/दिल्ली में साझे की सरकार बनायेंगे भाजपा और कांग्रेस..

दिल्ली में साझे की सरकार बनायेंगे भाजपा और कांग्रेस..

दिल्ली में भाजपा की सरकार बनाने के लिए प्रयासरत भाजपा के नेता नितिन गडकरी और रामवीर सिंह बिधूड़ी से सीलमपुर के कांग्रेसी विधायक मतीन अहमद और ओखला के विधायक आसिफ मुहम्मद ने मुलाकात की है. इस मुलाकात की पुष्टि मतीन ने एक समाचार पत्र से बातचीत में की है. मतीन ने बताया कि दिल्ली में गद्दी पाने की जुगत में तेज़ी आ चुकी है. एक हिंदी न्यूज़ चैनल ने भी भाजपा नेता और कांग्रेस विधायकों की मुलाकात के फुटेज जारी किये हैं.CongressVsBJP

हालाँकि मतीन अहमद ने अभी किसी तरह की डील या अंतिम निर्णय की बात नहीं कही है और कहा है कि अभी प्रक्रिया बातचीत के दौर में है. सिर्फ चर्चाएं है. अगले हफ्ते देवेन्द्र यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद ही कोई बात साफ़ हो पायेगी. इन मुलाकातों में मतीन के साथ गए उनके करीबी के हवाले से बताया गया है कि कांग्रेस के आठ में से छः विधायक अलग पार्टी बना सकते हैं जिससे उनपर एंटी डिफेक्शन लॉ की सूरतें लागू न हों. इन चर्चाओं में सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल और विभाग बंटवारों को ले कर भी बातें हुयी हैं. बिधूड़ी जो कि इन बातचीत की मीटिंगों में सूत्रधार बताये जाते हैं , इस समय मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे दिख रहे हैं.

हालाँकि दोनों ही पार्टियों के प्रवक्ताओं ने इन ख़बरों को निराधार बताया है. गौरतलब है कि दुबारा चनावों की पक्षधर रही भाजपा के पास 3 विधयाकों के सांसद चुने जाने के बाद अब सिर्फ 28 विधायक रह गए हैं. आम आदमी के 27 और कांग्रेस के आठ विधायक हैं. दिल्ली में केजरीवाल के इस्तीफे के बाद फ़िलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है और कार्यभार उप-राज्यपाल नजीब जंग की देख रेख में हो रहा है. नजीब जंग के कार्यालय के हवाले से मिली ख़बरों के अनुसार राजनितिक स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट अगले दो महीनो में सौंप सकते हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.