/महाराष्ट्र में बनने जा रहा है पत्रकार सुरक्षा कानून..

महाराष्ट्र में बनने जा रहा है पत्रकार सुरक्षा कानून..

महाराष्ट्र में पत्रकार सुरक्षा कानून लाये जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है. “आने वाली कॅबिनेट की मिटिंग के सामने पत्रकार सुरक्षा कानून और पत्रकार पेन्शन के विषय मे प्रस्ताव लाकर उस विषय पर सकारात्मक फैसला लिया जायेगा.”sm

यह जानकारी राज्य के गृहमंत्री आर.आर.पाटील ने कल मुंबई मे दी. राज्य के विधानसभा का वर्षाकालीन अधिवेशन का कल समापन हो गया. इस अधिवेशन के आखिरी दिन विधानसभा के अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटील ने राज्य के पत्रकारों की समस्या के विषय मे चर्चा करने के लिए पत्रकार हमला विरोधी कृती समिति को आमंत्रित किया था.

इस बैठक में खुद आर.आर.पाटील भी उपस्थित थे. मिटिंग के आरंभ में समिति के अध्यक्ष एस.एम.देशमुख ने राज्य मे पत्रकारों के उपर बढ़ते हमले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस बारे मे सरकार से जल्द से जल्द कठोर कानून बनाने की मांग की. साथ ही एस.एम, देशमुख ने वरिष्ठ पत्रकारों के लिए कुछ अन्य राज्यों की तरह पेन्शन योजना लागू करने की भी मांग की.

आर.आर.पाटील ने स्पष्ट किया, “इस विषय मे सरकार गंभीर है और होने वाली कैबिनेट मीटिंग में दोनो विषयों पर चर्चा करके अंतिम फैसला लिया जाएगा”. बाद मे मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए एस.एम.देशमुख ने कहा ” सरकार अगर किया हुआ वादा पंद्रह दिन मे नहीं निभाती तो राज्य के पत्रकार निर्णायक आंदोलन करेंगे”. बैठक मे मंत्रालय तथा विधिमंडल वार्ताहर संघ के अध्यक्ष प्रवीण पुरो, मराठी पत्रकार परिषद के संतोष पवार और सुभाष भारद्वाज, टेलिव्हिज जर्नलिस्ट असोसिएशन के विलास आठवले, बहुजन पत्रकार संघ, पुरूषोत्तम आवारे पाटील, मुंबई महापालिका वार्ताहर संघ के सुचित अंबेकर, पूना जिला मराठी पत्राकर संघ के शरद पाबळे, सतारा जिला मराठी पत्रकार संघ के हरीश पाटेणे, वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र गांगन, मंदार पारकर समेत अन्य पत्रकार संगठन के पदाधिकारी तथा कई अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक मे हिस्सा लिया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.