/अमर सिंह भी भेजे गए तिहाड़, ‘नोट के बदले वोट’ मामले मे अदालत ने दिया गिरफ्तारी का आदेश

अमर सिंह भी भेजे गए तिहाड़, ‘नोट के बदले वोट’ मामले मे अदालत ने दिया गिरफ्तारी का आदेश

‘नोट के बदले वोट’ मामले के मुख्य अभियुक्तों में से एक समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह को दिल्ली की एक अदालत ने गिरफ़्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें 19 सितंबर तक जेल में रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्हें तिहाड़ जेल में रखा जाएगा। उनके साथ ही भाजपा के दो पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा को भी गिरफ़्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

अमर सिंह ने ख़राब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पहले अदालत में पेश होने से छूट की मांग की थी और इसी आधार पर ज़मानत की अर्ज़ी भी लगाई थी, लेकिन वे बाद में तीस हज़ारी अदालत में हाज़िर हो गए थे और कुछ समय बाद अदालत ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए उनकी गिरफ्तारी के आदेश दे दिए।

उन पर आरोप हैं कि उन्होंने 2008 में विश्वास मत सरकार के हक में जीताने की कोशिश में तीन सांसदों को करोंड़ों की रिश्वत दी थी। गत 25 अगस्त को विशेष जज संगीता धींगरा ने अमर सिंह के अलावा पूर्व बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, महावीर भगोरा और लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी के खिलाफ़ सम्मन जारी किया था।

‘मैं छुप नहीं रहा’
इससे पहले अदालत में पेश होने के बाद अमर सिंह ने पत्रकारों से कहा था, “मुझे न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है। मैं डाक्टरों की सलाह के ख़िलाफ यहां आया हूं। मैंने समाचार चैनलों पर देखा कि लोग कह रहे हैं मैं छुप रहा हूं। मुझे बेहद दुख हुआ। मैं इसीलिए आज यहां आया हूँ।”

अमर सिंह पर भ्रष्टाचार निरोधी क़ानून के तहत दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। वर्ष 2008 में वे समाजवादी पार्टी के महासचिव थे जब वाम दलों के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना था।

22 जुलाई को मतदान से कुछ घंटे पहले ही बीजेपी के तीन सांसदों ने लोक सभा में नोटों की गड्डियां पेश की। इन तीन सांसदो (अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा) का आरोप था कि अमर सिंह के सहयोगियों ने विश्वास मत में हिस्सा न लेने के लिए उन्हें एक करोड़ रूपए रिश्वत में दिए गए।

तहक़ीकात के बाद दिल्ली पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि अमर सिंह ने सांसदों का समर्थन ख़रीदने की योजना ज़रूर बनाई थी लेकिन पुलिस ये नहीं बता पाई है कि आख़िर वे सरकार को मदद करने के लिए ऐसी योजना क्यों बनाऐंगे जिस सरकार को उनकी पार्टी ने केवल बाहर से समर्थन दिया था।

आरोप है कि इन तीन सांसदों को तीन-तीन करोड़ रूपए देने की पेशकश गई थी। एडवांस के तौर पर मतदान से पहले उन्हें एक करोड़ रूपए दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में पुलिस की तहक़ीकात चल रही है। अदालत का कहना है कि अब पुलिस के लिए ये ज़रूरी है कि वो इन पैसों के स्रोत का पता करे।

अमर सिंह ने अपने उपर लगे सभी आरोपों को ग़लत बताया है।

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.