/इंडियन मुजाहिदीन का दावा: ”ब्लास्ट हूजी ने नहीं हमने किया, अब और करेंगे…”

इंडियन मुजाहिदीन का दावा: ”ब्लास्ट हूजी ने नहीं हमने किया, अब और करेंगे…”

दिल्ली बम धमाके के संदिग्धों का स्कैच

दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को हुए ब्लास्ट की जिम्मेदारी अब आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने ली है। संगठन ने एक ई-मेल भेजकर दावा किया है कि यह ब्लास्ट हूजी ने नहीं, बल्कि उसने किया है। गौरतलब है कि बुधवार को ब्लास्ट के बाद हरकत-उल-जेहादी इस्लामी (हूजी) ने इस ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी।

इंडियन मुजाहिदीन ने कुछ मीडिया संगठनों को गुरुवार दोपहर 12 बजकर 33 मिनट पर एक ई-मेल भेजा है। इसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली है। यही नहीं मेल में एक और ब्लास्ट की धमकी दी गई है।

मेल भेजने वाले ने खुद को इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य छोटू बताते हुए कहा कि वे मंगलवार को मॉल में एक और ब्लास्ट करेंगे, रोक सकते हो तो रोक लो। यह ई-मेल इंडियन मुजाहिदीन की ओर से ही भेजा गया है या फिर किसी ने शरारत की है, पुलिस इसकी जांच कर रही है।

गौरतलब है कि दिल्ली ब्लास्ट के ठीक बाद हूजी ने भी ई-मेल भेजकर इस ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी। यह ई-मेल कश्मीर के किश्तवाड़ से भेजा गया था। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ शहर में एक साइबर कैफे पर छापेमारी के बाद पुलिस को इस बात के पुख्ता सबूत मिले कि दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए विस्फोट की जिम्मेदारी लेने वाला ईमेल यहीं से किया गया था। अब पुलिस को ई-मेल करने वाले संदिग्ध की तलाश है।

जम्मू से 230 किलोमीटर दूर किश्तवाड़ स्थित ग्लोबल इंटरनेट कैफे के मालिक से पूछताछ के बाद जांच अधिकारियों को इस बात की थोड़ी-बहुत जानकारी मिल गई है कि ई-मेल करने वाला व्यक्ति कैसा दिखता था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को बताया, ‘हमें इस बारे में कुछ जानकारियां मिली हैं कि उस व्यक्ति की कद-काठी कैसी थी और वह कैसा दिखता था। उसकी तलाश के लिए पुलिस दल तैनात किए गए हैं।’ उन्होंने बताया कि मामले में अब तक कोई औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने दुकान के मालिक ख्वाजा महमूद अजीज व उसके भाई खालिद अजीज से पूछताछ की। उनके साइबर कैफे के रेकॉर्ड्स की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि बुधवार को वहां कौन-कौन पहुंचा था।
(नभाटा से साभार)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.