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अगर आप फेसबुक इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए..

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-प्रसाद बापत||

अगर आप फेसबुक इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. सोशल मीडिया का यह बड़ा प्लेटफॉर्म आपकी पूरी तरह से निगरानी कर रहा है. आप उसका कहां और कैसे इस्तेमाल करते हैं और आपका वहां व्यवहार कैसा है, यह सब वहां ट्रैक हो रहा है. यह खबर एक अंग्रेजी अखबार ने दी है.Damn batteries didn’t last long

उसके मुताबिक गूगल की ही तरह अब फेसबुक भी अपने यूजर की पसंदगी-नापसंदगी और उसका व्यवहार जानना चाहता है. इसके पीछे मंशा यह है कि आपके पेज पर आपकी रुचि और आपके स्वभाव के अनुसार ही विज्ञापन डाले जाएं. आप किसी भी वेबसाइट पर जाएंगे तो फेसबुक को पता चलता रहेगा कि आप कहां हैं. हालांकि इसके लिए आपको लाइक बटन एक बार दबाना होगा. आप किस तरह की वेबसाइट में जा रहे हैं और क्या पढ़ रहे हैं, यह फेसबुक जान जाएगा. वह आपके पढ़ने की आदतों को जान जाएगा. फेसबुक ने यह टेक्नोलॉजी एक ऑटोमेटिक फीचर के जरिये हासिल किया है. लेकिन एक्टिविस्ट का कहना है कि गूगल और फेसबुक को यूजर से संबंधित डेटा का इस्तेमाल उसकी अनुमति से ही करना चाहिए.

विज्ञापनदाताओं के लिए फेसबुक एक तरह से डेटा बैंक बना रहा है ताकि वह उपयुक्त लोगों के सामने विज्ञापन कर सकें. फेसबुक से प्राप्त डेटा को डेटा ब्रोकर कंपनियां प्रॉसेस कर लेती हैं और उन्हें यूजर के प्रोफाइल का पता चल जाता

इस डेटा को विज्ञापनदाताओं को दे दिया जाता है और वह अपने हिसाब से यूजर को टारगेट करती हैं.

यह काम कुछ इस तरह से होता है. मान लीजिए आप फैशन और एक्सेसरीज की साइट पर जाते रहते हैं. ऐसी हालत में माना जाएगा कि आप इनके शौकीन हैं और आपको फैशन का सामान बनाने वाली कंपनियां विज्ञापन बेहतर ढंग से दे पाएंगी. फेसबुक के लिए यह बड़ा बिजनेस होगा. इसके पहले गूगल ने इस तरह के डेटा के जरिए13 अरब डॉलर की कमाई की थी. फेसबुक इससे भी बड़ा बिजनेस करना चाहता है.

कुछ देशों खासकर यूरोप में यूजर की अनुमति के बगैर डेटा इकट्ठा करना गलत है और इसके लिए कानून बने हुए हैं. उनका मानना है कि यह निजता का हनन है. इसके लिए गूगल और फेसबुक के यूजर की अनुमति लेनी चाहिए. हालांकि फेसबुक ने ऑप्ट आउट की व्यवस्था कर रखी है लेकिन बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं.

http://www.aboutads.info/choices/ आप इस साईट पर जाकर चेक कर सकते है कि आप कि इन्टरनेट गतिविधियों पर कौन कौन सी क्म्पानियां नजर रख रही है और आप “सबमिट” ऑप्शन यूज करके आपकी पसंदीदा क्म्पानियोको सिलेक्ट क

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. क्या फर्क पड़ता है ?जिनके पास ज्यादा सीक्रेट्स हो वे परवाह करें , या जो इन विज्ञापनों को पढ़ें , इंटरनेट खरीदारी करें वे फिर भी सोचें

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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