/क्या शिक्षा मंत्री बनने के लिए डिग्रियां जरुरी हैं..

क्या शिक्षा मंत्री बनने के लिए डिग्रियां जरुरी हैं..

बीजेपी ने जब से स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्री का पद सौंपा है तब से वह विपक्ष के निशाने पर हैं. उनकी शिक्षा को लेकर विवाद और बढ़ गया है. वर्ष 2004 के एफिडेविट में उन्हें बीए पास बताया गया है जबकि वह मात्र बारहवी पास हैं. कांग्रेस का कहना है कि जो महिला मात्र बारहवी पास है वह इतना जिम्मेदारी वाला पद कैसे संभालेंगी. यही नहीं चुनाव प्रचार के दौरान स्मृति ईरानी ने अपनी एजुकेशन के बारे में गलत जानकारी भी दी थी. कभी उन्होंने खुद को बेचलर बताया और कभी कहा कि वह बीकॉम फर्स्ट इयर तक पढ़ी है. पदभार सँभालने पर उन्होंने वादा किया है कि शिक्षा पर 6 प्रतिशत खर्च जीडीपी किया जायेगा जो अब तक मात्र 3.8 प्रतिशत था.SMIRTI

सीएसडीएस की मधु किश्वर का भी कहना है कि स्मृति ईरानी का चयन सही नहीं है, उन्होंने बताया कि हालाँकि स्मृति ईरानी ने बीकॉम फर्स्ट इयर तक कारेस्पोंडेंस कोर्स के जरिये करने का दावा किया था. मगर ऐसी कोई डिग्री उनके पास नहीं है इसका मतलब तो यह हुआ कि एडमिशन लेकर वह गायब हो गई.

कोंग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने हमेशा से ही इंटेलेक्चुअल और अकादमीक लोगों को महत्व दिया है मगर बीजेपी ने इस और कभी ध्यान नहीं दिया.

वहीँ इस विषय में कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन का भी यही कहना है कि 45 सदस्यों के इस मंत्रालय में कोई भी काबिल नहीं है. पार्टी द्वारा ऐसे व्यक्ति का चुनाव इस बात कि ओर संकेत करता है कि पार्टी के भीतर संतुलन नहीं है और प्रशासनिक अनुभव की भी कमी है नहीं है.

इस बारे में भाजपा के ही एक सांसद का कहना है कि स्मृति ईरानी पार्टी के लिये बिल्कुल मनमोहन सिंह जैसी हैं. वहीँ दूसरी ओर एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि नरेंद्र मोदी के मंत्रालय में दसवे नंबर तक मोदी होते हैं ग्यारहवे नंबर से अदर्स होते हैं. तो जनसत्ता के सम्पादक ओम थानवी का कहना है कि स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्रालय ही क्यों सौंपा गया इस पर जनता का सवाल खड़े करना उचित है क्योंकि जनता को मोदी सरकार से यह अपेक्षा थी कि वह कुछ मंत्रालयों में विषयो के विशेषज्ञ भी लाने वाले हैं. वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी का कहना है कि शिक्षा मंत्री के चयन में नरेंद्र मोदी परिपक्वता से काम कर सकते थे मगर चूक गए. उनकी जगह निर्मला उपयुक्त होती. हो सकता है यह मोदी का कोई अघोषित एजेंडा हो जिसे स्मृति ईरानी के जरिए लागू करना चाहते हों. वैसे डिग्रियां प्रतिभा का प्रमाण नहीं होती हैं.

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