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आम जनता के लिए भस्मासुर साबित होंगे नरेंद्र मोदी..

By   /  April 30, 2014  /  2 Comments

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-अयोध्या प्रसाद ‘भारती’||
मेरा दृढ़ विश्वास है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के गठन बाद भारत वह नहीं रह जाएगा जो अब तक रहा है, लोकतंत्र यहां पहले ही दिखावटी ज्यादा है, वास्तविक कम. जो है वह भी नहीं रहेगा. प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप जो कुछ नीतियां बनाई थीं, वे कांग्रेस, जनता पार्टी, जनता दल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, राष्ट्रीय मोर्चा-वाम मोर्चा (अटल बिहारी वाजपेयी के नेत्त्व वाली सरकार) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, और वर्तमान की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकारों ने धीरे-धीरे खत्म करने का काम किया है. देश को आर्थिक अराजकता की ओर इन्होंने धकेला है. मोदी देश के आम आदमी का और बेड़ा गर्क करेंगे. अगर कांग्रेस ने देश को बर्बाद किया है तो, जहां-जहां भाजपा की सरकारें रही हैं वहां वहां उनके लोगों ने भी लूटने में कसर नहीं छोड़ी है. मोदी राज में और लूट मचेगी. मैं शुरु में ही कह दूं कि आम जनता के लिए मोदी भस्मासुर साबित होंगे.

हाल के कुछ वर्षों में संप्रग (यूपीए) सरकार ने चुनिंदा सरकारी संस्थाओं की रेड़ लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. केंद्रीय सतर्कता आयोग, नियंत्रक और महा लेखा परीक्षक, न्यायपालिका, सीबीआई की साख को कम करने के अनेक काम किए. मोदी गुजरात में यह पहले से कर रहे थे. वे राज्यपाल की नियुक्ति पर भिड़े, लोकपाल की नियुक्ति पर भिड़े, गुजरात में नरसंहार में उनकी सरकार की संलिप्ता साबित हुई. प्रधानमंत्री वाजपेयी की मोदी के सामने एक न चली. व्यथित वाजपेयी ने सार्वजनिक रूप से कहा- मोदी ने राजधर्म का पालन नहीं किया. मोदी पर इससे तीखी टिप्पणी और क्या हो सकती है, वह भी उनकी पार्टी के ही सर्वसम्मानित शीर्ष व्यक्ति के द्वारा.
गुजरात में मोदी की मनमानी चल रही है, जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के कल्याण की नीतियों की ऐसी-तैसी कर दी गई है. खेती पर सब्सिडी खत्म कर दी है. 800 किसानों ने वहां आत्महत्या की है. लाल बहादुर शास्त्री के द्वारा बसाए गये तमाम सिख किसानों को वहां से भागने पर मजबूर किया जा रहा है ताकि 5 लाख करोड़ की कीमत वाली जमीन उद्योगपतियों को सौंपी जा सके. मोदी ने अडानी को एक रुपये से लेकर 32 रुपये प्रति गज तक की कीमत पर 14306 एकड़ जमीन दी. मोदी राज में अड़ानी की हैसियत 3 हजार करोड़ से बढ़कर 46 हजार करोड़ की हो गई है. जब वायु सेना ने मोदी से जमीन मांगी तो गुजरात सरकार ने बाजार मूल्य से आठ गुणा अधिक कीमत मांगी. प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही कीमत कम की गई. कृषि विकास दर वहां 1.8प्रतिशत है. मजदूरों को कम मजदूरी गुजरात में मिल रही है. मोदी राज में 10,000 से अधिक छोटे उद्योग बंद हुए. सरकारी आंकड़ों के अनुसार वहां 15 लाख लोग बेरोजगार हैं. अस्पतालों में डॉक्टर और अन्य स्टाफ और स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. विकलांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन अन्य राज्यों से कम है. केंद्र सरकार ने 130 करोड़ रुपये कच्छ में सरकारी अस्पताल चलाने के लिए गुजरात को दिये थे. मोदी सरकार ने उसे अड़ानी को सौंप दिया जो उसे कमाई के लिए निजी अस्पताल के रूप में चला रहे हैं. गुजरात पर आज 1.80 लाख करोड़ का कर्ज है, जो मोदी से पहले महज 26000 करोड़ था. राज्य की आम जनता और किसानों के लिए गुजरात सरकार सुविधाएं, सब्सिडी नहीं देना चाहती लेकिन उसके खजाने उद्योगपतियों के लिए खुले हैं. टाटा को नैनो प्लांट लगाने के लिए गुजरात ने 29000 करोड़ की सब्सिडी दी. मोदी सरकार अंबानी पर मेहरबान है. प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ाने की अंबानी की मांग से मोदी पूरी तरह सहमत हैं. इसे दोगुना किया जाना है और रिलायंस ने मांग की है कि 13 मई 2014 को मतदान समाप्त होते ही गैस की कीमतें बढ़ा दी जाएं.

