/देश की सबसे लोक कल्याण कारी सरकार की मिसाल है तमिलनाडू सरकार..

देश की सबसे लोक कल्याण कारी सरकार की मिसाल है तमिलनाडू सरकार..

चेन्‍नई,चुनाव के समय भाजपा की मार्केटिंग ही कुछ ऐसी थी कि लोगों को अपनी आंखों पर पट्टी बांधनी ही पड़ी नहीं तो विकास का दावा करने वाले नरेंद्र मोदी कभी देश के प्रधानमंत्री नहीं बनते. आम जनों को इस बात पर यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन यही सच है.15_jaya_782763g

तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता ने अपने राज्‍य में जो विकास कार्य किया है उसकी तुलना में कोई भी राज्‍य भी इस पायदान पर नहीं टिक सकता. मोटे तौर पर कहा जाए तो तमिलनाडु देश का सबसे सस्‍ता राज्‍य है जहां गुजरात की ही भांति 24 घंटे बिजली समेत अन्‍य मूलभूत सुविधाएं मिलती हैं.

देश भर में तमिलनाडु ही एक ऐसा राज्‍य है जहां आम जनों काे सबसे सस्‍ता भोजन उपलब्‍ध हो सकता है. मुख्‍यमंत्री जयललिता ने अपने राज्‍य के गरीबों के लिए सस्‍ते भोजन से लेकर सस्‍ती दवाई तक सभी कुछ उपलब्‍ध करा रखा है.

अम्‍मा नाम से चलने वाली ‘अम्‍मा कैंटीन, ‘अम्‍मा ड्रग स्‍टोर्स’, ‘अम्‍मा वॉटर’,  ‘अम्‍मा नमक’ और ‘अम्‍मा बस’ तमिलनाडु को अन्‍य राज्‍यों से बिल्‍कुल अलग करती है. सस्‍ता भोजन तमिलनाडु में सस्‍ता भोजन दिए जाने के लिए अम्‍मा कैंटीन का संचालन शुरु किया गया है. इस कैंटीन में 1 रुपए में 1 इडली और मात्र 15 रुपए में पेट भर भोजन मिल जाता है. अन्‍य राज्‍यों से आने वाले लोगों को पेट भर भोजन वो भी सस्‍ते दामों में शायद ही कोई सरकार देती हो.

सस्‍ती दवाई

आज के समय में अगर सबसे ज्‍यादा पैसा कहीं खर्च होता है तो वो है दवाई. लेकिन जयललिता ने एक ऐसी व्‍यवस्‍था शुरु कर दी है कि अब दवाइयां भी सस्‍ते दामों पर ही उपलब्‍ध हो रही हैं. अम्‍मा ड्रग स्‍टोर नाम से चलने वाली मेडिकल शॉप में सभी दवाइयां रियायती दरों पर उपलब्‍ध कराई जाती हैं. इस योजना को शुरु करने का उद्देश्‍य यही है कि गरीब भी अपने मरीज का सही तरीके से इलाज करा सके.

सस्‍ता पानी

अम्‍मा कैंटीन की ही तर्ज पर अम्‍मा वॉटर भी शुरू किया. सभी जानते हैं कि तमिलनाडु में जबरदस्‍त पूरे साल गर्मी पड़ती है. ऐसे में यह अम्‍मा वॉटर बिसलेरी और अन्‍य निजी कंपनियों की पानी बोतल से काफी सस्‍ती है. तमिलनाडु में हर गरीब इंसान भी बाजार से पानी की बोतल खरीदकर अपनी प्‍यास बुझा सकता है.

सस्‍ता आवागमन

तमिलनाडु में रहने वाले लोगों को आवागमन में कोई दिक्‍कत न हो और ज्यादा पैसे भी न देने पड़े इसके लिए अम्‍मा बस का संचालन शुरु किया गया है. इन बसों में यात्रियों से कम पैसे किराए के तौर पर वसूले जाते हैं. बता दें कि ऐसी बसों की सुविधा अन्‍य राज्‍यों में नहीं है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.