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पाकिस्तान में सरकारी फरमान, जियो न्यूज़ निलंबित..

By   /  June 6, 2014  /  2 Comments

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प्राप्त ख़बरों के अनुसार पाकिस्तान के प्रमुख टीवी न्यूज़ चैनल जियो न्यूज़ का लाइसेंस पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलारिटी अथॉरिटी (PEMRA) के द्वारा निलंबित कर दिया गया है. पेमरा ने जियो टीवी पर एक करोड़ रूपए का जुर्माना भी लगाया है.GEO

पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलारिटी अथॉरिटी के प्रवक्ता के अनुसार परवेज़ राठौर की अध्यक्षता में हुयी मीटिंग में ये निर्णय लिए गए. इस मीटिंग में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलारिटी अथॉरिटी के सरकारी सदस्य शामिल हुए जिन्होंने जियो न्यूज़ के विरुद्ध रक्षा मंत्रालय की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए चैनल का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से अगले पंद्रह दिनों के लिए निलंबित कर दिया. हालाँकि इस मीटिंग में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलारिटी अथॉरिटी निजी स्वामित्वों के समूहों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा नहीं लिया.

जियो न्यूज़ की तरफ से जारी किये गए बयान में कहा गया है कि उन्हें इस निलंबन से जुड़े कोई सबूत नहीं दिखाए गए हैं न ही उन्हें पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलारिटी अथॉरिटी के सामने अपना पक्ष रखने दिया गया. पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलारिटी अथॉरिटी ने आगे बताया कि उसने पहले ही जियो न्यूज़ पर बंधन लगा रखे हैं जिसके अंतर्गत चैनल पाकिस्तान के 90 फ़ीसदी इलाकों में 45 दिन तक बंद रखने का आदेश था. इसके बाद चैनल ने माफ़ी मांग ली थी और २ करोड़ रूपए के नुकसान होने की बात कही थी.

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  • Published: 3 years ago on June 6, 2014
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  • Last Modified: June 6, 2014 @ 2:52 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. सेना और आई एस आई के खिलाफ चलने वाले की वहां यही हालत होती है पाकिस्तान चाहे कितना ही लोकतंत्र होने का डैम भर ले पर वह पाकिस्तान के डी ऐन ए में ही नहीं है वहां के नेता देश के बाहर कुछ भी बोल ले लेकिन वापिस जाते ही उनकी बोलती बंद हो जाती है प्रेस की आजादी तो केवल दिखावा है

  2. सेना और आई एस आई के खिलाफ चलने वाले की वहां यही हालत होती है पाकिस्तान चाहे कितना ही लोकतंत्र होने का डैम भर ले पर वह पाकिस्तान के डी ऐन ए में ही नहीं है वहां के नेता देश के बाहर कुछ भी बोल ले लेकिन वापिस जाते ही उनकी बोलती बंद हो जाती है प्रेस की आजादी तो केवल दिखावा है

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