाते हुये पत्रकारों के उत्पीड़न में कोई कमी नही छोड़ी प्रशासन के साथ-साथ शहर के अन्य लोगों ने भी पत्रकारों की आपस की लड़ाई का पफायदा उठाया जिस सम्बध् में सिचांई विभाग गेस्ट हाऊस में सभी पत्रकारों की बैठक का आयोजन किया गया बैठक में निर्णय लिया गया कि कोई भी पत्रकार आपस के किसी भी मामले में प्रशासन के पास न जाकर वरिष्ठ पत्रकारों के बीच रखेगा, इसके अलावा कोई भी पत्रकार किसी के खिलापफ द्वैष भावना से काम नही करेगा. सभी पत्रकार एक दूसरे का सहयोग करेगें तथा शहर की भ्रष्ट राजनीति, भ्रष्ट अफसर शाही एवं नाकाम प्रशासन के खिलाफ अपनी कलम की लड़ाई एक साथ मिलकर लड़ेंगे. पत्रकारों के बीच हुये एक विवाद में अब तक की कार्यवाही को सभी पत्रकार एक साथ मिलकर समाप्त करा देंगे.

भविष्य में प्रशासन ने किसी भी पत्रकार के खिलाफ कोई झूठी कार्यवाही की तो सभी पत्रकार मिलकर प्रशासन के खिलाफ खड़े होगें. बैठक में सभी पत्रकारों द्वारा आपसी मनमुटाव भुलाकर एक दूसरे के गले मिल सहयोग का आश्वासन दिया गया. इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार बी.सी.सिघल, अनिल चौहान, कमल श्रीवास्तव, मोहन राजपूत, सुरेन्द्र तनेजा, केवल बत्रा, राजकुमार पफुटेला, परमपाल सुखीजा, अनुपम सिंह, फणीन्द्र नाथ गुप्ता, हरपाल सिंह, के.पी.गंगवार, गुरबाज सिंह, सौरभ गंगवार, आकाश आहुजा, अशोक सागर, गोपाल भारती, ए.पी.भारती, मुकेश गुप्ता, सुदेश जौहरी, हरविन्दर सिंह खालसा, ललित राठौर, गोपाल गोतम, अमन सिंह, दीपक कुकरेजा, विकास कुमार, शोएब, संजय भटनागर, विनोद आर्या, वेद प्रकाश, शुभोद्वति मण्डल, उसमान,  मनीष ग्रोवर, हरपाल दिवाकर, मनोन आर्या ,  भूपेन्द्र सिंह, मनीष, समेत शहर के सभी पत्रकार मौजूद थे.

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  • Published: 4 years ago on March 28, 2014
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  • Last Modified: March 28, 2014 @ 7:24 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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