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विपक्ष के नेता को लेकर कांग्रेस में बनी असमंजस की स्थिति…

By   /  June 1, 2014  /  1 Comment

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जल्द ही नई लोकसभा की बैठक शुरू होने वाली हैं मगर कांग्रेस अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि सदन में विपक्ष का नेता कौन होगा. विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा सांसद कांग्रेस से ही हैं. राहुल को चुनाव में पार्टी के भविष्य के नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया गया था और इसलिए कई नेताओं का मानना है कि वहलोकसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएं. लेकिन पार्टी का एक हिस्से का कहना है की अभी राहुल के पास प्रशासनिक और संसदीय जिम्मेदारियां संभालने काअनुभव नहीं है. ऐसे में उन्हें मुश्किल हो सकती है. वहीं कुछ वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि है, पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ही लोकसभा में विपक्ष की नेता बने.kamal-nath-291112

गांधी परिवार से यदि कोई विपक्ष का नेता बनने को तैयार न हुआ तो, इसके लिए अनुभवीनेता कमलनाथ, वीरप्पा मोइली और मल्लिकार्जुन खडग़े के नाम लिए जा रहे हैं. लेकिन हिंदी भाषी क्षेत्र में कमलनाथ की स्वीकार्यता अधिक होने के कारण उनके नाम पर सहमति आसानी से बनाई जा सकती है. वर्तमान लोकसभा में कमलनाथ सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और वह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से 9वीं बार संसद के सदस्य निर्वाचित हुए हैं और लोकसभा में नव निर्वाचित सदस्यों कोशपथ दिलाने के लिए उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी बनाया गया है. ऐसे में उनका नाम सबसे ऊपर चल रहा है. इन सबके बीच कांग्रेस के अंदर राहुल को लेकर दबाव की राजनीति चल रही है.

राहुल का समर्थन करने वाले कह रहे हैं कि इस समय पार्टी का नेतृत्व करने से इंकार करने से यह संकेत जाएगा कि वह उदासीन हैं और उनके आलोचकों को उनकी निंदा करने का मौका मिल जाएगा. लेकिन इस बात पर चर्चा होगी कि क्या लोकसभाके स्पीकर उन्हें विपक्ष का नेता मानते हैं कि नहीं ऐसा इसलिए पार्टी केपास लोकसभा में महज 44 सांसद ही हैं जबकि कानून 54 होने चाहिए इस बात परअभी बहस होनी बाकी है.

ऐसे में कांग्रेस राहुल समर्थकों का दबाव है कि लोकसभा अध्यक्ष यदि कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा देते हैं तो उस स्थिति में ही राहुल गांधी के नाम को आगे बढाया जाए, उससे पहले यदि राहुल के नाम को आगे बढ़ाया गया और लोकसभा अध्यक्ष द्वारा कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल का दर्जा नहीं दिया गया तो कांग्रेस के लिए स्थिति शर्मनाक हो सकती है. ऐसे में कांग्रेस की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद उनके निर्णय पर टिकी हुई हैं.

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1 Comment

  1. राहुल को न बनाये जाने पर देश को यह संदेशभि जा सकता है कि पार्टी जब उन्हें विपक्ष नेता के योग्य ही नहीं समझती तो पी एम किस मुहं से बनाने का डैम भरती थी वह बात दीगर है कि वे इस पद के योग्य भी नहीं है यह बात चुनाव के दौरान उनकी भाषण कलशम्ता वह मुद्दों के उठाने के सम्बन्ध में अच्छी तरह परखी जा चुकी है

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