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आसाराम के विरुद्ध गवाही देने वाले अमृत प्रजापति की गोलियाँ लगने से मौत..

By   /  June 10, 2014  /  2 Comments

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बलात्कार और नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में जोधपुर सेन्ट्रल जेल में बंद आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले अमृत प्रजापति की मृत्यु हो गयी है. गत 23 मई को राजकोट में हुए एक हमले में प्रजापति को गोलियां लगी थीं, जिसके बाद से वे अस्पताल में भर्ती थे. मंगलवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी. आसाराम को पिछले साल सितम्बर में गिरफ्तार किया गया था. आसाराम पर सूरत की महिला ने भी भी बलात्कार का आरोप लगाया था जिसके बाद स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ने मामले की जांच की थी. इस मामले में भी चार्जशीट दाखिल हो चुकी है.amrit prajapati

अमृत प्रजापति ने आसाराम पर आरोप लगाया था कि वे पंचेड़ बूटी के नाम पर अफीम का सेवन करते हैं और रतलाम के निकट अपने फार्म हाउस पर इसकी खेती भी करवाते हैं . आसाराम के लिए अफीम वहीँ से आती थी. प्रजापति के अनुसार उसे आसाराम के सभी काले कारनामों की पूरी जानकारी थी और उसने आसाराम को कई बार लड़कियों के साथ अन्तरंग स्थिति में भी देखा है. बकौल प्रजापति, आसाराम ने अपनी ज़िन्दगी में एक हज़ार से अधिक बलात्कार किये थे.

अहमदाबाद के ओधाव में रहने वाला अमृत प्रजापति एक समय में आसाराम का बहुत करीबी था. वह राजकोट में आयुर्वेद की प्रैक्टिस किया करता था. प्रजापति ने 18 वर्षों तक आसाराम के अहमदाबाद वाले आश्रम में काम किया था. वड़ोदरा में दो बच्चों की संदिग्ध मौत के सिलसिले में प्रजापति ने गवाही दी थी जिसके लिए उसे 2005 में उसे आश्रम में निकाल दिया गया. कोटा के पवन कुमार ने आसाराम के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में गवाही के लिए पुलिस प्रजापति को कोटा लायी थी. प्रजापति ने आरोप लगाया था कि आसाराम ने उस पर दो दर्जन बार हमले करवाए थे.

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  • Published: 3 years ago on June 10, 2014
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  • Last Modified: June 10, 2014 @ 3:40 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. जेल में आसाराम खुश हो रहे होंगे कि एक कांटे को हटाने में तो उन्हें सफलता मिली लेकिन जो मुकदमे शुरू हुए हैं उनसे मुक्ति पाना इस जन्म में सम्भव नहीं ये फार्महाउस, आश्रम सब बाहर ही रहेंगे व वे दोनों बाप बेटे जेल में , जो उनके लिए माकूल स्थान है देर आयद दुरुस्त आयद , पाप का घड़ा कभी न कभी भरता ही है शायद यह कहावत बिलकुल सही ही है,ईश्वर कुकर्मों का फल इसी जीवन में प्रदान कर देता है

  2. जेल में आसाराम खुश हो रहे होंगे कि एक कांटे को हटाने में तो उन्हें सफलता मिली लेकिन जो मुकदमे शुरू हुए हैं उनसे मुक्ति पाना इस जन्म में सम्भव नहीं ये फार्महाउस, आश्रम सब बाहर ही रहेंगे व वे दोनों बाप बेटे जेल में , जो उनके लिए माकूल स्थान है देर आयद दुरुस्त आयद , पाप का घड़ा कभी न कभी भरता ही है शायद यह कहावत बिलकुल सही ही है,ईश्वर कुकर्मों का फल इसी जीवन में प्रदान कर देता है

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