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CPMT का पर्चा आउट, परीक्षा रद्द, अब 20 जुलाई को..

गाजियाबाद में पर्चा लीक होने के कारण उत्तर प्रदेश में आज होने वाली सीपीएमटी निरस्त कर दी गई है. अब यह 20 जुलाई को होगी. परीक्षा के आयोजक केजीएमयू ने पर्चा लीक होने के कारणों की जांच करने को एक कमेटी नियुक्त की है जो कि इस मामले की रिपोर्ट जल्दी ही देगी.UPCPMT-PAPER-LEEK

सूबे में आज होने वाली सीपीएमटी में एक लाख नौ हजार 292 अभ्यर्थी को बैठना था. इसके लिए प्रदेश में 213 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे. लखनऊ में सर्वाधिक 43 परीक्षा केंद्र बने थे. इसकी तैयारियां लंबे समय से हो रही थीं और कल तक दावा किया जा रहा था कि इस बार कि परीक्षा को बेहद कुशलता से संचालित किया जाएगा. परीक्षा को बेदाग सम्पन्न कराने के दावे उस समय धरे रह गए जब बैंक के लॉकरों से निकले पेपर रखे बक्सों की सील टूटी मिली. इसके अलावा बक्सों के अलग-बगल छेद भी मिले हैं.

गाजियाबाद के डीएम ने बक्सों की सील टूटी होने की पुष्टि करने के बाद शासन को जानकारी दी. सीपीएमटी प्रवेश परीक्षा के पर्चे बक्से सील करने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा इलाहाबाद बैंक की विभिन्न शाखा के लॉकर में रखे गए थे. आज परीक्षा शुरू होने से पहले जब बक्सों को स्ट्रांग रूम से बाहर निकाला गया तो उनकी सील टूटी हुई थी तथा बक्से कुछ जगह से टूटे हुए थे. इसको देखते हुए जिलाधिकारी ने सूचना शासन को प्रेषित की.

परीक्षा के आयोजक किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का दावा था कि इस बार परीक्षा में किसी मुन्ना भाई की दाल नहीं गलेगी. केजीएमयू का दावा है कि इस बार पेपर का एक सेट डीएम के पास, एक सेट जोनल मजिस्ट्रेट के पास तथा एक सेट परीक्षा के आयोजक के पास है. इसके बाद भी परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठ गया. डीएम गाजियाबाद ने कहा कि परीक्षा के पेपर लीक होने के कारणों की जांच स्थानीय स्तर पर भी होगी. पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच करेगी.

सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा का पर्चा लीक होने के कारण इसके स्थगित होने की सूचना से लाखों परीक्षार्थी तथा उनके अभिभावक परेशान हो उठे. परीक्षा केंद्रों के बाहर भारी भीड़ के कारण न तो उनको सही सूचना मिल पा रही थी और न ही उनकी परेशानी सुनने वाला कोई था. भयंकर गर्मी के कारण परीक्षार्थी तथा उनके अभिभावक धूप में इधर-उधर भटक रहे थे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.