/बाबा रामदेव ओर नरेन्द्र मोदी के बीच खटास..

बाबा रामदेव ओर नरेन्द्र मोदी के बीच खटास..

पल पल करवट लेते राजनैतिक घटनाक्रमों में एक नई कड़ी जुड़ गयी है. खबर है कि नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी और उनके करीबी रहे योग गुरु बाबा रामदेव के बीच खटास आ गयी है.modi-ramdev

बाबा रामदेव फ़िलहाल मोदी से नाराज़ चल रहे हैं और इसी वजह से वो शपथग्रहण समारोह में भी नहीं आये थे. पिछले कुछ दिनों में रामदेव मोदी के समर्थन में रहे और उनके खास माने जाते रहे थे. ऐसे में शपथग्रहण समारोह में रामदेव की गैर मौजूदगी प्रश्नवाचक थी.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाबा रामदेव अपनी पसंद के कुछ लोगों को मंत्रिमंडल में बतौर मंत्री देखना चाहते थे, लेकिन अंतिम निर्णय नरेन्द्र मोदी का रहा और उन्होंने रामदेव से ज्यादा अपने लोगों पर भरोसा जताते हुए उन्हें इंतज़ार करने को कहा. इससे नाराज़ रामदेव ने शपथग्रहण समारोह में न जाने का फैसला लेते हुए मौन धारण कर लिया और अपनी जगह अपने करीबी बालकृष्ण को शपथग्रहण समारोह में भेज दिया.

इससे पहले खबर मिली थी कि शपथग्रहण समारोह में बाबा रामदेव अपने दो दर्जन से अधिक अनुयायियों के साथ नज़र आ सकते हैं, लेकिन मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया में अनबन हो गयी. गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.