/रॉबर्ट वाड्रा को एयरपोर्ट पर मिलने वाली VVIP छूट खत्म होगी..

रॉबर्ट वाड्रा को एयरपोर्ट पर मिलने वाली VVIP छूट खत्म होगी..

सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की वीआईपी सुरक्षा कम हो सकती है. नरेंद्र मोदी सरकार ने एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से छूट पाने वालों की लिस्ट की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं. इस लिस्ट में रॉबर्ट वाड्रा का भी नाम है. गृह मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि वाड्रा को मिली रियायत में बदलाव हो सकता है. यहां तक कि उनका नाम इस लिस्ट से हटाया भी जा सकता है.VADRA

यूपीए सरकार के दौरान रॉबर्ट वाड्रा को मिलने वाली सुरक्षा पर तलवार चल सकती है. खासतौर पर वाड्रा को एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से मिलने वाली छूट खत्म हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय उस लिस्ट की समीक्षा कर रहा है जिसमें सुरक्षा जांच से छूट पाने वाले वीआईपी के नाम हैं. नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गणपति राजू का भी कहना है कि एयरपोर्ट पर हर नागरिक की जांच होनी चाहिए. हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया वो गृह मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार ही चलेंगे.

बीजेपी का कहना है कि जब भी कोई नई सरकार आती है तो वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा करती है. ताकि कुछ नए मंत्रियों और महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा बढ़ाई जा सके और कुछ लोगों की हटाई जा सके. बीजेपी पहले भी रॉबर्ट वाड्रा को सुरक्षा के नाम पर मिलने वाली छूट पर सवाल उठाती रही है.

Robert-Vadra-Secuity-Checksबीजेपी प्रवक्ता एम जे अकबर ने कहा कि जब भी कोई एयरपोर्ट पर जाता है तो विचित्र बात होती थी कि एय़रपोर्ट में उनको सिक्योरिटी चेक नहीं होती है. वहां पर लिखा होता था कि देश के सर्वोच्च पद पर रहने वालों का पदनाम लिखा होता था या फिर जो कर चुके हैं उनका पदनाम लिखा होता था. जिनको भारत रत्न मिला है वो लिखा होता था. लेकिन सिर्फ रॉबर्ट वाड्रा का नाम लिखा होता था. एक ही बंदे का नाम लिखा जाता था. आखिर क्यों. जनता सवाल करती थी. जनता की सरकार आई है. वो पूछेगी सवाल औऱ सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए.

कांग्रेस वाड्रा की सुरक्षा के बारे में कुछ कहने को तैयार नहीं है. हालांकि उसका भी मानना है कि सुरक्षा की समीक्षा करना सरकार का अधिकार है. कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि राबर्ट वाड्रा को सुरक्षा जांच में छूट और अन्य लोगों की सुरक्षा की समीक्षा करने का फैसला सरकार का है और सरकार ऐसा कर सकती है. जब इस संबध में निर्णय लिया जाएगा तब पार्टी इस पर प्रतिकिया देगी.

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक समीक्षा के बाद वीआपी लिस्ट में कई नए नाम जुड़ेंगे और कई पुराने नाम हटेंगे. और अगर हटाए जाने वाले नामों में रॉबर्ट वाड्रा का भी नाम हुआ तो इस पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.