/पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह को मिला “आप” का न्यौता..

पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह को मिला “आप” का न्यौता..

-सिकंदर शेख||

जसवंत के लिए सभी पार्टियों के दरवाजे खुले लेकिन उनके सिद्धांतों की मित्रता “आप” से होने की संभावनाएं

जैसलमेर, बाड़मेर लोकसभा सीट को लेकर भाजपा से बागी हुए पूर्व विदेश मंत्री और कद्दावर नेता जसवंतसिंह, नैतिकता की राह पर चलने वाली “आम आदमी पार्टी (आप)” में शामिल हो सकते हैं।  पार्टी से निष्कासित करने के बाद अब वे अपनी नई राजनीति चाल से सबको चौंका सकते है। अब उनके पास सभी पार्टियों से निमंत्रण आने पर उन विकल्पों पर सोच सकते है जो राजनीति में जायज है। इसके संकेत रविवार को को उनकी  कांफ्रेंस में मिले है।भाजपा से निष्कासित किए गए जसवंत सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में आज नरेंद्र मोदी और उनके इर्द-गिर्द केंद्रित प्रचार पर हमला बोलते हुए एक व्यक्ति की ‘‘पूजा’’ की निंदा की और कहा कि दुनिया ऐसे लोगों की कब्रों की भरमार है जिनके बारे में यह माना जाता था कि वह अपने देशों के लिए अत्यावश्यक हैं।jaswant-singhAFP

उल्लेखनीय है कि सिंह को भाजपा से छह वर्ष के लिये निष्कासित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने बाड़मेर सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नाम वापस लेने से इनकार कर दिया था। पार्टी संविधान के विरूद्ध पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने के आरोप पर उन्हें पार्टी से 6 वर्ष के लिए निष्कासित किया गया था।गौरतलब है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह पार्टी द्वारा राजस्थान के बाड़मेर से टिकट न दिए जाने पर बगावती सुर आपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। बीजेपी के बागी नेता जसवंत सिंह ने टिकट न मिलने के लिए बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें धोखेबाज करार दिया था।सिंह ने कहा कि मुझे मुलायम, नितीश और ममता के भी फोन आए और उन्होंने कहा कि तुम्हारे से साथ बहुत गलत हुआ तुम चाहो तो हमारी पार्टी ज्वाइन कर सकते हो। आगे उन्होंने कहा कि, लेकिन मैं अब जीतने के बाद ही फैसला लूँगा कि किस पार्टी में जाउगा लेकिन,  भाजपा में अब शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता है। इस बात के संकेतों से सिंह ने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है कि अब किस पार्टी में जा सकते है।एसपी के फायर ब्रांड नेता और अखिलेश सरकार में मंत्री आजम खान ने बीजेपी के बागी नेता जसवंत सिंह को एसपी में शामिल होने का न्यौता देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आजम ने जसवंत की तारीफ करते हुए कहा कि सही व्यक्ति गलत पार्टी में था अगर वो आना चाहें तो उनके लिए एसपी के दरवाजे खुले हैं।”आप” में जाने की इसलिए है संभावना चूंकी जसवंतसिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री रहे है इसलिए प्रायः सभी पार्टियां उनके आने का इन्तजार कर रही है। कौन पार्टी उनको नहीं लेना चाहेगा। इसलिए मुलायम, ममता, नीतीश के साथ केजरीवाल भी एक विकल्प देश को दे रहा है। उन्होंने दिल्ली में रहकर “आप” की शैली देखी है, उनका उभार देखा है जिसका पूरा देश कायल है। गत विधानसभा चुनावों में “आप” ने साबित कर दिया कि देश में कांग्रेस और भाजपा का विकल्प केवल “आप” है। मोदी लहर के “आप” की लहर ने क्षेत्रीय पार्टियों का भी मूल्य कम कर दिया है।  इसी स्थिति में सिंह एक “हंस” की भांती “आप” को ही चुन सकते है।  नैतिकता के लोप से पैदा हुई इस पार्टी का आकर्षण ही सिंह को अपनी और खींच सकती है। सिंह को भ्रष्ट राजनीति के विकल्प की संभावना यहाँ ही दिख रही हो। वैसे भी “आप” को जसवंतसिंह सरीखे संरक्षक मिल जायेंगे तो उनका जनाधार बढेगा ही। दूसरे दलों से ज्यादा मान और सामान सिंह को “आप” में मिल सकता है।मानवेन्द्रसिंह अपने पिता के साथ उनके बेटे और भाजपा से बाड़मेर की शिव विधानसभा से विधायक मानवेन्द्र के उनके  साथ नहीं होने के सवाल पर जसवंत सिंह ने कहा कि वो मेरे साथ ही है। हालांकी मानवेन्द्रसिंह अभी तक खुल कर अपने पिटा के प्रचार में नहीं दिखाई पड़ रहे है।  गौरतलब है अपने पिता के चुनाव लड़ने के फैसले के बाद से वे बेड रेस्ट पर है।  डॉक्टर की सलाह अनुसार उन्होंने एक माह का अवकाश लिया है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.