/रामदेव भी फंसे पितृत्व विवादों में, महिला ने किया पुत्री होने का दावा..

रामदेव भी फंसे पितृत्व विवादों में, महिला ने किया पुत्री होने का दावा..

ख़बरों में रहने वाले बाबा और पिछले कुछ समय में सुखियों से गायब रहने वाले बाबा रामदेव के नाम के साथ एक नया विवाद सामने आया है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास देवरिया की एक महिला ने रामदेव की जैविक पुत्री होने का दावा किया है. इसके संबंध में उसने बहादराबाद थाने में तहरीर दी है. हालांकि पुलिस ने इसे कानूनी मसला बताते हुए महिला को कोर्ट जाने की सलहा देकर अपना पल्ला झाड़ लिया दी है. इस घटना के बाद हर्दिवर में चर्चाओं का बाज़ार गरम है .ramdev-ll

रविवार को बहादराबाद (हरिद्वार) थाने में एक महिला ने एसओ को जानकारी दी कि योग गुरु और कई बड़े नेताओं के करीबी बाबा रामदेव उसके जैविक पिता हैं. उसने खुद को उत्तरप्रदेश के के देवरिया का निवासी बताया. उसके अनुसार वो तीन दिन पूर्व हरिद्वार में योग शिविर में हिस्सा लेने आई थी. यह महिला शादीशुदा है और दो बच्चों की माँ है और पारिवारिक विवाद के चलते अपने पति से अलग रहती है. अपने दावे के बाबत उस महिला ने लिखित तहरीर भी दी है जिसके बाद पुलिस ने महिला को कोर्ट जाने की सलाह दी है.

पुलिस इस मामले पर साफ़ कहने से बचती नज़र आई. पुलिस के अनुसार महिला के बयां भ्रामक और अपुष्ट हैं और स्वयं महिला की असंतुलित मनोदशा भी चिंता का विषय है. उसके दावे अलग अलग हैं. युवती को कोर्ट जाने की सलाह दी गयी है. फ़िलहाल बाबा रामदेव का पक्ष जानने की कोशिश की जा रही है. हरिद्वार में इस बात को ले कर सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं कि ये घटनाक्रम आगे क्या मोड़ लेता है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.