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प्रेस नोट नहीं छापने पर अख़बारों के दफ्तर पर हमला..

By   /  May 7, 2014  /  No Comments

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महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण में आज दोपहर डेली ऐक्य और डेली सकाल के कायार्लयों पर पर हमले किये गए. इस हमले में दोनो अख़बारों के ऑफिस का काफी नुकसान हुआ है. आरोप है कि हिंदुस्थान प्रजा पक्ष नाम के गुंडो ने यह हमला किया. इसके खिलाफ फलटण पुलिस में एफआयआर रजिस्टर किया गया है.phaltan-4

कुछ दिन पहले फलटण के पुलिस लॉक अप में एक आरोपी की मौत हुई थी. गुनहगार के घरवाले कह रहे थे पुलिस की मारपीट से यह मौत हुई है. इसकी जांच के लिए एक जुलूस निकाला गया था. बाद में एक कान्स्टेबल पर कारवाई की गई. एक विशिष्ट वर्ग के दबाव में आ के यह कारवाई की गई है ऐसा हिंदुस्थान प्रजा पार्टी के लोगो का कहना था. इसके विरोध में उन्होने एक प्रेस नोट भी जारी किया. लेकिन यह प्रेस नोट सभी न्यूजपेपर में नही आया. इससे नाराज हिंदुस्थान प्रजा पार्टी के लोगो ने आज दो दैनिकों के कायार्लयो पर हमला बोल दिया. आफिस में फर्नीचर की तोड़फोड़ की गई, शीशे फोडे गये, कंप्यूटर भी फोडे गये. वहां काम कर रहे पत्रकारों को भी धमकाया गया.

महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती के प्रमुख एस.एम.देशमुख ने इस हमले का निंदा की है. सतारा जिला पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती के निमंत्रक सुजित अंबेकर और शरद काटकर हालातों का अवलोकन करने घटना स्थल पर पहुच गये है. एस.एम.देशमुख ने हमलावरों पर तुरंत सख्त कारवाई करने की मांग की है. सतारा जिला मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का निजी जिला है.लेकिन इस जिले में पत्रकारों के

​उपर लगातार हमले हो रहे है.

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  • Published: 4 years ago on May 7, 2014
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  • Last Modified: May 7, 2014 @ 5:47 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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