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DU और UGC की अड़ी से तीन लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में..

By   /  June 24, 2014  /  2 Comments

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में कोर्स विवाद के चक्कर में तीन लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है. अब भी एडमिशन पर सस्पेंस पर बरकरार है. आज दिल्ली युनिवर्सिटी की कट ऑफ लिस्ट जारी होने थी लेकिन नहीं हो पाईं. श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स ने पहली कटऑफ लिस्ट को जारी किया था लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया. अब कल से एडमिशन भी शुरू नहीं हो पाएगा.du-1

दिल्ली यूनिवर्सिटी में ग्रैजुएशन के लिए इस बार दो लाख अठहतर हजार छात्रों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया है. यही नहीं उन साठ हजार छात्रों का भविष्य भी अधर में है जो चार साल के ग्रैजुएशन कोर्स में एडमिशन ले चुके हैं.

डीयू और यूजीसी विवाद को सुलझाने के लिए नए फॉर्मूले पर विचार, सूत्रों के मुताबिक बीटेक साइंस प्रोग्राम चार साल का ही रहेगा, बीकॉम और बीए तीन साल के प्रोग्राम हो सकते हैं.

आपको बता दें कि यूजीसी ने कहा कि सुनिश्चित किया जाए कि एफवाईयूपी के तहत जिन विद्यार्थियों का 2013..14 में नामांकन हुआ उन्हें तीन वर्षीय कार्यक्रम में स्थानांतरित किया जाए. साथ ही यूजीसी ने यह भी कहा है कि किसी भी परिस्थिति में दिल्ली विश्वविद्यालय या उसका कोई भी कॉलेज शैक्षणिक सत्र 2014..15 में एफवाईयूपी के तहत छात्रों का दाखिला नहीं लेगा.

निर्देश पालन के लिए आज दोपहर तक की समयसीमा प्रदान करते हुए यूजीसी ने डीयू और इसके सभी 64 कॉलेजों से कहा कि उसके आदेश का पालन करें या अनुदान बंद किए जाने जैसे ‘‘परिणाम’’ भुगतें.aisa

4 साल के कोर्स के समर्थन में दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य आदित्य नारायण मिश्रा समेत कुछ प्रोफेसर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने सोमवार को यूजीसी के अधिकारियों के साथ बैठक की. उसके बाद स्मृति ईरानी ने कहा कि यूजीसी सुप्रीम है और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश की यूनिवर्सिटी को यूजीसी के निर्देश का पालन करना ही होगा.

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  • Published: 3 years ago on June 24, 2014
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  • Last Modified: June 24, 2014 @ 1:45 pm
  • Filed Under: शिक्षा

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. डी यू की अनावश्यक मनमानी के कारण छात्रों के भविष्य साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वह भी केवल वी सी की हठधर्मिता के कारण उच्च पदों पर बैठे लोग किस तरह मनमानी कर अधिकारों का दुरूपयोग करते हैं यह इसकी एक बानगी है

  2. डी यू की अनावश्यक मनमानी के कारण छात्रों के भविष्य साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वह भी केवल वी सी की हठधर्मिता के कारण उच्च पदों पर बैठे लोग किस तरह मनमानी कर अधिकारों का दुरूपयोग करते हैं यह इसकी एक बानगी है

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