/बिहार ह्यूमन राइट कमिशन ने एस्बेस्टस से होने वाले नुकसान की जांच के दिए निर्देश..

बिहार ह्यूमन राइट कमिशन ने एस्बेस्टस से होने वाले नुकसान की जांच के दिए निर्देश..

बिहार के भोजपुर में मौजूद बिहिया कारखाने में हाल ही में एक मजदूर कि मौत हो गई. उसके फेफड़े खराब हो गये थे. चूँकि इस फक्ट्री में अब भी वाईट क्रिस्टोलाइट एस्बेस्टस फाइबर पर काम होता है जो बेहद नुक्ष्ण दायक है और इससे होने वाली बीमारी का कोई इलाज भी नहीं है. इसके हार्मफुल इफेक्ट के कारण दुनिया के 50 देशो में इसे बैन कर दिया गया है.Photo of ex-worker of Giddha asbestos factory यह कहानी मात्र यही तक सीमित नहीं है ऐसे कई कामगार मजदूर हैं जो इस तरह कि बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे है. इससे पहले भी बिहार ह्यूमन राइट कमीशन ने 28 मई 2014 के आदेश के अनुरूप रामको इंडस्ट्री बिहिया में जांच करवाई थी. जांच में पाया गया जी एक वीरेन्द्र कुमार नाम के वर्कर कि मौत हो गई है उसके भी फैपडे ख़राब हो गए थे.

यही नहीं फक्ट्री में काम करने वाले दूसरे मजदूरो कि जिंदगी क लिये भी खतरा है. इस पर कमिशन ने प्रिंसिपल सेकेट्री ऑफ इंडस्ट्री, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बिहार, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट भोजपुर, सीएमओ कम सिविल सर्जन भोजपुर से रिपोर्ट मांगी थी. जिनमे से प्रिंसिपल सेकेट्री ऑफ इंडस्ट्री, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट भोजपुर ने तो रेस्पांस दिया मगर सीएमओ कम सिविल सर्जन भोजपुर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन और इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन ने इसकी खुदाई, निर्माण और इसके प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के मांग की. यह ध्यान देने वाली बात है कि वैसे तो भारत में इसके प्रयोग पर प्रतिबंध लग चुका है मगर बावजूद इसके यह पदार्थ रशिया के जरिये यहां पहुँच रहा है और इसका उपयोग भी जारी है.

27 जनवरी 1995 को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था. जिसमे स्वास्थ्य के अधिकार को फंडामेंटल राइट के दायरे में शामिल कर लिया गया. यह फैसला कोर्ट ने 1986रिट याचिका के आधार पर दिया जिसमें एस्बेस्टस के बारे में जिक्र किया गया था.

समय रहते अगर इसके उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगा तो भोपाल गैस त्रासदी जैसे हालात पैदा हो सकते है. एस्बेस्टस का प्रयोग अमूमन सीमेंट की छत बनाने के लिए होता है. यह खतरनाक जानलेवा बिमारियों का वाहक है. इसके प्रयोग पर तुरंत रोक लगनी चाहिए. जो लोग इस तरह के काम में लगे हुए हैं उनके खिलाफ सख्त से सख्त कारवाही होनी चाहिए.

रिसोर्स -गोपालकृष्ण

 

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