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50000 करोड़ का चूना मंज़ूर है मगर वसूली रेल यात्रियों से..

By   /  June 27, 2014  /  2 Comments

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26000 करोड़ रूपये के घाटे की पूर्ति के लिए राष्ट्रहित के नाम पर कडा फैसला बताते हुवे रेलवे में यात्री भाड़े में 14.2% व् माल भाड़े में 6.5% बढ़ोत्तरी कर दी गई। परन्तु पूर्ण बहुमत के सरकार द्वारा लौह अयस्क निर्यातको द्वारा घरेलु खपत के नाम पर रेलवे को चूना लगाये गए लगभग 50000 करोड़ की वसूली के लिए कोई भी कड़ा फैसला नही लिया जा रहा है।Screenshot_2014-06-27-10-22-40

सीवीसी के आदेश पर विभिन्न जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार घरेलू खपत के नाम पर रेलवे को 50000 करोड़ का नुकसान निर्यातको ने पहुँचाया है। कुछ महीने पहले सीवीसी को सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार 10 में से 09 निर्यातको ने घरेलु खपत के नाम पर धांधली की है।

इस राजस्व चोरी का पता कलकत्ता के रश्मि ग्रुप द्वारा रेलवे से 700 करोड़ की धोखाधड़ी से सम्बन्धित था।रेलवे द्वारा नोटिस जारी करने के बाजूद इस समूह ने 2011-2012 में फिर 202 करोड़ की चीटिंग की. विभिन्न जांच एजेंसी और रेलवे के सतर्कता अधिकारियों द्वारा किये जा रहे जांच में SER के चक्रधरपुर डिविजन के मात्र 05 लोडिंग पॉइंट में 4193 करोड़ की राजस्व चोरी पकड़ी गई है जबकि अकेले SER में 50 लोडिंग पॉइंट है। CAG की 2011-2012 के रिपोर्ट के अनुसार SER के 50 लोडिंग पॉइंट से निर्यातको को रेलवे ने 1795 करोड़ का अनुचित लाभ पहुँचाया। निर्यातको के अनुसार आयरन ओर के घरेलू खपत पर रेलवे 300-400 रूपये प्रति टन चार्ज करती है जबकि विदेशी खपत पर यही दर 2000 रुपये प्रति टन है।

सबसे आश्चर्यजनक बात है कि वर्ष 2011 -2012 में पुरे देश के विभिन्न कारखानों की कुल खपत 30 लाख टन की थी पर निर्यातको ने 48 लाख टन आयरन अतिरिक्त परिवहन किया। कम से कम 18 लाख टन आयरन और घरेलू खपत के नाम पर विदेश जिसमे से अधिकतर चाइना पहुंचाए गए। 200 करोड़ राजस्व की औसत से 2011 -12 में कुल नुकसान 3600 करोड़ रूपये है। नुक्सान के अलावा रेलवे की कुल वार्षिक लाभ प्रति वर्ष 18000 करोड़ रूपये है, इस प्रकार रेलवे की 2008- 2012 की कुल राजस्व वसूली 50000 करोड़ से अधिक है।

गौरतलब है कि रेलवे को जो आय होती है उसे सेना पर खर्च किया जाता है। इस राशि की वसूली हो जाती है और इन लीकेज पॉइंट को बंद कर दिया जाता है तो देश, सेना और नागरिको का कितना भला होगा, सोचा जा सकता है। पर इसके लिए कड़े फैसले लेने होंगे। और कड़े फैसले कब लिए जायेंगे यह कोई नहीं जानता.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Gaurav Dixit says:

    Do some thing in Tanu Sharma case….if you guys think ..your platform can do excellence

  2. How this exice loss Went unnoticed by then ruling government ?? घरेलू खपत के नाम पर रेलवे को 50000 करोड़ का नुकसान निर्यातको ने पहुँचाया

    Read more: http://mediadarbar.com/27613/loss-of-50000-crores-is-acceptable-in-indian-railway/#ixzz35ofp5kHG

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