/भारतीय किसान इथोपिया में ऑर्गेनिक जड़ी बूटियों के उत्पादन के लिए आमंत्रित..

भारतीय किसान इथोपिया में ऑर्गेनिक जड़ी बूटियों के उत्पादन के लिए आमंत्रित..

नेशनल अवार्ड से सम्मानित उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक डॉ राजाराम त्रिपाठी जो इस समय छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में ऑर्गेनिक खेती के बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, को इथोपिया में ऑर्गेनिक जडी बूटियों के उत्पादन हेतु आमंत्रित किया गया है. दो हजार करोड़ रूपए के इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले सुगंध एवं चिकित्सकीय पौधे अवासा क्षेत्र में उगाए जाऐंगे.cs-greenentrepreneurs-lead-march25-pg3-8-10_031713084743

उत्तर प्रदेश के जिला प्रताप गढ़ के रहने वाले डॉ राजाराम त्रिपाठी बस्तर के कोंडा गांव क्षेत्र में कई बरसों से एक को ऑपरेटिव सोसायटी चलाते हैं. जिसमें 300 आदिवासी महिलाएं काम करती हैं. डॉ त्रिपाठी ने बताया कि हम शुरूआत में दस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अवासा क्षेत्र में काम करेंगे जो अदिअबाबा से 110 किमी दूर है. उन्होंने बताया कि उनकी संस्था मां दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप ने यूएई की कम्पनी लोताह ग्रुप के साथ एमओयू हस्ताक्षरित किया है. इसके अंतर्गत ऑर्गेनिक फॉर्मिंग, इस परियोजना में खासतौर पर संकटग्रस्त मेडिसिनल प्लांट को लगाने की तरजीह दी जाएगी. डॉ त्रिपाठी के अनुसार शुरू में ऐसे 28 जड़ी बूटियों को चिन्हित किया गया है.

भारत के किसी भी कृषि विशेषज्ञ को मिलने वाला यह सबसे बड़ा और सम्मानजनक पुरस्कार है.

डॉ त्रिपाठी को इसके पूर्व 2012 में रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड का अर्थ हीरो अवार्ड दिया जा चुका है. मांदंतेश्वरी हर्बल ग्रुप आदिवासी क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए अनेक हर्बल फूड सप्लीमेंट का उत्पादन एवं मार्केटिंग सेंटल हर्बल एग्रो मार्केटिंग फेडरेषन ऑफ इंडिया की मदद से करता है. उत्पादन का काम सितम्बर ऑक्टूबर माह के दौरान शुरू होने की योजना है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.