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सोशल मीडिया पर बैन लगाने की मांग..

By   /  June 10, 2014  /  No Comments

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पिछले हफ्ते सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने से पुणे में हुई हिंसा के बाद महाराष्ट्र सरकार हरकत में आ गई है. राज्य के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड करने वालों के साथ-साथ इन पोस्ट को लाइक और शेयर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है. इसके साथ ही राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने सोशल मीडिया पर बैन लगाने की मांग कर डाली है.No-Social-Media

गौरतलब है कि फेसबुक पर अज्ञात लोगों ने छत्रपति शिवाजी और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की आपत्तिजनक तस्वीरें डाल दी थीं. इसके बाद पुणे में बीते सोमवार को आईटी प्रोफेशनल मोहसिन शेख की हत्या हुई थी. एक कट्टरपंथी संगठन हिन्दू राष्ट्र सेना के कार्यकर्ताओं ने शेख की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इसके बाद पुणे में दो दिन तक हिंसा का दौर चला था.

फेसबुक पर भीमराव अंबेडकर से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री अपलोड होने के बाद सोमवार रात पुणे, नासिक और कोल्हापुर में भी तनाव पैदा हो गया था. एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं ने इन इलाकों में सरकारी बसों में तोड़फोड़ की थी.

गृह मंत्री पाटिल ने कहा, ‘सोशल मीडिया का पूरी दुनिया में इस्तेमाल होता है. यह अच्छे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन अराजक तत्व इसे गलत मकसद से यूज कर रहे हैं. महाराष्ट्र में हाल ही में हुई घटनाओं में यह बात साफ भी होती है.’

इस बीच महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने मांग की है कि सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन लगाया जाए. अजित पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा में कहा कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगना चाहिए. उन्होंने कहा कि वह इस बारे में केंद्र सरकार से सिफारिश भी करेंगे. अजित ने कहा, ‘सोशल मीडिया नफरत फैलाने का जरिया बन चुका है. ऐसे तत्वों पर बैन लगाना जरूरी है.’

गौरतलब है कि ट्विटर और खासकर फेसबुक पर कई ऐसे पेज बने हैं जो धर्म के आधार पर नफरत भरी पोस्ट्स डालते रहते हैं. बहुत सी फेक प्रोफाइल्स भी हैं, जो धर्म इत्यादि के आधार पर एक-दूसरे के धर्म पर निशाना साधते रहते हैं.

अफवाहें फैलाने में भी ऐसे पेजों और प्रोफाइल्स की बड़ी भूमिका रहती है. अब एक ऐसी पॉलिसी बनाए जाने की मांग भी उठ रही है, जिससे फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया यूज करने वालों की जवाबदेही तय की जा सके.

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  • Published: 4 years ago on June 10, 2014
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  • Last Modified: June 10, 2014 @ 9:26 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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