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BBC की तर्ज़ पर होगा दूरदर्शन का पुनर्गठन..

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को कहा कि वह प्रसार भारती को ब्रिटिश ब्रोडकास्टिंग कारर्पोरेश (बीबीसी) की तर्ज पर पुनर्गठित करना चाहते हैं. इसके लिए इसकी ‘संपादकीय स्वतंत्रता’ और इसके ‘कर्मचारियों पर आंतरिक नियंत्रण’ में वृद्धि की जाएगी.doordarshan

समाचार चैनल हेडलाइन टुडे के साथ बातचीत में जावड़ेकर ने कहा, ‘‘मैं दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो का नेतृत्व करने के लिए एक पेशेवर प्रधान संपादक की नियुक्ति करने पर विचार कर रहा हूं और उचित लगने पर लोगों को समाचार कवर करने की पूरी आजादी होगी.’’ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा कि ‘दार्शनिक रूप से’ और ‘वैचारिक रूप से’ उनका मानना है कि लोकतंत्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कोई आवश्यकता नहीं है.

जावड़ेकर ने कहा, ‘‘दार्शनिक रूप से और वैचारिक रूप से मेरा मानना है कि लोकतंत्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कोई जरूरत नहीं है. प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) भी इससे सहमत हैं और मेरी दीर्घ अवधि का लक्ष्य इस मंत्रालय को निष्क्रिय बनाने की दिशा में काम करना है.’’ उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में दूरदर्शन और आकाशवाणी के संचालन में किसी किस्म का हस्तक्षेप नहीं होगा.

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. अच्छा परिवर्तन होगा जब दूरदर्शन सरकारी भोंपू न रहकर स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य कर सकेगा तब ख़बरों के साथ न्याय भी होः इसकी विश्वश्नीयता भी बढ़ेगी जैसा कि बी बी सी की है

  2. अच्छा परिवर्तन होगा जब दूरदर्शन सरकारी भोंपू न रहकर स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य कर सकेगा तब ख़बरों के साथ न्याय भी होः इसकी विश्वश्नीयता भी बढ़ेगी जैसा कि बी बी सी की है

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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