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मोदी का सोशल मीडिया पर जोर..

By   /  May 31, 2014  /  1 Comment

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नयी दिल्ली, सोशल मीडिया को जम कर भुनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मंत्रियों को हिदायत के रूप में नयी परिपाटी शुरू करने की सलाह दी है. मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा है कि वे सभी सोशल मीडिया में अपने अपने अकाउंट बना लें और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने और अपने कार्यों की जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें. साथ ही ये भी कहा है कि अकाउंट बना कर भूल न जायें और लगातार इन पर एक्टिव भी रहे जिससे कि जनता अपनी शिकायतें उन तक पहुंचा सके.

सूचना एवं प्रसारण के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री प्रकाश जावडेmodi and social mediaकर ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय ऐसे मंत्रियों के लिए ट्विटर और फेसबुक अकाउंट खोलने में सभी ज़रूरी सहायता प्रदान करेगा, खास तौर से उन सभी मंत्रियों को जो सोशल मीडिया और इन्टरनेट के अभ्यस्त नहीं है. इसके लिए मंत्रालय ने सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब बनाया है. जावडेकर ने कहा कि जो जो मंत्री चाहेंगे उनके लिए ये हब सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अकाउंट खोलने में मदद करेगा. जावडेकर ने आगे कहा, “ अगर मंत्री च्हेंगे तो मंत्रालय उनके लिए व्यक्तिगत और मंत्रलायगत, दोनों तरह के अकाउंट खोलने में मदद करेगा.

प्रकाश जावडेकर को संसदीय कार्य राज्य मंत्री का औपचारिक कार्यभार सौंपा गया है. कार्यभार ग्रहण करने की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि सोशल नेटवर्किंग पर सक्रिय मोदी ने अपने सभी मंत्रियों को भी सोशल मीडिया पर सक्रिय होने की हिदायत दी है और कहा है की अपने कार्यों का ब्यौरा जनता को देते रहे जिससे जनता उनके कार्यों से अवगत हो सके और अपनी शिकायतें सीधे उन तक पहुंचा सके.

गौरतलब है कि भाजपा के लोकसभा चुनाव की कामयाबी में सोशल नेटवर्किंग का बड़ा हाथ रहा है. मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए उनके नाम की घोषणा से काफी पहले ही सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़े कैम्पेन शुरू हो गए थे जिन्होंने बाद में भाजपा की जीत में अहम् भूमिका निभाई.

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  • Published: 3 years ago on May 31, 2014
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  • Last Modified: May 31, 2014 @ 9:58 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. पारदर्शिता व युवा वेग से जुड़े रहने का यह सबसे अच्छा साधन है आधुनिक युग में यह जरुरी भी है दूसरी बात ये कि जब पी एम खुद इतने अपडेट रहते हैं तो टीम का भी वैसा ही होना जरुरी है

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