मोदी ने गरीबों के लिए 50 हजार मकान बनाने का वादा किया था, अरविंद केजरीवाल के अनुसार 50 मकान भी बमुश्किल बने हैं. बताया जाता है कि बिजली कुछ ही घंटे मिलती है. हजारों-हजार किसान बिजली कनेक्शन से वंचित हैं. राज्य में रिश्वतखोरी जारी है. कोई भी सरकारी काम हो उसके लिए सुविधा शुल्क तय है. गुजरात में जनगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार साक्षरता, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य-चिकित्सा, लिंगानुपात, न्यूनतम वेतन, ग्रामीण विकास, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और अन्य अनेक मामलों में हालात बेहतर नहीं हैं. 15 से 49 आयु वर्ग की 55.5 प्रतिशत महिलाएं रक्त अल्पता से ग्रसित हैं. इसी वर्ग की 608 फीसद गर्भवती औरतें कुपोषण और अनीमिया की शिकार हैं. राज्य में बाल श्रमिकों का प्रतिशत मोदी राज में घटने की बजाये बढ़ा है. विदेशी निवेश में गुजरात महाराष्ट्र और दिल्ली से पीछे है. मोदी के केंद्र में आने के बाद जन कल्याणकारी योजनाओं में कटौती होगी. यह गैस, पैट्रो पदार्थों, स्वास्थ्य-चिकित्सा, शिक्षा, बिजली, पानी इत्यादि को महंगा करेंगे.
विकास के मायने यह नहीं होते कि कहां चौड़ी सड़कें, मॉल आदि बना दिए गये. बल्कि वास्तविक विकास उसे कहना चाहिए, जहां जनता को मूलभूत जरूरतें शिक्षा,स्वास्थ्य-चिकित्सा, संतुलित आहार, रोजगार, आवास आदि आसानी से और सम्मान के साथ प्राप्त हो. गुजरात राज्य इस मामले में विफल है और विकास के मामले में मोदी झूठ बोलते हैं. वे सिर्फ मुठ्ठी भर धनिकों को लाभ पहुंचा रहे हैं. मोदी संवैधानिक जरूरतों को बहुत ही न्यूनतम मात्रा में अब तक पूरी करते रहे हैं. वे केंद्र में पदारूढ़ होंगे तो लोकतंत्र को तेजी से तानाशाही की ओर ले जाएंगे. गुजरात में जनता को बहुत कम लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हैं. जो भी अधिकारों की बात करता है उसे डराया या परेशान किया जाता है.

मोदी सहित उनके कई साथी और सहयोगी संगठनों के लोग हिटलरी मानसिकता के हैं. मोदी राज में मुस्लिमों पर हमले बढ़ सकते हैं. अभी कांग्रेस और अन्य मिली जुली सरकारों के चलते ही आरएसएस के तमाम संगठन मुस्लिमों के खिलाफ तरह-तरह के हमले करते रहते हैं और जब एक कट्टर तानाशाह की सरकार होगी तो इन संगठनों को कौन रोकेगा ? सुरक्षा बल और अन्य सरकारी मशीनरी तो हमेशा ही सत्तारूढ़ दल के लोगों के साथ रही है. यूं तो इसाइयों पर भी हमले होते रहे हैं, मोदी राज में यह होगा तो हो सकता है कि मोदी के विदेशी आकाओं के दबाव में इसाइयों को कम परेशान किया जाए. हिंदुत्व विचारधारा के दल की सरकार के दौर में उन हिंदुओं को खतरा रहेगा जो उदार हैं और सच को सच कहने के पक्षधर हैं. मजदूरों, छोटे किसानों, छोटे कारोबारियों का संकट बढ़ेगा. मजदूर, किसानों और आम जनता के पक्ष में बोलने वाले भी संकट में पड़ेंगे.

मोदी पर तमाम देशी-विदेशी कंपनियां पैसा लुटा रही हैं. मोदी के लिए फिर यह जरूरी हो जाएगा कि वे उनके फायदे के लिए काम करें और उनके हितों में रोड़ा बनने वाली हर बाधा को हटाएं. मोदी की सरकार एडम स्मिथ और अन्य यूरोपीय उन बाजारवादियों के सिद्धांतों के अनुरूप काम करेगी जिसके अनुसार सरकार की भूमिका कम से कम हो और बाजार को मनमानी करने की छूट हो. ऐसे में बाजार जनता को लूटेगा और जनता परेशान होगी तो सुरक्षा बलों, न्यायालय, वकीलों का काम बढ़ जाएगा. शारीरिक रूप से रोगी तो बढ़ेंगे ही मानसिक रोगियों और अपराधियों की संख्या भी बढ़ेगी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. भारतीय says:

    मै आपके लेख से असहमत हू….
    आपका संपुर्ण लेख पक्षपाती है.

  2. manoj kumar mishra says:

    bhasmasur to nehru the jinhone desh ko baant diye ? logon ko muslim law or hindu law nahi pata tha magar unhone ye banaya jisse des me kabhi bhai chara n rahe or desh me hamesa sampradayik mahol bana rahe 1947 ko desh to aajad hua par congressi gulaam huye jo aaj tak hai ho sakta hai ki modi achche pradhanmantree na ban saken par congress se bura kuch kar bhi nahi sakte isliye aap chintamukt rahiye sir ji

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