/यूपी के DGP बोले बदायूं केस में जो सामने आया वह सच नहीं भी हो सकता..

यूपी के DGP बोले बदायूं केस में जो सामने आया वह सच नहीं भी हो सकता..

पूरे देश को दहलाकर रख देने वाले यूपी के बदायूं केस में नया मोड़ आ गया है. प्रदेश के डीजीपी एएल बनर्जी ने ये कहकर नया विवाद पैदा कर दिया है कि इस मामले में पकड़े गए आरोपी बेकसूर हो सकते हैं और हो सकता है कि लड़कियों की हत्या किसी और ने की हो. डीजीपी ने ये भी कहा कि हत्या का मकसद भी कुछ और हो सकता है क्योंकि एक लड़की के साथ रेप की पुष्टि नहीं हो रही है. उधर इस मामले में हुई किरकिरी के बाद यूपी सरकार ने बदायूं के एसएसपी अतुल सक्सेना और डीएम शंभूनाथ यादव को सस्पेंड कर दिया है.al-banerjee

गौरतलब है कि बदायूं जिले के उसहैत थाने के कटरा गांव में 14 और 15 वर्ष की दो चचेरी बहनों की बलात्कार के बाद फांसी पर लटकाकर हत्या कर दी गई थी. दोनों चचेरी बहनें 27 मई को लापता हो गई थीं और अगले दिन गांव के बगीचे में उनके शव एक पेड़ पर लटकते पाए गए थे. पुलिस ने इस मामले में दो सिपाहियों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.

मामले पर देशभर में तो हंगामा मचा ही हुआ है, यूएन और यूएस तक ने चिंता जताई है. अखिलेश सरकार ने चौतरफा राजनीतिक दबाव के बीच मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. सीबीआई के मामला संभालने तक मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई है. बदायूं के एसएसपी अतुल सक्सेना और डीएम शंभूनाथ यादव को भी सरकार ने आज सस्पेंड कर दिया.

इन सबके बीच आज खुद डीजीपी ने ये कहकर सबको चौंका दिया कि इन लड़कियों की हत्या का मकसद कुछ और भी हो सकता है. डीजीपी एएल बनर्जी ने कहा कि बदायूं कांड में हर आरोपी का लाइ डिटेक्टर और नारको टेस्ट कराएंगे. लड़कियों को मारने के बाद लटकाया गया. मुंह में कपड़ा दबाकर गला दबा दिया गया. पीड़ित परिवार दहशत में है. यूपी सरकार ने हालांकि पूरी सुरक्षा मुहैया कराई है. पुलिस कॉल डीटेल खंगाल रही है. घटनास्थल पर बीयर की बोतल भी मिली है.

डीजीपी एएल बनर्जी ने कहा कि यह भी हो सकता है कि जिन लोगों पर आरोप है, उन लोगों ने क्राइम ना किया हो, किसी और ने क्राइम किया हो. मर्डर का उद्देश्य कुछ और हो सकता है. बनर्जी ने कहा कि एक लड़की के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है.

डीजीपी एएल बनर्जी के बयान से सवाल
डीजीपी एएल बनर्जी के बयान से सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल यूपी पुलिस की कार्यशैली और अखिलेश सरकार के इस मुद्दे पर नजरिए को लेकर. डीजीपी ने जांच पूरी होने से पहले ही आरोपियों को तकरीबन क्लीन चिट दे दी है. सवाल उठता है कि ऐसे में जबकि इस घटना में अभी विवेचना पूरी भी नहीं हुई है और फोरेंसिक रिपोर्ट आनी बाकी है तब डीजीपी किस आधार पर ये दावा कर रहे हैं? जब जांच चल रही है तो डीजीपी आरोपियों को क्लीन चिट देते क्यों नजर आ रहे हैं? क्या वाकई इस घटना में बेकसूरों को जेल भेजा गया है? क्या डीजीपी के ऐसे बयान से आरोपियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा? क्या इस बयान से जांच पर असर नहीं पड़ेगा?
इस घटना में शामिल दो पुलिसवालों समेत पांच आरोपी जेल में हैं और पुलिस ने अभी तक उनको कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ तक नहीं की है. ऐसे में डीजीपी किन तथ्यों के आधार पर आरोपियों को क्लीन चिट दे रहे हैं, ये समझ से बाहर है. बदायूं केस में यूपी पुलिस पहले दिन से ही सवालों के घेरे में है. सरकार की साख पर भी इस घटना ने बट्टा लगाया है. डीजीपी के इस बयान ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि जघन्य वारदातों को लेकर पुलिस के आला अधिकारियों में भी संवेदनशीलता की कमी है.

42 आईपीएस अफसरों का ट्रांसफर
उधर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी कानून व्यवस्था सुधारने की दिशा में सख्त तेवर दिखाए हैं और एक साथ 42 आईपीएस अफसरों का ट्रांसफर कर दिया है. मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा कि अपराधियों और शांति भंग करने वालों के खिलाफ एनएसए लगेगा. महिलाओं से कोई अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर कार्रवाई नहीं होने की शिकायत होती है तो बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा. आलोक रंजन ने बताया कि विधायकों, सांसदों के अलावा अदालती आदेश को छोड़ कर सभी के गनर छीने जाएंगे. राज्य में कहीं भी अवैध खनन हुआ तो डीएम-एसएसपी जिम्मेदार होंगे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.