/25 छात्र व्‍यास नदी में बह गए..

25 छात्र व्‍यास नदी में बह गए..

हिमाचल के मंडी जिले में रविवार को जलस्‍तर बढ़ने से 25 छात्र व्‍यास नदी में बह गए. सभी हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र थे. छात्र यहां घूमने आए थे तभी औट के निकट लार्जी बांध से अचानक पानी छोड़ा गया, जिसमें छात्र बह गए. इस घटना में बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है. लोगों ने कुल्‍लू-मनाली हाइवे को जाम कर दिया है.
जानकारी के मुताबिक हैदराबाद से 50 किमी दूर स्थित वीएनआर विगनाना ज्‍योति कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्‍नोलॉजी के 46 छात्र इंडस्ट्रियल इंटर्नशिप के दौरान हिमाचल आए हुए थे. शिमला में दिन बिताने के बाद सभी बस से मनाली लौट रहे थे. तभी शाम करीब 7:30 बजे छात्र लार्जी बांध के पास बस से उतरकर चाय-नाश्‍ता कर रहे थे. इस दौरान 24 छात्र बांध की सैर करने लगे.25-students-swept-away

स्‍थानीय लोगों ने बताया कि छात्र पानी के काफी नजदीक चले गए थे. ऐसे में बांध से अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़ने से जलस्‍तर बढ़ गया और नदी की धारा ने छात्रों को अपनी चपेट में ले लिया. हादसे का शिकार हुए 25 में ट्रिप मैनेजर किरण भी शामिल हैं. कॉलेज प्रशासन छात्रों के नाम जानने की कोशिश में जुटा है ताकि उनके घरवालों को खबर दी जा सके.

ट्रिप में छात्रों के साथ मौजूद प्रोफेसर ए अदित्य ने कहा, ‘अचानक पानी आ जाने की वजह से हमने छात्रों को आवाज लगाई, लेकिन वो दूर निकल गए थे. शायद मेरी आवाज वहां तक नहीं पहुंच पाई.’ मंडी के एडीएम पंकज राय ने कहा कि अचानक पानी के आने से यह हादसा हुआ है. प्रशासन राहत और बचाव कार्य के लिए पूरी तरह तैयार है. सुबह से रेसक्यू का काम शुरू हो जाएगा.

दूसरी ओर रविवार को ही आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने वाले चंद्रबाबू नायडू ने ट्विटर पर जानकारी दी कि उन्‍होंने इस संदर्भ में दिल्‍ली बात की है और सभी जरूरी कदम उठाने के साथ ही पीड़ित परिवारों को मदद करने की बात कही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.