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एक विलेन का बंजारा गायक मोहम्मद इरफ़ान..

By   /  June 20, 2014  /  No Comments

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एक विलेन का “बंजारा” गायक मोहम्मद इरफ़ान कुछ गायक ऐसे होते हैं जिनकी आवाज़ सीधे श्रोताओं के दिलों पर दस्तक देती है और जिनकी गायकी सुनकर रूहानी सुकून भी मिलता है ऐसे ही एक गायक है मोहम्मद इरफ़ान अली जिनके गीत सुनकर श्रोता उनके दीवाने हो जाते हैं. अभी उनका गाया एक गीत “बंजारा” श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय है. फिल्म ‘एक विलेन’ का यह गीत जिस दिन रिलीज़ हुआ उसी दिन से इसकी लोकप्रियता बढती ही जा रही है. पिछले दिनों इरफ़ान से मुलाकात हुई. पेश हैं मुलाक़ात के मुख्य अंश..

 

जिधर देखो आजकल आपका गीत “बंजारा” ही सुनने को मिलता है हर जगह. चाहे एफ एम रेडियो हो या यूट्यूब सभी पर यही गाना छाया हुआ है. कैसा लगता है आपको ?IMG_123119438636983

बहुत खुशी होती है जब आपके गाये गीत को इतनी लोकप्रियता मिलती है. ऐसा लगता है जैसे आपकी मेहनत सफल हो गई. मैं बहुत खुश हूँ मेरे गाये गीत को श्रोताओं ने इतना पसंद किया.

 इस गीत की लोकप्रियता की क्या वजह हो सकती है ?

गीत – संगीत का अच्छा सामंजस्य ही गीत को मधुर बनाता है. यही वजह है कि यह गीत श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है. मिथुन ने इस गीत में संगीत दिया है और लिखा भी उन्होंने ही है.

 मिथुन केसाथ पहलेभी काम किया है. कैसा रहा साथ काम करना ?

बहुत ही अच्छा. मैंने उनके साथ सबसे पहले फिल्म ‘लम्हा’ में काम किया था. इस फिल्म में मैंने २ गीत गाये थे. सलाम जिंदगी और रहमत ज़रा, रहमत ज़रा के लिए तो मुझे अवार्ड भी मिला था. इसके बाद मर्डर – २ का ‘फिर मोहब्बत करने चला’ यारियां का ‘बारिश’ भी गाया है. मिथुन के साथ गाये सभी गीतों को श्रोताओं ने बेहद पसंद किया है.

आप लगभग सभी संगीतकारों के साथ काम कर चुके हैं, किसके साथ सबसे ज्यादा अच्छा रहा

काम करना? मैंने अभी तक ए आर रहमान, मिथुन, हिमेश, जीत गांगुली, साजिद – वाजिद और संजीव दर्शन आदि संगीतकारों के साथ काम किया है. सभी के साथ मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला और अच्छे अनुभव रहे. फिल्म ‘सिटी लाइट्स’ केगीत भी काफी लोकप्रिय हुए हैं. हाँ, जीत गांगुली के निर्देशन में मैंने २ गीत ‘मुस्कुराने की वजह तुम हो’ और जिया जाए ना’ गाये हैं और ये दोनों ही गीत आज भी चार्ट नंबर में हैं.

 क्या आपनेकभी सोचा था आपकेगायेगीत इतनेलोकप्रिय होंगे ?

सोचता तो था मैं अक्सर कि काश मेरे गाये गाने भी लोगों की जुबां पर हों. अब कहीं जाकर मेरा यह सपना पूरा हुआ है. बहुत मेहनत करनी पड़ी इसके लिए , तब कहीं जाकर थोडा सा कुछ मिला है. अभी तो बहुत आगे जाना है मुझे.

 क्या आपकेपरिवार वालेखुश हैंआपकेकरियर से?

पहले तो नही खुश थे लेकिन अब खुश हैं जब मेरे गाने सुनते हैं तो.

आपने रहमान के साथ ‘रावण’ फिल्म में ‘बहनेदे’ गाया है, बताइए कुछ उनके बारे में ?

कैसे मौका मिला उनकेसाथ काम करनेका ? मैं हैदराबाद में संगीत अकेडमी में परफोर्म कर रहा था वहीँ लोकप्रिय गायक एस पी बालासुब्रह्मण्यम ने मुझे सुना उन्होंने ही मुझे रहमान सर से मिलवाया. बहुत नर्वस था जब मैं उनसे मिला लेकिन उन्होंने बहुत ही आराम से मुझे ‘बहने दे’ गीत गवाया, बहुत अच्छा लगा उनसे मिल कर.

 किस हीरो केलिए गीतों को गाना चाहते हैं ?

बस अच्छे गीत गाना चाहता हूँ चाहे वो किसी भी हीरो पर फिल्माये जाये.

 किन संगीतकारोंकेसाथ गाना चाहते हैं ?

अभी तो बहुत सारे संगीतकार हैं जिनके साथ मैंने उनके साथ अभी तक काम नही किया है इसलिए उनके साथ और जिनके साथ कर चुका हूँ सभी के साथ करना चाहता हूँ.

और किन फिल्मोंमेंआप गा रहे हैं ?

कई सारे गीत मैंने गाये हैं जैसे – जैसे फ़िल्में रिलीज़ होंगी आपको मैं बताऊंगा.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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