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विश्व पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस पर ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में विचार गोष्ठी आयोजित..

By   /  May 7, 2014  /  No Comments

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ग्रेटर नोएडा : ‘विश्व पत्रकारिता स्वतंत्रता दिवस’ के अवसर पर रविवार को शहर के सेक्टर स्वर्ण नगरी स्थित ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने माना कि पत्रकार देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। पत्रकारिता को और कानूनी एवं पेशेवर स्वतंत्रता की आश्वयकता है।world-press-freedom-day-400x480

कार्यक्रम का विषय ‘लोकतंत्र की मजबूती के लिए मीडिया की स्वतंत्रता का महत्व’ था। संगोष्ठी में पूरे एनसीआर से आए पत्रकार शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह, सेवानिवृत्त न्यायधीश हीरा लाल, ह्यूमन टच फाउंडेशन की अध्यक्ष डा.उपासना सिंह, पुलिस उपाधीक्षक अनुज चौधरी, अभिभावक संघ के अध्यक्ष आलोक सिंह ने अपना मत रखा।

सभी वक्ताओं ने माना कि मीडिया जितना स्वतंत्र होगा, सरकारी कामकाज उतने पारदर्शी होंगे। सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। मसलन पिछले दो दशकों में दलित और महिला अधिकारों के प्रति मीडिया में बड़ा कार्य किया है। फिलहाल देश में चल रहे चुनाव में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

वक्ताओं ने यह भी माना कि सोशल मीडिया का दखल और इसका प्रयोग जिस तरह बढ़ रहा है, उसका लाभ भी पत्रकारिता को मिलेगा। इस अवसर पर डा.सतीश शर्मा, सुभाष यादव, मनोज कुमार, नवीन कुमार, मनीष तिवारी, रोहित प्रियदर्शन और अंशूमान यादव को पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

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  • Published: 4 years ago on May 7, 2014
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  • Last Modified: May 7, 2014 @ 1:07 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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