/गैंग रेप की घटनाओं के विरोध मे जय हो ने निकाला कैंडल मार्च..

गैंग रेप की घटनाओं के विरोध मे जय हो ने निकाला कैंडल मार्च..

बदायूं में गैंग रेप के बाद की गई दो युवतियों की हत्या एवं गौतमबुद्धनगर के एनटीपीसी क्षेत्र में दलित महिला से गैंग रेप कर दस दिनों तक पंचायतों में इज्जत उछाले जाने की घटना के विरोध में सोमवार देर शांम को जय हो सामाजिक संगठन ने दादरी में कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान संगठन के लोगों ने बदायूं में हत्या कर पेड पर लटकाई गईं दोनों युवतियों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। वहीं प्रदेश सरकार को सदबुद्धी की कामना कीIMG-20140603-WA0006

इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष योगेश नागर एडवोकेट ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। वहीं जगल राज की स्थापना हो रही है। प्रदेश में तेजी के साथ बढ रहीं गैंग रेप की घटनाएं इसका ताजा उदाहरण हैं। इस दौरान उन्होंने एनटीपीसी में दलित महिला से हुए गैंग रेप के मामले में जारचा कोतवाली एवं एनटीपीसी चौकी के पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग करी। इस अवसर पर सभासद अमित राव ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं पूरी तरह असुरक्षित है। लेकिन सरकार को उसकी कोई चिंता नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा मुख्यमंत्री एवं सपा अध्यक्ष के बयानों से ही लगाया जा सकता है। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने बडी संख्या में हाथों में मोमबत्तियां लेकर पूरे शहर में मौन जुलूस निकाला।

इस अवसर पर कपिल चौधरी, याकूब मलिक, नरेश पीलवान, पराग, अगम नागर, अमन शर्मा, प्रिंस गर्ग, हिमांशू तोंगड, पारक बंसल, सचिन भाटी, पवन कटारिया, मन्नू शर्मा, राजेश कोट आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद थे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.